नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है ।सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। GDP में हुई भारी गिरावट को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''Q1 GDP – 23.9% है,आज़ादी के बाद यह सबसे बुरा आर्थिकआंकड़ा है. यह सरकार की विफलताओं में चलते हुआ है क्योंकि कोरोना के पहले ही आर्थिक मंदी पैर जमा चुकी थी बेरोजगारी 45 साल में सबसे ऊपर थी, उपभोग और निवेश नगण्य था और उस आग में कोरोना ने घी डालने का काम किया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को कहा कि,'पहली तिमाही में जीडीपी में लगभग 24% का संकुचन हुआ है और 30 जून 2019 से लेकर अब तक करीब एक चौथाई जीडीपी को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है और वित्तीय वर्ष में अभी तक जीडीपी के आउटपुट में लगभग 20% का संकुचन है|हर क्षेत्र में, जैसे कि जीडीपी के तीन बड़े क्षेत्र होते हैं जो करीब-करीब 50% हिस्सा बनाते हैं जीडीपी का, वो हैं - विनिर्माण, निर्माण, व्यापार होटल और परिवहन, जिनमें बड़ी गिरावट आई है|
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''विनिर्माण में लगभग 40% की गिरावट आई है, निर्माण में 50% की और व्यापार, होटल एवं परिवहन में 47% की गिरावट आई है। ये जीडीपी के आधे हिस्से की हम बात कर रहे हैं| कोई एक चीज़ जो आज भी आशा की किरण बनी हुई है, वह है- कृषि में मत्स्य पालन और वन, जहां एक क्षेत्र में ही सकारात्मक वृद्धि हुई है और 3.4% पर उसकी वृद्धि हुई है|
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'कहीं पर जो वित्त मंत्री ने दैविक शक्ति की बात की थी, ऐसा लग रहा है देवता भी इस देश के किसान, खेतिहर के साथ खड़े हैं और मोदी सरकार हर बार किसी मुगालते के पीछे छुपने की साजिश करती नज़र आ रही है|अगर हम थोड़ा और आगे बढ़ कर देखें तो ये जीडीपी का जो अनुमान आया है, ये आगे चलकर और भी खराब हो सकता है। क्योंकि समुचित डेटा आने पर इसमें नीचे की ओर संशोधन हो सकता है|
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'जीडीपी का अंक आंकड़ा ही नहीं होता है, बल्कि वो किसी भी अर्थव्यवस्था में किस तरह की नौकरियाँ, समृद्धि या अवसर बनते हैं, उसका एक संकेत होता है|24% का संकुचन मौटे तौर पर यह दिखाता है कि एक बहुत बड़ा वर्ग गरीबी की ओर जा रहा है, बहुत लोग बेरोजगार हुए हैं और देश की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है|कहीं न कहीं ये असंगठित क्षेत्र पर भी प्रहार तो है ही और संगठित क्षेत्र पर भी इसका बहुत बड़ा प्रभाव है|
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'ये बात ध्यान रखने वाली है कि ये सब कोरोना और लॉकडाउन की वजह से नहीं हुआ है। हाँ, इसने आगे में घी डालने का काम किया है लेकिन ये संकुचन तो बहुत पहले, कोरोना से भी पहले ही शुरू हो गया था, ये गिरावट बहुत पहले से हो गयी थी|जीडीपी कोरोना से पहले तक 7 तिमाही से लगातार गिर रही थी। वित्तीय वर्ष 2017 में जीडीपी की ग्रोथ 8.3 थी, जो तब से गिरते गिरते 4.2 हो गयी। नोटबंदी से लेकर अब तक हमारी आर्थिक वृद्धि आधी हो गयी है|
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'कोरोना से पहले ही बेरोजगारी 45 साल में सबसे ऊपर पहुँच गयी थी, आर्थिक मंदी अपना पैर जमा चुकी थी तो कहीं न कहीं पर ये सरकार की विफलताओं का परिणाम है क्योंकि इतना नुकसान किसी भी अन्य देश में नही हुआ, जितना हमारे यहाँ हुआ|सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मो???़ा और इसीलिए राजकोषीय सहायता नहीं मिली। सारा का सारा बोझ RBI के ऊपर लाद दिया गया। RBI ने ऋण की दर घटाई (1.15%) तरलता बढ़ाई और सरकार को लाभांश दिया|
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'भविष्य की चिंताओं में घिरे लोगों ने बचाए पैसे को खर्च न करके बैंकों में जमा करना ज्यादा उचित समझा। ऋण में वृद्धि की दर लगातार कम होती गई है, जो जुलाई के महीने में मात्र 5.4% थी|आर्थिक मंदी का ही यह आलम है कि 80 लाख लोगों ने लॉकडाउन के दौरान करीब 30,000 करोड़ EPFO से निकाला है, जो कि अमूमन लोग अपने भविष्य के लिए सुरक्षित रखते हैं|
सुप्रिया ने कहा कि,''RBI का कहना है कि आर्थिक मंदी का दौर बड़ा है और लंबा चलेगा। RBI ने साफ कहा है कि उपभोग पर इतना गहरा आघात हुआ है कि बहुत लंबे समय के बाद भी इसको सुधारना कठिन होगा| कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'इसीलिए हमारा सरकार से सवाल है कि आखिर क्या रणनीति बन रही है इस आर्थिक मंदी को खत्म करने की? हम आशा करते हैं कि आज का यह GDP संकुचन सोती हुई मोदी सरकार को जगाएगा और अर्थव्यवस्था को सुधारने के उपाय ढूंढने पर मजबूर करेगा। आखिरकार यह 130 करोड़ भारतीयों, हमारे देश के युवाओं और उनके भविष्य का मामला है|