●अडानी के समधी जतिन मेहता देश के 7000 करोड़ डकार कर भगोड़ा बन गया
●PM मोदी की नाक के नीचे जतिन मेहता ने भाग कर दूसरे देश की नागरिकता ली
● जतिन मेहता के तार मॉन्टेरोसा नाम की कंपनियों एक समूह से जुड़े हैं
● मॉन्टेरोसा समूह मॉरीशस स्थित शेल कंपनियों का मालिक है. यह वही शेल कंपनियाँ हैं जिन्होंने अडानी समूह में बेनामी पैसा लगाया
● जतिन मेहता के ख़िलाफ़ CBI ने FIR की, ED में केस है - जाँच क्यों नहीं हो रही
● पीएम मोदी जतिन मेहता जैसे लुटेरों को अडानी से जुड़े तारों के लिए संरक्षण दे रहे हैं
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि,''अडानी की काली करतूतों के बारे में हम लगातार इस मंच से सच बता रहे हैं और इतने बड़े घोटाले की JPC जाँच की माँग कर रहे हैं - लेकिन मोदी सरकार का सारा तंत्र हर मान मर्यादा को ताक़ पर रख कर अडानी के बचाव में लगा हुआ है - पर सच को छुपाया नहीं जा सकता - वह हर ओर से निकल रहा है|
लेकिन आज हम आपको अडानी के समधी की कहानी बतायेंगे और कैसे इन सब भगोड़ों के तार अडानी से जुड़े हैं - और इसीलिए मोदी जी और उनकी सरकार आँख पर पट्टी बांध कर चोरों का बचाव कर रही है|
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''जतिन मेहता का नाम तो आपने सुना ही होगा - वही जिन्होंने लगभग 7000 करोड़ का ग़बन किया और फिर मोदी जी की नाक के नीचे से देश छोड़ कर भाग गए। वह अडानी परिवार के समधी हैं, उनकी बेटी विनोद अडानी की बहू हैं|
सुप्रिया ने कहा कि,''जतिन मेहता की तीन कंपनियों 'विनसम डायमंड्स एंड ज्वैलरी लिमिटेड', 'फॉरएवर प्रेशियस ज्वैलरी एंड डायमंड्स लिमिटेड' और 'सु- राज डायमंड्स' ने पंजाब नेशनल बैंक सहित भारत के अन्य सरकारी बैंकों को ₹6,712 करोड़ का चूना लगाया और फिर मेहुल भाई और नीरव मोदी जैसे बाक़ी भगोड़ों के जैसे भाग खड़े हुए|
महत्वपूर्ण तथ्य ---
●जतिन मेहता और उनकी पत्नी ने 2 जून, 2016 को भारतीय नागरिकता छोड़ दी और कैरेबियन में अंतर्राष्ट्रीय टैक्स हेवेन, सेंट किट्स और नेविस के नागरिकों के रूप में बस गए, जिनके साथ सरकार की कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। फिलहाल यूके में अंतराष्ट्रीय बैंकों द्वारा जतिन मेहता पर केस चलाया जा रहा है, जिसका भारतीय जाँच एजेंसी और क़ानून प्रणाली से कोई लेना-देना नहीं है।
● तो मोदी सरकार ने इनके ख़िलाफ़ क्या किया? जवाब है - कुछ नहीं. और यहीं से शुरू होती है अडानी के काले कारनामों में लिप्त होने की जतिन मेहता की कहानी|
● इन्होंने मेहुल भाई और नीरव मोदी की तरह ही भारतीय बैंकों के लेटर ऑफ़ क्रेडिट पर सोने का आयात किया और फिर दुबई में 13 कंपनियों को आभूषण निर्यात किए जिन्होंने भुगतान करने से इनकार कर दिया और यह पैसा डूब गया. फिर पता चलता है कि यह 13 कंपनियां जॉर्डन के नागरिक हेथम सलमान अली अबु ओबैदाह के नाम पर हैं, पर असली मालिक जतिन मेहता और उसका परिवार ही था ।
● अब होता है बड़ा खुलासा- जतिन मेहता और मॉन्टेरोसा नाम की कंपनियों एक समूह के बीच में भी लिंक है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार मॉन्टेरोसा समूह मॉरीशस स्थित शेल कंपनियों का मालिक है. यह वही शेल कंपनियाँ हैं जिन्होंने अडानी समूह में भारी निवेश किया है। ये निवेश हाल के महीनों में गहन जांच के दायरे में आए हैं, क्योंकि वही सवाल जिसका जवाब नहीं मिल रहा अभी भी वही है - यह 20,000 करोड़ किसके हैं?
हमारे ज्वलंत सवाल -
➤1. जतिन मेहता को कौन बचा रहा है? क्या राज़ है कि प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के परम मित्र - अडानी के समधी जतिन मेहता का कोई बाल भी बाँका नहीं कर पाया ?
➤2. क्या कारण है कि जब जतिन मेहता और उनकी कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी को रोकने और कार्रवाई करने की बात आती है तो पूरी मोदी सरकार, सभी अधिकारियों सहित, सोई हुई पाई जाती है?
➤ 3. सीबीआई ने 5 अप्रैल, 2017 को यानी साढ़े 3 साल की देरी के बाद FIR क्यों दर्ज की, जबकि बैंकों ने फरवरी, 2014 की शुरुआत में ही सीबीआई के पास शिकायत दर्ज करा |
जतिन मेहता और उनकी पत्नी ने सेंट किट्स की नागरिकता ली थी
जतिन मेहता की नागरिकता और जतिन मेहता अडानी से कैसे संबंधित हैं को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि, ''02 जून 2016 को जतिन मेहता और उनकी पत्नी ने सेंट किट्स की नागरिकता ली थी, भारत की नागरिकता को छोड़कर, पैसे गबन करके, पैसे डकारकर वो इस देश को छोड़कर भाग गए थे और वो देश को छोड़कर मोदी जी की रिजीम में भागे थे। मोदी जी की नाक के नीचे नीरव मोदी भागे, मोदी जी की नाक के नीचे विजय माल्या भागे, मोदी जी की नाक के नीचे मेहुल भाई भागे और मोदी जी की ही नाक के नीचे, पता नहीं उनके संरक्षण के चलते या ये मैं नहीं जानती, लेकिन उन्हीं की नाक के नीचे जतिन मेहता भी भागे ।''
.....इंटरपोल अपनी नोटिस विड्रा कर लेता है
श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि,''ये सब लोग भाग जाते हैं, इनको वापस लाने में कोई कवायद नहीं की जाती है, एक आदमी के खिलाफ इंटरपोल अपनी नोटिस विड्रा कर लेता है, अब कोर्ट कह देता है कि वो भारत जा ही नहीं सकते मेहुल भाई, मोदी जी उनको मेहुल भाई कहते हैं, उन्हीं के आदर में हम लोग भी उनको मेहुल भाई ही कहते हैं।''
उन्होंने कहा,''तो सवाल ये है कि आपकी नाक के नीचे ये सब हो रहा है, लगातार नीरव मोदी पर बैंक लिख रहे थे कि ये ऐसा करने वाले हैं, सरकार ने क्या किया ? विजय माल्या ने इस देश को छोड़कर भागने से पहले एक चिट्ठी लिखी थी तत्कालीन वित्तमंत्री को, उस चिट्ठी का खुलासा क्यों नहीं हो रहा है? उसके बारे में चर्चा क्यों नहीं हो रही है? तो आपकी नाक की नीचे से ये लोग भागे, फिर इन्होंने नागरिकता ले ली और ऐसी जगह नागरिकता ली जहां से आप एक्सट्राडिशन नहीं कर सकते हैं।'''
किसने दी एनओसी?
उसके लिए एनओसी तो भारत सरकार ही देती है, किसने दी एनओसी वो? किसने बोला हमें कोई ऑब्जेक्शन नहीं है? ये देश के हजारों करोड़ की संपत्ति, हजारों करोड़ का पैसा बैंको को चूना लगाकर भाग जाए हमें कोई दिक्कत नहीं है, ये कहीं के भी नागरिक बन जाएं 'सानू की ?', हमें क्या करना है? तो ये तो मोदी जी ने किया है और अगर मोदी जी ने नहीं किया है तो इसका एक्सप्लेनेशन दे दें।
कहां गई सीबीआई की एफआईआर?
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''2016 से 2023 आ गया है, 7 साल हो गए हैं कहां है ये भगौड़ा ? क्या कार्रवाई हो रही है इस पर ? जो यूके में कार्रवाई चल रही है वो इंटरनेशनल बैंक्स कर रहे हैं, उससे हमारे एक भी बैंक का लेना- देना नहीं है, एक संस्था का लेना-देना नहीं है, एक ऐजेंसी का लेना-देना नहीं है। अरे भाई तो सीबीआई ने एफआईआर रजिस्टर की थी, कहां गई वो सीबीआई की एफआईआर ? क्या हो रहा है इस पर? ये सवाल पूछा जाएगा, ये आपकी नागरिकता का सवाल हो गया।'''
जतिन मेहता ने पैसा हज़म कर लिया, बैंकों के मुंह पर चूना लगाकर देश छोड़कर भाग गए
कांग्रेस नेता ने कहा कि,''मोंटेरोज़ा के साथ और क्योंकि मैंने आपको उन 13 कंपनीज़ के बारे में बताया था, उसके बारे में भी थोड़ी क्लेरिटी दे देती हूं। सोना आयात करते थे, लैटर ऑफ क्रेडिट सरकारी बैंक इशू करते हैं। वैसे ही मेहुल भाई भी लाते थे, वैसे ही नीरव मोदी भी लाते थे, उस सोने की ज्वेलरी बनाते थे, वो ज्वेलरी दुबई की कंपनियों को बेची जाती थी, कंपनियां पैसा देती थी, उससे धंधा चलता था। भाई साहब ने क्या किया? समधी जी ने, जतिन मेहता ने उन्होंने 13 कंपनियों को बेचा सोना, ज्वेलरी बनाकर, जेवर बनाए, खूबसूरत ही बनाए होंगे। जेवर बनाकर बेचा उन्होंने, लेकिन मजे की बात ये है कि 13 कंपनियां उन्हीं की थी और फिर कह दिया 13 कंपनियों ने पेमेन्ट ही नहीं किया, पेमेन्ट नहीं आप ही डकार गए वो पैसा ।आपने पैसा हज़म कर लिया, आपने चूना लगाया देश को और बैंकों के मुंह पर चूना लगाकर आप देश छोड़कर भाग गए, अगर इससे बड़ा सबूत आपको चाहिए और इसमें सारे मालिकाना हक हैं|''
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'हम आपको जो रिलीज़ देंगे, मैं कंफ्यूज़ नहीं करना चाहती हूं इस मंच से, सिम्पल रखना चाहती हूं। इसमें सारे हैं कैसे एक व्यक्ति का 90 परसेंट स्टेक था, कैसे एक व्यक्ति का 100 परसेंट था, कौन- कौन उसमें निदेशक था, सारे काले कारनामे हैं उसमें ।
ईडी उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती जिन्होंने इस देश के पैसे का गबन किया
कांग्रेस नेता ने कहा कि,''तो ये तो उनके काले कारनामों की बात हो गई, फिर उन्होंने मोंटेरोसा के चेयरमेन और सीईओ के साथ कई कंपनियों में डायरेक्टर बनकर वो रहे और डायरेक्टर बनकर ही नहीं रहे, उनके कुछ बिजनेस ताल्लुकात भी रहे, मोंटेरोसा का अडानी समूह में पैसा लगा हुआ है शैल कंपनीज़ के माध्यम से तो भईया ये जो जाल है इसका खुलासा कौन करेगा? हमने आक्षेप लगाया, हमने प्रूफ रख दिया, अब जांच तो सरकार करेगी न या जांच भी... अगर हम जांच करेंगे तो हमें सरकार में जिस दिन बैठेंगे उस दिन दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे, लेकिन जिस तरह से मोदी जी और उनका पूरा तंत्र इस पर आंख पर पट्टी बांधे हुए हैं ये साफ है कि ऐसे भगौड़ों का संरक्षण ही इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इनके तार अडानी से जुड़े हुए हैं, अगर ये भाईसाहब समधी न होते तो अभी तक हवालात में होते, समधी हैं तो पूरी खातिरदारी की जा रही है।''
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''ईडी तो दौड़-दौड़कर विपक्षियों के यहां पहुंच जाती है, 1 मिनट की देरी नहीं करती है, चार गुना केसेस ईडी के हो गए हैं, 2014 से 95 प्रतिशत विपक्ष के खिलाफ हैं। अरे जिन लोगों ने इस देश के पैसे का गबन किया है, उनके खिलाफ ईडी क्यों नहीं एक्ट करती है? तो सवाल आपका बिल्कुल सही है और सवाल का जवाब ये है...|''
मोदी के साथ अडानी, शुभेन्दु अधिकारी, हिमंता बिस्वा शर्मा ,नारायण राणे, 40 परसेंट सरकार वाले सीएम बोम्मई...
भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मोदी जी भ्रष्टाचार को मुद्दा कैसे बनाते हैं - कहते हैं सब भ्रष्टाचारी एक मंच पर, कौन-कौन उस मंच पर खड़ा है - नरेन्द्र मोदी के साथ उस मंच पर सबसे पहले गौतम अडानी खड़े हैं, उनके बांए पर शुभेन्दु अधिकारी हैं और थोड़ी दूर पर हिमंता बिस्वा शर्मा हैं, उसी मंच पर नारायण राणे हैं, उसी मंच पर 40 परसेंट सरकार वाले सीएम बोम्मई है, उसी मंच पर येदियुरप्पा हैं, ये वो मंच है, पहले उस मंच से एक-एक करके लोगों को जेल भेजना शुरू करें, उसके बाद बात करेंगे भ्रष्टाचार की ।
40 परसेंट आपकी जो कर्नाटक में सरकार है, जहां से आपका जल्द ही फेयरवेल होने वाला है, जल्द ही रुखसत होगी, वहां पर आपका डूबता जहाज जो है वो सबको दिख रहा है। 40 परसेंट ... दुनिया की सबसे भ्रष्ट सरकार आप चला रहे हैं और आप भ्रष्टाचार के बारे में बोलेंगे और भाईसाहब ये न थोड़ी पुरानी स्क्रिप्ट हो गई मोदी जी ने फलां से फोन पर बात की, मोदी जी ने फलां से मुलाकात की। आप मुलाकातें करिए, आप जबरदस्ती गले पड़िए, आप गलबैयां करिए, आप वो सब करते रहिए, वो सब कैमरे के लिए आप करते हो, वो सारा देश जानता है, कैमरा आपको अच्छा लगता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि,''अरे प्रभू (मोदी) 9 साल से सत्ता में हैं, अब ये सब छोड़ दीजिए कि फोन पर बात कर ली, फलाने से मुलाकात कर ली, आंख दिखाएंगे, सीना चौड़ा करेंगे... अब 9 साल हो गए हैं, अब कार्रवाई करिए, अब रुखसति का वक्त आ गया है, दिल्ली से जल्दी विदाई होने वाली है, अब 9 साल हो गए हैं, अब ये फोन पर बात कर ली, फलाना कर लिया अब ये नहीं चलेगा, अब परिणाम दिखाने का वक्त है, रिपोर्ट कार्ड दिखाईए, करप्शन पर आपने क्या किया? उस पर आपका रिकॉर्ड निल बट्टा सन्नाटा है।
जेपीसी बैठाइए दूध का दूध और पानी का पानी कीजिए
एक अन्य प्रश्न पर कि बीते कुछ दिनों में श्री राहुल गांधी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि 20,000 करोड़ किसके हैं तो आज के प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आप ये कह रही हैं कि वो 20,000 करोड़ जतिन मेहता के हैं, जो अडानी की कंपनियों में लगे हुए हैं? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि नहीं मैं ये बिल्कुल नहीं कह रही हूं और इसको बिल्कुल भी मिसलीड मत करने दीजिएगा आप ।
मैं ये बिल्कुल नहीं कह रही हूं 20,000 करोड़ उसके हैं, लेकिन मैं ये जरूर कह रही हैं कि 20,000 करोड़ बेनामी पैसा अडानी समूह में लगा है, उस अडानी समूह में लगा है जिस अडानी का एकाधिकार है पोर्ट में, एअरपोर्ट में, रिन्यूबल एनर्जी में, सीमेन्ट में, फूड एण्ड एग्रीकल्चर में, इतने सारे सेक्टर्स में ये पैर पसारे हुए अडानी समूह है और एकाधिकार दिया हुआ है मोदी जी ने, नियम बदल-बदल कर दिया हुआ है, ऐसे ग्रुप में 20,000 करोड़ बेनामी किसी के लगे हैं, वो पैसा किसका है?
ये हम लगातार सवाल उठा रहे हैं, हम ये सवाल उठा रहे हैं कि समधी साहब 7,000 करोड़ की चपत लगाकर भाग गए, समधी साहब के भी उस शेल कंपनी के मालिकाना जिसका हक है, उससे संबंध हैं। तो सवाल ये है कि ये पैसा किसका है? इस जाल का चक्रव्यूह जो ये जलेबी है, इसको सिंपल तरीके से जांच कब होगी? जेपीसी बैठाइए दूध का दूध और पानी का पानी कीजिए ।
भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश बनने के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'' अब इसमें तो मोदी जी का कॉन्ट्रिब्यूशन होना थोड़ा मुश्किल ही होगा, मुझे लगता है। अब इसमें भी थैंक्यू मोदी जी कहने लगे, तो पता नहीं प्रहलाद जोशी जी जैसे या रवि किशन जी जैसे लोग हो सकता है इसमें भी थैंक्यू मोदी जी के नारे लगाने लगें। अब मुझे लगता है जनसंख्या बढ़ गई, उसमें मोदी जी का तो कॉन्ट्रिब्यूशन मुश्किल है। इसमें थैंक्यू मोदी जी नहीं कहा जा सकता। लेकिन मेरा इस जनसंख्या के बढ़ने से आगे एक तथ्य है और इसमें एक सवाल है जनसंख्या बढ़ रही है, हम विश्व के सबसे युवा राष्ट्र भी बन रहे हैं।
हमारे युवाओं के लिए रोजगार कहाँ हैं? हम दुनिया के सबसे युवा राष्ट्र बन रहे हैं, जिसको डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता था, वो आज डेमोग्राफिक डिजास्टर बन सकता है, क्योंकि हमारे युवाओं के पास रोजगार नहीं है, उनके रोजगार की कोई चर्चा नहीं है, उनके रोजगार की कोई बात नहीं है। वो रोजगार मांगते हैं, तो उन पर लाठियां चलाई जाती हैं। वो एग्जाम लिखने जाते हैं रोजगार के लिए, तो वो पेपर लीक भाजपाई करा देते हैं। वो एग्जाम लिखने जाते हैं वहाँ पर पता चलता है परीक्षा निरस्त हो गई है, अब सालों साल कोर्ट में बीत रहा है। हमारे बच्चे जब रोजगार मांगते हैं, तो उनको हिदायत दी जाती है कि पकौड़ा तल लो। अरे, पकौड़ा तलने वाला तेल भी आपने 90 से 200 कर लिया और जिस गैस पर तला जाएगा, वो 400 से 1,200 हो गई। तो सवाल ये है कि जनसंख्या का बढ़ना या घटना दूसरी बात है।
सवाल दूसरा है---- सवाल ये है कि जो जनसंख्या बढ़ रही है और जो ज्यादा युवा आज आ रहे हैं, उनके लिए इस सरकार के पास क्या प्लान है? क्या कोई भी इस सरकार में ये सोच भी रहा है कि इस बढ़ती हुई जनसंख्या का या इस युवा राष्ट्र का या 60 प्रतिशत जो युवा है इस देश में उनके जीवन यापन का क्या होगा और मैं तीखी बात कह रही हूं, जो मैं कहना नहीं चाहती थी - जो अपराध के मामले जिस गति से बढ़ रहे हैं और जैसे लोग अपराध करते हुए पाए जा रहे हैं - युवा, छोटे-छोटे बच्चे। लड़की ने बात नहीं मानी, गोली मार दो, लड़की ने बात नहीं मानी, तो चाकू घोंप दो । पिस्तौल चला रहे हैं ये लड़के। आपको नहीं लगता कि ये डेमोग्राफिक डिजास्टर है, क्योंकि इन युवाओं के पास रोजगार नहीं है। जिस व्यक्ति के पास भी रोजगार होता है, काम करने का कोई जरिया होता है, वो उस पर ध्यान देता है। खाली दिमाग शैतान का घर होता है। इसके बारे में चर्चा जरूर होनी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा नरेन्द्र मोदी को ओबीसी का चेहरा बताकर अन्य सभी प्रश्नों को गौण जाने को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा तो ओबीसी का चेहरा क्योंकि मोदी जी हैं, तो बाकी ओबीसी को उनका हक नहीं मिलना चाहिए। ऐसी बेकार की, ऊल-जलूल की बात भारतीय जनता पार्टी ही कह सकती है। मैं इस मंच से जो मेरे नेता ने कहा है, मैं उसको दोबारा से दोहराना चाहती हूं - चोरों को छुपाने के लिए, चोरों के बचाव के लिए आप पिछड़े वर्ग के पीछे छुपे, आपने ओबीसी कार्ड खेला।
ये अलग बात है कि ओबीसी महासभा ने आपके अध्यक्ष को एक लीगल नोटिस भेजा है कि आपकी हिम्मत कैसे हुई चोरों के साथ हमारा नाम लेने के लिए। चोरों के बचाव में आप ओबीसी कार्ड खेलते हैं और जब ओबीसी का वाकई में कुछ भला करना है, तो आप ऊल-जलूल के बयान देते हैं। 2011 की एक जनगणना, उसको सार्वजनिक करिए, जो हक है उसको दीजिए। उस आबादी को उसका हक क्यों नहीं मिल रहा है?
ये सवाल क्या अपने आपमें सवाल नहीं है? सरकार क्यों बच रही है जातिगत जनगणना से और ये हम नहीं, ये तमाम विपक्षी पार्टियां इसके बारे में बात कर रही है? आप ओबीसी का कार्ड ओबीसी को मिसयूज, ओबीसी को मिस रिपोर्ट करिएगा चोरों के बचाव में, मुंह की खानी पड़ी लीगल नोटिस के बाद। अब कोई बोलते हुए सुनाई नहीं देता है। लेकिन जब ओबीसी के भले की बात होगी, उनके हक की बात होगी, उनके हित की बात होगी, तो आप बगलें झांकने लगते हैं। ये तो गलत बात है।
बिलकिस बानो में अपराधियों को रिहा किए जाने के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजरात सरकार पर की गई विपरीत टिप्पणी को लेकर एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पहले मैं आपके बिलकिस बानो के सवाल पर जरुर जवाब देना चाहती हूं। सिर्फ कोर्ट ही नहीं, ये देश भी पूछता है कि आज वो बिलकिस है, कल वो कोई भी और हो सकता है। वो हम में से यहाँ पर बैठी हुई कोई भी महिला हो सकती है, वो सड़क पर आपकी बहन हो सकती है, वो कोई भी महिला इस देश की हो सकती है, जिसके खिलाफ इतना जघन्य अपराध हुआ हो।
अपराध छोटा-मोटा नहीं था, अपराध सिर्फ गैंगरेप नहीं था। एक औरत को जिसने दो दिन पहले बच्चा जना था, उसके साथ रेप हुआ, उसके बच्चे की हत्या हुई, उसकी तीन साल की बच्ची का सिर फोड़ दिया गया दीवार पर । परिवार के 11 सदस्यों की हत्या हुई, कोई सोच सकता है उसने क्या झेला है इन सालों में और उसके बाद सरकार कहती है, गुजरात की सरकार और केंद्र की सरकार कि ये प्रिवलेज है। क्या प्रिवलेज है इसमें? ये नेशनल सिक्योरिटी का मामला है, ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है? ये एक महिला की अस्मिता, एक महिला के हक, उस जघन्य अपराध के खिलाफ इस देश की आत्मा का मामला है।
आपको सच बताना पड़ेगा किस आधार पर आपने इतने जघन्य अपराधियों को रिलीज किया और किस आधार पर आपके लोगों ने उन्हें संस्कारी कहा? सुप्रीम कोर्ट ने जो सवाल पूछा है, वो बिल्कुल सही सवाल है और आज इस देश की हर औरत पूछती है, ऐसे लोगों को बचाते हैं मोदी जी और उनके लोग और कहाँ है स्मृति ईरानी जी, कहाँ हैं बाकी नेत्रियां, मुंह पर बिल्कुल चुप टेप लगाकर बैठ जाती हैं। आज जो सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा है, वो इस देश की आत्मा को झकझोरता है सवाल कि कल बिलकिस है, आज कोई और हो सकता है और क्या छुपाने की कोशिश कर रही है ये सरकार?|