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24 अगस्त 2026

हर रोज करीब 30 किसान कर रहे आत्महत्या, इन आत्महत्याओं की 'जिम्मेदार' मोदी सरकार और उसकी विफल नीतियां: कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला

नई दिल्ली: किसानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि, नरेंद्र मोदी सरकार में हर घंटे कम से कम एक किसान आत्महत्या करने को मजबूर ह…

हर रोज करीब 30 किसान कर रहे आत्महत्या, इन आत्महत्याओं की 'जिम्मेदार' मोदी सरकार और उसकी विफल नीतियां: कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला
हर रोज करीब 30 किसान कर रहे आत्महत्या, इन आत्महत्याओं की 'जिम्मेदार' मोदी सरकार और उसकी विफल नीतियां: कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली:  किसानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि, नरेंद्र मोदी सरकार  में हर घंटे कम से कम एक किसान आत्महत्या करने को मजबूर है और यह सरकार की विफलता के चलते हो रहा है। 2021 के ताजा आंकड़े के अनुसार कृषि क्षेत्र में 10,881 लोगों ने आत्महत्या की, हर रोज लगभग 30 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। हर घंटे 1 से अधिक किसान अपनी जान लेने को विवश हो रहे हैं| NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2021 तक 53 हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। 



कांग्रेस ने आरोप लगाया, ‘इन आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़ों की जिम्मेदार मोदी सरकार और उसकी विफल नीतियां हैं|, यह मोदी सरकार की विफलता का नतीजा है और किसानों की इस दयनीय स्थिति के बावजूद मोदी जी तमाशे में और अपने झूठे महिमा मंडन में व्यस्त हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार तीनों ‘काले’ कृषि कानूनों को पिछले दरवाज़े से लागू करना चाहती है और इसी कारण अनाज की खरीद की व्यवस्था निजी क्षेत्र को सौंपी जा रही है।



सुसाइड नोट में किसान ने PM मोदी को 'ठहराया' मौत का जिम्मेदार

प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'''17 सितम्बर को महाराष्ट्र के पुणे में एक किसान जिनका नाम दशरथ लक्ष्मण केदारी था, उन्होंने प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए आत्महत्या कर ली। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि मोदी साहब, आप बस अपने बारे में सोचते हैं, हमारे पास पैसे नहीं हैं, साहूकार इंतजार करने को तैयार नहीं हैं, हम क्या करें? आज मैं आपकी निष्क्रियता के चलते आत्महत्या करने को मजबूर हूँ। हमें फसलों की कीमत दें, ये हमारा अधिकार है और ऐसा लिखने और कहने के बाद केदारी जी ने अपनी जान दे दी। उन्होंने साफ तौर से मोदी जी को, उनकी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। महाराष्ट्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।  एमएसपी से लेकर जो रिकवरी एजेंटों की जुड़ी प्रताड़ना है, उसको भी साझा किया है. लेकिन ये पहली बार नहीं है कि किसी किसान ने या खेती से जड़े किसी व्यक्ति ने सरकार की उदासीनता, सरकार की विफलता के बारे में इस तरह से उनको जिम्मेदार ठहराकर अपनी जान दी हो। 



हर रोज 30 किसान कर रहे आत्महत्या

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''आपके सामने कुछ आंकड़े रखने जरुरी हैं, क्योंकि आंकड़े झूठ नहीं बोलते और आंकड़े सरकारी आंकड़े हैं। 2021 का जो लेटेस्ट आंकड़ा है, उसके मुताबिक कृषि क्षेत्र में 10,881 लोगों ने एक साल में आत्महत्या की और ध्यान से सुनिए, हर रोज लगभग 30 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। प्रत्येक दिन 30 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। इसका मतलब हुआ कि इस देश में हर घंटे एक से ज्यादा किसान आज अपनी जान दे रहा है। आज विवश है अपनी जान देने को, आज विवश है आत्महत्या करने को। हर घंटे एक से ज्यादा किसान, 24 घंटों में 30 किसान अपनी जान दे रहे हैं और एनसीआरबी के इन आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से, जबसे मोदी सरकार आई है, 2021 तक जो न्यूनतम आंकड़े हैं, 53 हजार लोगों ने, किसानों ने आत्महत्या की है, पिछले 7 सालों में।




कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''उन्हें मजबूर कौन कर रहा है और स्थिति इतनी गंभीर क्यों हैं? अगर मैं एक लाइन में बोलूं, इसके लिए वाकई में जिम्मेदार जैसे कि पुणे के किसान केदारी जी ने कहा है, मोदी जी हैं और उनकी सरकार की विफलता है क्योंकि अपने झूठे महिमामंडन में और अपनी झूठी वाहवाही मे असल मुद्दों पर न चर्चा हो और असली मुद्दों का न संज्ञान लिया जाए और ये कितनी बड़ी विडंबना है कि 2022 में जब हम बात कर रहे हैं, एक्चुअली तो किसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया गया था, दोगुनी करना तो छोड़ दीजिए आज हर घंटे एक से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहा है। 



PM मोदीने कहा था मेरे लिए थोड़े मरे हैं 700 किसान

उन्होंने ने कहा कि, ‘लेकिन क्या मुझे हैरानी है कि ऐसा हो रहा है, शायद मुझे हैरानी नहीं है और यही इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि वही प्रधानमंत्री, जिनकी जिद और अहंकार के चलते 700 किसानों की शहादत हुई। सिर्फ उनकी जिद को, सिर्फ उनके अहंकार को, सिर्फ उनकी झूठी छवि को बचाने के लिए 700 किसानों की शहादत हुई और जब संवैधानिक पद पर बैठे हुए उनको एक व्यक्ति ने कहा कि ऐसा हो रहा है, तो प्रधानमंत्री ने याद है, पलटकर क्या कहा था, मुझे क्या, मेरे लिए थोड़े ही मर रहे हैं। तो ऐसे प्रधानमंत्री को हर घंटे एक से ज्यादा किसान की होने वाली आत्महत्या से क्या फर्क पड़ता होगा, मुझे नहीं पता, लेकिन ये कैसे रेस्पॉन्सिबल हैं, ये आपको मैं क्रमवार तरीके से 4-5 बिंदुओं में बता देती हूँ।



चंद पूंजीपति मित्रों के लाभ के लिए 'तीन काले कानून' लाने कोशिश की..

श्रीनेत ने कहा कि,ये वही सरकार है, ये वही मोदी सरकार है, जिसने अपने चंद पूंजीपति मित्रों के लाभ के लिए किसानों के खिलाफ तीन काले कानून लाने की कोशिश की और उसके बाद मुंह की खानी पड़ी और कानून वापस लेने पड़े, लेकिन कानून थोपे गए थे, जिसके चलते किसानों की शहादत हुई।



मोदी सरकार ने कहा था कि लागत का 50 प्रतिशत ऊपर एमएसपी देने से 'मार्केट बिगड़ जाएगा

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'ये वही मोदी सरकार है, जिसने सुप्रीम कोर्ट को कहा था ??ि लागत का 50 प्रतिशत ऊपर एमएसपी देने से 'मार्केट बिगड़ जाएगा। ये वही मोदी सरकार है, जो 2014 में जैसे ही सत्ता में आई. इन्होंने राज्यों को लिखकर कहा कि अगर एमएसपी के ऊपर खरीद हुई, तो हम आपका अनाज नहीं खरीदेंगे। लिखकर धमकाया राज्य सरकारों को कि एमएसपी पर खरीद नहीं होगी, उसके बाद भी हमारी सरकारों ने जैसे कि छत्तीसगढ़ में युक्ति निकाली और लोगों को अनाज का पैसा ज्यादा दिया। यही मोदी सरकार है, जिसने डीजल का दाम बेतहाशा बढ़ाया, जिसने खाद पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया, कीटनाशक पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया, कृषि उपकरणों पर 12 प्रतिशत, ट्रैक्टर पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाकर कृषि की लागत प्रति हैक्टेयर 15 हजार रुपए बढ़ा दी। 



सरकार ने 3 सालों में 67 हजार करोड़ रुपए बजट के ( कृषि के लिए) खर्च ही नहीं किए.

उन्होंने ने कहा कि, ‘ये वही मोदी सरकार है, जिसने लगातार कृषि का बजट As a percentage of the Union Budget कम किया। 2020 में कृषि का बजट पूरे बजट का लगभग 4.6 प्रतिशत था, इस वर्ष वो मात्र 3 प्रतिशत है। ये वही मोदी सरकार है, जिसने 3 सालों में 67 हजार करोड़ रुपए बजट के खर्च ही नहीं किए, कृषि के लिए और सरेंडर कर दिए, ये मेरे आंकड़े नहीं हैं, ये सारे आंकड़े सरकारी हैं। ये पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन एग्रीकल्चर के आंकड़े हैं, जिन्होंने कहा था- ये बिल्कुल मिथ्या है कि आप किसान की आय दोगुनी कर दीजिएगा, आपकी नीति के चलते किसान तो प्रताड़ित हो रहे हैं। एनएसओ द्वारा जारी डेटा है ये। किसानों की आय दोगुनी वालों के मुंह पर तो आंकड़े तमाचा मार रहे हैं। आय होनी थी दोगुनी, 27 रुपए प्रति दिन किसान कमा रहा है आज और हर किसान के ऊपर 74 हजार रुपए कर्जा है, औसतन। 



तीनों ‘काले’ कृषि कानूनों को पिछले दरवाज़े से लागू करना चाहती है मोदी सरकार 

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'अब एक नई युक्ति हो रही है और उसके बारे में भी थोड़ी सी चर्चा हो जाए इससे पहले कि मैं अपना अंतिम वक्तव्य बोलूं, अब सुनने में आ रहा है कि अब पीछे के द्वार से, जब सामने से बात नहीं बनी और काले कृषि कानून वापस लेने पड़े, अब पीछे के द्वार से एंट्री दिलाई जाएगी। अब खरीद में निजी क्षेत्र को लाया जाएगा। अभी तक खरीद एफसीआई, जो कि केन्द्र शासित है, वो करती थी और राज्य सरकारें करती थीं, अब अनाज की खरीद, प्रोक्योरमेंट निजी हाथों के द्वारा होगी। तो मेरा अपना मानना है कि किसानों को ये झुनझुना जो देती है सरकार, 6 हजार रुपए का प्रति क्वार्टर ये बात करनी बंद कर दें, क्योंकि आपने 12 लाख करोड़ रुपए अपने पूंजीपति मित्रों का वापस किया, लेकिन किसान अगर कर्जे में डूबकर आत्महत्या कर रहा है, तो न आप उसका संज्ञान लेंगे, न उस पर चर्चा करेंगे। 



मोदी सरकार का आंकड़ों का खेल पुराना है...

सुप्रिया ने कहा कि ,''अंत में और एक बात बोलना जरुरी है, इसी सरकार के सांसदों नें, मंत्रियों ने सदन में झूठ बोला था कि 2014 से 2021-22 के बीच में किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की। मैंने आंकड़े आपके सामने रखे हैं, ये केन्द्र सरकार के आंकड़े हैं। 53 हजार से ऊपर किसानों ने पिछले 7 साल में और एक साल अकेले में 10,881 किसान, मतलब हर घंटे एक से ज्यादा किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। लेकिन आंकड़ों का खेल पुराना है। ये वही सरकार है, जिसने कहा था कि एक भी श्रमिक सड़कों पर चल नहीं रहा था और लाखों लोगों को कोरोना में चिलचिलाती धूम में चलाया था।



उन्होंने ने कहा कि, ‘हमारा मानना है कि मोदी सरकार की जवाबदेही तय करनी पड़ेगी। जवाब देना पड़ेगा। किसान आपका नाम लिखकर आत्महत्या कर रहे हैं आज। सीधे-सीधे जो पुणे का किसान है और इससे अगर सभ्य समाज का माथा नहीं कौंधता है, दिमाग नहीं खराब होता है, तो किस चीज से होगा, ये अपने आप में एक सवाल है। किसान इस देश की रीढ़ की हड़ी है, अन्नदाता है, उनके साथ जो आप कर रहे हैं, और वो आत्महत्या करने को मजबूर हैं,इसका सीधा the blame of this lies at the door step of the Modi Government and they cannot look away.




एक प्रश्न पर कि इसको लेकर आपकी क्या मांगें हैं, श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि हमारी मांगे बहुत साफ हैं। जो हमने पहले मुद्दे उठाए, हमारी पहली मांग है, किसानों का ऋण बिल्कुल माफ होना चाहिए। इस देश में जब किसान के या गरीब के ऋण की बात होती है, तो फिस्कल सिचुएशन समझाई जाने लगती है, लेकिन जब पूंजीपतियों का 10-12 लाख करोड़ रुपए आप माफ करते हैं, एक बार में और राइट ऑफ करते हैं तो कोई दिक्कत नहीं होती है और उसमें से आप कितना रिकवर करते हैं और फिर कुछ चरण चुंबक आपको समझाने लगते हैं कि राइट ऑफ और माफी में क्या अंतर है? कोई अंतर नहीं है। अगर रिकवरी रेट 8 प्रतिशत है, तो आपने सारा पैसा माफ किया है पूंजीपतियों का, किसानों का कर्जा माफ करिए। 



किसानों को 50 प्रतिशत उनकी लगात पर एमएसपी दीजिए, जिसका वादा आपने चुनावी क्षेत्र में और चुनावी रैलियों में किया था। आपने जिस तरह की जीएसटी लगाई हुई है, चाहे वो कृषि उपकरण हो, चाहे वो खाद हो, चाहे वो पेस्टीसाइड्स हों, उसको खत्म कीजिए, कृषि पर टैक्स लगाने वाली पहली सरकार जो आप बन गए हैं, उसको समाप्त कीजिए। डीजल का जो आपने दाम बढ़ाया हुआ है, उसको कम कीजिए। मांगे तमाम है, क्या ये सरकार सुनेगी? क्या ये प्रधानमंत्री, जो कहते हैं मेरे लिए थोड़े ही किसानों ने शहादत दी है, क्या इनकी आँखें खुलेंगी या धृतराष्ट्र की तरह ये आँखों पर पट्टी बांधकर बैठे रहेंगे, आज सवाल ये है। 



भाजपा अध्यक्ष द्वारा दिए एक बयान को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे लगता है भाजपा के अध्यक्ष को अगर आप कुदाल और फावड़े का अंतर पूछेगे न, तो वो बता नहीं पाएंगे। अगर आप उनको रबी और खरीफ की फसल का अंतर पूछेगे न, तो वो बता नहीं पाएंगे। वो धान और चावल में अंतर नहीं बता सकते हैं। वो ज्वार और बाजरे में अंतर नहीं बता पाएंगे। तो इस तरह की वाहियात बातें करना बंद कीजिए। आज किसान आपके कार्यकाल में आत्महत्या करने को मजबूर है और किसान आत्महत्या करके अपने सुसाइड नोट में लिख रहा है कि मोदी साहब, आप सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं। हमारे पास पैसे नहीं है, साहूकार इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है। मैं आपकी निष्क्रियता के चलते आत्महत्या करने को मजबूर हूं, हमें फसलों की कीमत दीजिए, ये हमारा अधिकार है और इसके बाद एक किसान अपनी जान दे देता है। ऐसे एक नहीं, ऐसे हर घंटे पर एक से ज्यादा किसान हैं।




अनाज की खरीद निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में  श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे लगता है ये बैकडोर एंट्री है प्राईवेट क्षेत्र के लिए। जब आप प्राईवेट क्षेत्र को अपने काले कानूनों से सामने से नहीं ले पाए, तो अब आप उनको बैकडोर एंट्री करा रहे हैं। पीछे का दरवाजा खोलकर चोरी के तरीके से उनको अंदर लाया जा रहा है। आप कह रहे हैं कि जो अब तक एफसीआई खरीद करती थी, जो खरीद अभी तक राज्य सरकारें करती थी. अनाज का प्रोक्योरमेंट अब उसको आप कह रहे हैं कि निजी हाथों से कराया जाएगा। ये कैसे संभव हो सकता है और अगर ये बैकडोर एंट्री नहीं है तो बैकडोर एंट्री की कोई दूसरी डेफिनेशन है, तो हमें जरुर बताई जाए।



महाराष्ट्र में किसान की आत्महत्या को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि आपका जो सवाल है, उसका एक जवाब बहुत सिंपल है कि हां, हमारी कुछ महीने पहले तक थी, लेकिन अब जिसकी सरकार है, उसकी जवाबदेही बनती है। लेकिन आपके सवाल का अगर मैं ज्यादा व्यापक तौर पर जवाब दूं, तो उसका जवाब भी बहुत सिंपल है। किसानों के उपकरणों पर, किसानों की खाद पर, किसानों की कीटनाशक दवाईयों पर, खेती के उपकरणों पर, ट्रैक्टर पर 18-18 प्रतिशत की जीएसटी लगाने का निर्णय तो मूलतः केन्द्र सरकार का है। डीजल के दाम पर जिस तरह से एक्साईज ड्यूटी बढ़ाई गई, वो केन्द्र सरकार का निर्णय है। एमएसपी 50 प्रतिशत की लागत के ऊपर न दी जाए, ये निर्देश लिखित में केन्द्र सरकार ने राज्यों को दिए हैं और ये भी कहा है कि अगर आप उसके ऊपर दीजिएगा, तो हम आपका अनाज नहीं खरीदेंगे, ये धमकाने का काम केन्द्र सरकार ने किया है।


सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र सरकार ने बोला है कि अगर हम 50 per cent cost plus पर एमएसपी देंगे, तो मार्केट बिगड़ जाएगा। तो फिर जवाबदेही कैसे सिर्फ राज्य सरकारों की हो सकती है? मुझे लगता है जवाबदेही केन्द्र सरकार की है। ठीक है, कृषि एक राज्य सब्जेक्ट है, लेकिन आपकी नीतियों के चलते आज ये हाल है कृषि क्षेत्र का। आप 6 हजार रुपए का झुनझुना बजाते हैं, लेकिन 25 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर कृषि की लागत बढ़ गई है, कृषि करने का दाम बढ़ गया है, ये किसकी जिम्मेदारी है?


एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि हमारा स्टैंड इस पर बड़ा सिंपल है। हमारा स्टैंड इसी मंच से नहीं, तमाम बार और तमाम तरीकों से हमने बोला है। एक साजिश है, एक षड़यंत्र है संस्थाओं को नेस्तोनाबूत करने का। ये साजिश है कि संस्थाएं कमजोर बनी रहें और वो संस्थाएं जो लोकतंत्र को मजबूत करती हैं, जो लोगों की बात उठाने का अवसर देती हैं, जो विपक्ष को मौका देती है कि सरकार को मुद्दों पर घेरा जा सके, उन सब संस्थाओं को क्षीण किया जा रहा है, उन सब संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।



जो लोग बड़ी डींगे हांकते थे, क्यों आज लोकपाल की कुर्सी खाली है? क्यों आज लोकपाल जैसी जगह पर कोई आपकी समस्या सुनने वाला नहीं है और सारे केसेस सीबीआई और ईडी को ट्रांस्फर हो रहे हैं? अगर लोकपाल एक कारण से गठित किया गया था, बनाया गया था. तो लोकपाल में लोग होने चाहिए सुनने के लिए। यही हाल हमने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में देखा था। आप बात का बतंगड़ बनाते थे, बड़े-बड़े स्वांग रचते थे, लेकिन 18 महीने तक वहाँ का शीर्ष पद खाली था। तो संस्थाओं को चलाने वाले जब नहीं रहेंगे, तो संस्थाएं चलेंगी कैसी? वही हाल लोकपाल का भी है।



एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीनेत ने कहा कि अब मुझे नहीं पता कि वो मोदी जी को छोड़कर, अमित शाह जी को घेरना चाह रही हैं। अब मुझे नहीं पता कि उन्होंने डिसाइड कर लिया है कि मोदी जी अच्छे हैं, मैं उनकी बात पर टिप्पणी नहीं करूंगी, लेकिन हां, मैं दो बातें जरुर कहूँगी, इस सरकार में दिल्ली में बैठे हुक्मरानों की, इस सरकार में प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकृति के बिना परिंदा नहीं फड़कता है, तो प्रधानमंत्री को जब आप क्लीनचिट देते हैं, तो कहीं न कहीं क्या आप उनको उन आरोपों से बरी नहीं करते हैं, जिन पर देश आज सवाल पूछ रहा है?



ये लुका-छिपी का खेल अगर आप विपक्ष में हैं, तो नहीं खेला जा सकता है और इस बारे में हमारी रणनीति और मेरे नेता की नीति बिल्कुल साफ है। हम हर मुद्दे पर, जो जनता के मुद्दे हैं, उन पर हम सरकार को घेरेंगे। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता आप हमारे खिलाफ ईडी भेजिए, हमारे खिलाफ सीबीआई भेजिए, आप झूठा प्रचार करिए, आप अपनी ट्रोल आर्मी छोड़ दीजिए, मुद्दों पर तो आपसे सवाल पूछा जाएगा। 



अगर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी हैं, तो उनकी जवाबदेही तय करना हमारा काम है। मुझे लगता है कि ये हमारा काम है, हमरा कर्तव्य है और हमारा धर्म है। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी जी निडर, निर्भीक और अडिग रहकर ये काम करते हैं। हम बाकी विपक्ष की तरह लुका-छिपी, अभी थोड़ा कह दो, फिर पीछे हट जाओ, अभी इनके पक्ष में वोट करवा दो, फिर पीछे हट जाओ, ये लुका-छिपी का खेल अब देखिए राजनीति में नहीं खेला जा सकता है। लुका-छिपी का अगर आप खेल खेल रहे हैं, तो कहीं आपकी नीति और नीयत पर भी और उसके खोट पर भी जरुर सवाल उठ जाएंगे।



एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीनेत ने कहा कि मैंने इस प्रस्ताव के बारे में आज सुबह थोड़ा पढ़ा और सुना, मुझे ऐसा लगता है कि सबसे पहले तो ये तय होगा कि ये जो ओपेक इलेक्टोरल बॉन्ड के चलते सत्ता का नंगा नाच हो रहा है। ये जो ओपेक बिल्कुल पारदर्शिता को ताक पर रखकर ये जो इलेक्टोरल बॉन्ड के चलते, 90 प्रतिशत, जब से ये इलेक्टोरल बॉन्ड लॉन्च हुए हैं, 90 प्रतिशत इलेक्टोरल बॉन्ड भाजपा के पास जा रहे हैं और 10 प्रतिशत में समूचा विपक्ष है, उसके बारे में भी चर्चा हो जाए न। कहाँ से आते हैं, इतने पैसे खरीद-फरोख्त के, उसके बारे में भी सरकार से चर्चा हो जाए। चुनी हुई सरकारों को गिराया कैसे जाता है, उसके बारे में भी आज हर संस्था को, स्पेशली चुनाव आयोग जैसी संस्था को भी चर्चा करने की जरुरत है।



ये तकनीकी मामला है और मुझे लगता है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और जो लोग इन चीजों को देखते हैं, वो ज्यादा बेहतर इसका जवाब दे पाएंगे, लेकिन क्योंकि बात चंदे की हो रही है, तो ये भी जानना जरूरी है कि किसको कितना चंदा कौन दे रहा है, इलेक्टोरल बॉन्ड किसको मिल रहा है और कौन दे रहा है, इसकी जानकारी सिर्फ सरकारी बैंको को है, जो सरकार के अंतर्गत आते हैं। तो ऐसा क्यों है कि 90 प्रतिशत इलेक्टोरल बॉन्ड भाजपा को जा रहे हैं और 10 प्रतिशत में समूचा विपक्ष है और क्या ये नॉन लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं है कि 8 साल सत्ता में हर जिले में बीजेपी का करोड़ों का मुख्यालय बन गया है? तो ये सारे सवाल भी मुझे लगता है चुनाव आयोग को पूछने चाहिए और उठाने चाहिए।



 एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि ये तो खैर उनको तब सोचना चाहिए था, जब उन्होंने गलबईयां करके उनके साथ सरकार बनाई थी, लेकिन मुझे लगता है कि उससे बड़ा मुद्दा आज ये है कि जब ये बच्चे पढ़-लिख लेंगे, तो इनको रोजगार कैसे मिलेगा? आज बड़ा मुद्दा ये है कि जब ये बच्चे पढ़-लिख लेंगे. तो इनकी आगे की पढ़ाई का क्या होगा? 400 प्रतिशत तो यूनिवर्सिटीज की फीस बढ़ाई जा रही है, ये बच्चे आगे कैसे पढ़ेंगे। बेमानी बातें मुद्दा नहीं है आज देश में। आज देश में मुद्दा ये है कि एक सोच, एक विचार नहीं थोपा जा सकता है। युवाओं को बेरोजगार रखने का षडयंत्र, लोगों की महंगाई से कमर तोड़ने की जो चर्चा है, उस पर चर्चा करनी चाहिए, उस पर बात उठानी चाहिए।



भारत को तोड़ने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया
श्रीनेत ने कहा कि,'''भारत को असल तोड़ने का काम, भारतीय जनता पार्टी ने किया है। आपने युवाओं के हौसले तोड़े हैं, आपने लोगों के सपनों को तोड़ने का काम किया है। आपने इस देश के तानेबाने को तोड़ने का काम किया है। आपने लोकतंत्र पर प्रहार करने का काम किया है और उसी को जोड़ने का काम भारत जोड़ो यात्रा कर रही है। मेरा तो अपना मानना है कि भाजपा के हर नेता को, अगर हिंदुस्तान समझना है और इस देश को समझना है, तो आईए, जुड़िए हमारे साथ, एक दिन चलिए, 9999980200 पर मिस्ड कॉल दीजिए भाजपा के नेताओं और आइए, हमारे साथ जुड़िए, bharatjodoyatra.in पर रजिस्टर करिए, हम आपको यात्रा का पास देंगे। आइए, हमारे साथ जुड़िए, आपके अंदर की नफरत थोड़ी खत्म होगी, आप इस देश के वास्तविक मूल्यों को, इस देश की आत्मा को समझ पाएंगे।



कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि भाजपा से मेरी एक रिक्वेस्ट है आप लोगों से, जरुर एक सवाल पूछिएगा कि उनके यहाँ अंतिम अध्यक्ष का चुनाव कब हुआ था, या पहला अध्यक्ष का चुनाव कब हुआ था? मैं तो कभी-कभी थोड़ा कन्फ्यूज हो जाती हूं कि अध्यक्ष नड्डा जी हैं, या अभी भी रबड़ स्टाम्प वाले बने हुए अमित शाह जी चला रहे हैं, सारी पार्टी? तो भाजपा को तो कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है इस पर बोलने का। मुझे ऐसा लगता है कि देश की राजनीति में कांग्रेस एक अकेला दल है, जो चुनाव प्रक्रिया करता है और एक-दो नहीं, 9,000 पीसीसी डेलीगेट्स इस चुनाव में हिस्सा लेते हैं। 



पीसीसी डेलीगेट्स बनना आसान नहीं, मैं भी एक पीसीसी डेलीगेट हूँ। आप पहले जाकर बूथ पर सदस्य बनाते हैं, वो बूथ कमेटी चयन करती है, फिर वो ब्लॉक कमेटी को भेजती है, ब्लॉक कमेटी चयन करती है, फिर पीसीसी डेलीगेट आप बनते हैं। तो जब 9,000 लोग इस चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं, तो ये उनके ऊपर है। अगर वो यूननिमस चाहते हैं, अगर वो अधिकृत करना चाहते हैं किसी को, तो ये हमारे ऊपर है, इसमें किसी को कोई ऑब्जेक्शन नहीं होना चाहिए।



इतनी पारदर्शिता से दूसरा कोई राजनैतिक दल चुनाव कराता नहीं है और अगर हमारे राज्यों को, मैं खुद एक कांग्रेस की वर्कर हूँ, मुझे लगता है कि हमारे नेता राहुल गांधी जी हैं और उनको अध्यक्ष जरुर बनना चाहिए। अगर कोई पारदर्शिता से ऐसा करना चाहता है और अधिकृत करना चाहते है कांग्रेस अध्यक्ष को, तो इसमें किसी और को क्या आपत्ति हो सकती है? मैं पूरी जिम्मेदारी से एक बात बोलती हूँ, न टेलीविजन स्टूडियो के चरण चुंबक और न भाजपा के नेता डिसाइड करेंगे कि हमारा अध्यक्ष कौन होगा। वो काम कांग्रेस के कार्यकर्ता और हमारे डेलीगेट्स करेंगे।



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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 20 सितंबर 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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