नई दिल्ली: कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर जम???र हमला बोला और कहा कि, वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5.60 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी के गर्त में धकेल दिए गए हैं और यह सब मोदी सरकार के गैर-जिम्मेदार रवैये और नाकामी का नतीजा है। एक डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 82.33 हो चुका है। विदेशी मुद्रा भंडार इस साल की शुरुआत से अब तक 100 बिलियन डॉलर खर्च हो चुका है, इसके बाद भी रुपए की गिरावट को रोका नहीं जा सका|
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि,“कल शाम को दो भयावह डेटा सामने आए। जो ज्यादा भयावह है, पहले उसके बारे में बात कर लेते हैं और उसके बाद जो कारण है उस डेटा का उसके बारे में चर्चा करेंगे।
● 5.6 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी में धैसे
● महामारी के दौरान मोदी सरकार की विफलताओं से गरीबी बढ़ी
● विश्व बैंक ने तीसरी बार अनुमानित GDP ग्रोथ दर घटायी
● अर्थव्यवस्था की बुनियाद कमजोर हो रही है, संकट गहराया
● कमजोर रुपए, विदेशी मुद्रा भंडार से 100 अरब डालर समाप्त
●Current Account, Flscal Deficit और व्यापार घाटा बढ़ा
● महंगाई का कहर गरीब पर - खाने की वस्तुएँ महँगी
5.6 करोड़ देशवासी अथाह गरीबी की खोह में
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,“देश में गरीबी भयावह रूप ले रही है - और सरकार बेख़बर है। कल शाम वर्ल्ड बैंक ने इस साल तीसरी बार हमारी अनुमानित GDP ग्रोथ को घटा कर 7.5% से 6.5% कर दिया। अब कम GDP का सीधा मतलब होता है - बेरोज़गारी और ग़रीबी। अपनी कल की ही रिपोर्ट में विश्व बैंक ने भारत में गरीबी बढ़ने पर चिंता जताते हुए यह बड़ा खुलासा किया कि कोविड काल में करीब 5.6 करोड़ लोग अत्यधिक ग़रीबी मतलब abject poverty की खोह में चले गए।
गरीबी का अभिशाप भयावह है
विशेषज्ञों की मानें तो विश्व बैंक का यह भयावह आंकड़ा भी कम है - क्योंकि विश्व बैंक ने भारत में गरीबी को डॉलर के purchasing power parity मूल्य पर लगभग 20 रुपये से आंका है- जो की बहुत कम है। कुछ अर्थशास्त्रियों ने तो 27 से 30 करोड़ लोगों के अत्यधिक गरीबी में गिरने का दावा किया है। नीति आयोग ने खुद अपने बहुआयामी गरीबी सूचकांक में भी 25 फीसदी लोगों के गरीब होने की बात स्वीकारी है - मतलब 36.25 लोग गुरबत का शिकार हैं।
काश, कांग्रेस की बात सुनते मोदी जी.गरीब बच जाते
इसी स्थिति की आशंका के चलते - महामारी के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राहल गांधी की में बार बार गरीबों की कुछ आर्थिक मदद की माँग की थी, जिसकी सरकार ने अनसुनी करी - अगर सुन लिया होता तो लाखों मज़दूर चिलचिलाती धूप में पैदल ना चलते और करोड़ों लोग गरीबी में ना धेस जाते। अगर सुन लिया होता तो अर्थव्यवस्था ठप्प ना होती और रोज़गार तबाह ना होते। अगर सुन लिया होता धो छोटे मंझोले उद्योग बंद ना होते।
विश्व बैंक समेत बहुतों ने अनुमानित GDP दर घटाया
अब हो सकता है इसको देश के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय साज़िश का एक हिस्सा मान कर विश्व बैंक के पीछे भी ED छोड़ दी जाए - लेकिन अनुमानित GDP की ग्रोथ दर को पहले एशियन डेवलपमेंट बैंक, मूडीज (Moody's), फिच (Fitch) और यहाँ तक की RBI भी घटा चुके हैं
आर्थिक बुनियाद ध्वस्त, अर्थव्यवस्था पर संकट बढ़ा
हालात बदतर होते जा रहे हैं - रुपया टूट कर 82.33 प्रति डालर पर जा पहुँचा है - विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार कम होता जा रहा है - पिछले 9 महीनों में करीब 100 बिलियन डालर कम हुआ है। ट्विन डेफिसिट - fiscal deficit और current account deficit के साथ, व्यापार घटा लगातार बढ़ कर पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया है - निर्यात में 3.5% की गिरावट हुई है, FMCG की सेल 10% गिरी है, इस मंद उपभोग के चलते निवेश भी कुंद है, बढ़ती बेरोज़गारी और सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योगों की खस्ताहाल स्थिति ने गहरा संकट पैदा कर दिया है।
और इस सबके साथ महंगाई की मार ने जीना मुश्किल कर दिया है। खासतौर से उन लोगों का जिनको मोदी सरकार की विवेक-शुन्य नीतियों ने गरीबी और गुरबत में ढकेल दिया है। बढ़ती महंगाई के कारण, RBI ने लगातार 4 बार रेट बढ़ाए हैं - जिससे EMI की मार से कमर और टूटेगी।
गरीब परेशान, मोदी जी ड्रोन से आलू उठाने में व्यस्त
पर इस भयावह स्थिति में भी सरकार को तो कोई चिंता ही नहीं है - खोखला प्रचार जारी है - मोदी जी पहले आलू से सोना बना रहे थे अब ड्रोनाचार्य बनकर ड्रोन से आलू उठवाएँगे - क्या फ़र्क पड़ता है किसान अपनी फसल का मूल्य ना मिलने पर सड़क के किनारे उसको सड़ने के लिए छोड़ देता है - और आत्महत्या करते वक्त आपकी निष्क्रियता को कारण बताता है।
गरीबों के ज्वलंत सवाल:
गरीब की मदद तो दूर, उसके ऊपर और कहर बरपाया जा रहा है। क्या मोदी जी इन सवालों का जवाब देंगे कि
1- जब कच्चे तेल का दाम $116 प्रति बैरल से गिरकर $91 प्रति बैरल आ गया तो हमारे यहाँ दाम क्यों नहीं घटाए गए
2-CNG का दाम 6 और PNG का दाम ₹4 बढ़ा कर किसका भला कर रहे हैं?
3- देश की 130 ट्रेनों का किराया और प्लाट्फोर्म टिकट में 200% की बढ़ोतरी करके आप किस गरीब का विकास कर रहे हैं?
4- नाटा और दूध जैसी चीजों के दामों में आग लगाने से किस गरीब का भला हो रहा है?
5- विश्व हंगर इंडेक्स में भारत 116 देशों की सूची में 101 नम्बर पर है - क्या ग़रीब को दो वक्त भरपेट खाना देना आपका काम नहीं है?
6- 135 करोड़ के इस देश में 80 करोड़ लोग मुफ्त अनाज लेने को मजबूर क्यों हैं? उनको इस कगार पर आपकी नीतियों कैसे ले आयीं?
उन्होंने ने कहा कि, ‘तो अब बताइए देश में बढ़ती गरीबी को आप कैसे कम करेंगे - या यूँही आँख मूंद कर मुंह फेरे रहेंगे? और हाँ अंत में आपकी असीम अनुकम्पा के चलते अडानी जी 643वें सबसे अमीर व्यक्ति से विश्व के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हो गए- उसकी बहुत बधाई। इसका आधा ध्यान भी आप ग़रीबों पर दे दिया होता तो देश का यह हाल ना होता।
गौतम अडानी की दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की रैक में 643वीं से दूसरे स्थान पर आने को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि ,''ये कॉन्ट्राडिक्शन बिल्कुल नहीं है और ये समझाना जरुरी है। ये कॉन्ट्राडिक्शन इसलिए नहीं है क्योंकि हम बिजनेस के खिलाफ़ कतई नहीं हैं। हमें बिल्कुल नहीं लगता है कि प्रॉफिट एक खराब शब्द है। हमें बिल्कुल नहीं लगता है कि बिजनेसेज को पनपना नहीं चाहिए। बिल्कुल होना चाहिए, लेकिन मोनोपॉली, लेकिन एकाधिकार, जो क्रिएट करने का काम किया है, हर पोर्ट, हर एयर पोर्ट एक आदमी के नाम, बैंक का लोन एक आदमी के नाम, 5.5 लाख करोड़ का लोन राइट ऑफ एक आदमी के, वो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। हमें बिल्कुल दिक्कत नहीं है, बिल्कुल बिजनेस को पनपना चाहिए। बिजनेस पनपेगा, तभी नौकरियाँ बनेंगी, तभी रोजगार बनेगा, लेकिन इनमें से कितने बिजनेसेज में, जो हम दो हमारे दो हैं, उन्होंने कितनी नौकरियाँ बनाई हैं, पिछले 8 साल में ये भी सवाल पूछना पड़ेगा। बिजनेसेज इंवेस्ट करेंगे तभी सुचक्र जो है इकॉनमी का, वो चलेगा।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''मुझे बिल्कुल आपत्ति नहीं है, अडानी जी से और अंबानी जी से, लेकिन हां, मुझे सरकार की एकतरफा नीतियों से आपत्ति है। 643वें रैंक से अगर कोई व्यक्ति दूसरे रैंक तक पहुंचा है, तो उसमें सरकार का अथाह सहयोग रहा है। ऐसा ही सहयोग सरकार 6 करोड़ अथाह गरीबी में रह रहे लोगों के लिए भी कर दें। इसमें कोई विरोधाभास नहीं है। बिजनेस पनपे कि निजी क्षेत्र प्रोग्रेस करें और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देने का काम हमने किया था, 1991 की इकॉनमी लिबरलाइजेशन पॉलिसी से, उसके चलते पॉवर्टी खत्म हुई, उसके चलते ग्रोथ बढ़ी, उसके चलते मिडिल क्लास बढ़ा इंडिया का, लेकिन अब जो हो रहा है, वो पूरा उल्टा हो रहा है। अब जो हो रहा है, मोनोपॉलीज क्रिएट हो रही हैं, नीति निर्माण कुछ ही लोगों के लिए किया जा रहा है और वो सर्वथा गलत है।
इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे नहीं लगता, मेरी बात को फिर आपने सुना या समझा। मुझे ऐसा लगता है, मैंने पहले ही कहा, बिजनेसेज पनपेंगे, जब वो निवेश करेंगे और बिल्कुल निवेश होना चाहिए, राजस्थान में ही क्यों, छत्तीसगढ़ में भी करिए, दूरदराज इलाकों में भी जाके असम में भी करिए, नॉर्थ-ईस्ट में भी करिए, तमिलनाडु में करिए, कश्मीर में करिए, हर जगह करिए, निवेश करिए, लेकिन निवेश करना एक चीज होती है और सरकार जिस तरह से नीति बनाकर बैक डोर एंट्री देती है, केन्द्र सरकार की मैं बात कर रही हूँ, वो गलत है।
श्रीनेत ने कहा कि,''आप पूरी तरह वाकिफ है कि किन दो बिजनेस हाउसेज के लिए वो काले कानून बने थे, किसानों के खिलाफ, जो वापस करने पड़े। मुझे कोई आपत्ति नहीं है, अंबानी जी, अडानी जी ग्रोथ करें, पैसा कमाएं, देश में नौकरियों बनाएं, एक नहीं तमाम मुख्यमंत्रियों के साथ उनकी फोटो आए, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जिस तरह की मोनोपॉली, जिस तरह का संरक्षण एक तरह से सिर्फ कुछ ही ग्रुप्स को मिल रहा है, वो गलत है।
डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि,'' इन पर मुझे हंसी भी नहीं आती है, थोड़ा तरस आता है, कि रुपया तो 40 पर आने वाला था, मोदी जी के आते हुए। तो रुपया मोदी जी की बात न सुनकर बिल्कुल उल्टी दिशा में भाग रहा है और ये वो मोदी जी हैं, जो कहते थे- मुझे बड़ी चिंता है, मैं शासन में बैठा हूँ, रुपया कमजोर सिर्फ डॉलर के कारण नहीं होता है, रुपए का कमजोर होने का कारण करप्शन है। रुपए के कमजोर होने का कारण नीति निर्धारकों की नीयत में खोट है। अब किसकी नीयत में खोट है?
उन्होंने ने कहा कि, ‘आप मुझे एक बात का जवाब दीजिए, इस मंच से हम इसको जरुर उठाना चाहेंगे। यूएस के एसईसी ने जो उनका मार्केट रेगुलेटर है, हमारी तरह सेबी उसने ओरेकल को फाइन किया है, गिल्टी पाया गया है, दोषी करार करके फाइन किया है कि ओरेकल ने आधे मिलियन डॉलर की घूस रेलवे के अधिकारियों को रेल मंत्रालय में भारत में 2016 में जब पीयूष गोयल थे, तब दी। वहाँ पर फाइन हो गया, यहाँ पर मोदी जी कहते थे, न खाऊँगा, न खाने दूंगा और एक सूई पटक सन्नाटा, कोई इंक्वायरी आपने सुनी? क्या ये पता किया गया कि एक कंपनी को अमेरिका में फाइन देना पड़ रहा है, घूस देने के लिए, यहाँ पर वो घूस किसने ली, उसमें कौन-कौन लिप्त था, एक शब्द नहीं। इसी करप्शन के चलते आज रुपया टूट रहा है और रुपया ऐसा टूट रहा है कि विदेशी मुद्रा भंडार का सौ मिलियन डॉलर आपने लगा दिया, लेकिन रुपया संभल नहीं पा रहा है, क्योंकि होड़ तो लगी है, रुपए की गिरावट में और प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा और साख में, आबरू से बड़े बेआबरू हो चले हैं।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे लगता है कि इस व्यक्ति विशेष पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगी, क्योंकि उनकी मानसिक स्थिति और उनकी मानसिक परिपक्वता को दुनिया ने देखा है। मुझे लगता है कि फेक न्यूज के सरगनाओं पर मैं इस मंच से बात नहीं करूँगी। मैंने इस बात का जवाब दे दिया है कि निवेश करना, बिजनेसेज का पनपना, निजी क्षेत्र का बढ़ना, इसकी नींव हमने रखी थी और मैं बिल्कुल कहती हूँ कि We are the architect of modern Indian economy, जहाँ पर सरकारी क्षेत्र और निजी क्षेत्र गाड़ी के दो पहिए बनकर चलने थे, लेकिन सरकारी क्षेत्र को आप ध्वस्त कर देंगे और निजी क्षेत्र के लिए मोनोपॉली क्रिएट करेंगे, 643वें नंबर से जब आप दूसरे नंबर पर एक व्यक्ति को ले आए हैं, इतना ही ध्यान, इतनी ही कृपा, इतनी ही दया, इतनी ही थोड़ी सी नीतियाँ आपने देश के गरीबों के लिए भी बना दी होती, जिनकी थाली का आटा भी आप गीला करने पर आमादा हैं।
कांग्रेस के कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ईडी द्वारा समन किए जाने और 23 अक्टूबर के बाद बुलाए जाने के अनुरोध को स्वीकार न किए जाने को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि अगर ये राजनैतिक प्रतिशोध नहीं है, तो राजनैतिक प्रतिशोध क्या होता है? अगर ये जो कार्यवाही हो रही है, कर्नाटक में जब यात्रा चल रही है और डीके शिवकुमार जी कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं, उस यात्रा में न चल पाएं, उन्होंने आपसे वक्त मांगा, उन्होंने ये नहीं कहा कि मैं नहीं आऊँगा, उन्होंने कहा कि थोड़े दिनों बाद मुझे बुला लीजिए, आपको वो भी बर्दाश्त नहीं है, वो भी कुबूल नहीं है, ये क्या है? क्या ये बैंडेटा पॉलिटिक्स, क्या ये राजनैतिक प्रतिशोध नहीं है? क्या येईडी का दरुपयोग नहीं है? इस सवाल का जवाब तो आपको देना है।
इस सवाल का जवाब आपको देना है कि अभी-अभी मैंने रेलवे में एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार की बात की, जहाँ पर एक कंपनी को दोषी पाया गया है। उन्होंने फाइन पे किया है, 4 हजार यूएस डॉलर्स का, घूस देने के लिए, लेकिन एक शब्द नहीं। आँखों में पट्टी, मुंह में दही जमाई हुई है, मोदी सरकार ने।