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23 अगस्त 2026

बजट में गरीब की मदद करने, रोजगार सृजन और महंगाई पर नियंत्रण के लिए एक शब्द नहीं: कांग्रेस ने बजट को बताया पूंजीवादी, कहा- मोदी सरकार केवल कुछ पूंजीपतियों की चाकरी कर देश के लोगों के साथ क्रूरता कर रही

नई दिल्‍ली: पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तंज कसा| उन्होंने कहा कि आज का बजट भाषण किसी वित्त मंत्री द्वारा पढ़ा गया अब तक का सबसे पूंजीवाद…

बजट में गरीब की मदद करने, रोजगार सृजन और महंगाई पर नियंत्रण के लिए एक शब्द नहीं: कांग्रेस ने बजट को बताया पूंजीवादी, कहा- मोदी सरकार केवल कुछ पूंजीपतियों की चाकरी कर देश के लोगों के साथ क्रूरता कर रही
बजट में गरीब की मदद करने, रोजगार सृजन और महंगाई पर नियंत्रण के लिए एक शब्द नहीं: कांग्रेस ने बजट को बताया पूंजीवादी, कहा- मोदी सरकार केवल कुछ पूंजीपतियों की चाकरी कर देश के लोगों के साथ क्रूरता कर रही | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्‍ली: पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तंज कसा| उन्होंने कहा कि आज का बजट भाषण किसी वित्त मंत्री द्वारा पढ़ा गया अब तक का सबसे पूंजीवादी भाषण था| ‘गरीब’ शब्द पैरा 6 में केवल दो बार आता है और हम वित्त मंत्री को यह याद रखने के लिए धन्यवाद देते हैं कि इस देश में गरीब लोग हैं| चिदंबरम ने कहा कि लोग इस पूंजीवादी बजट को खारिज कर देंगे| कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि मैं चकित और स्तब्ध था कि वित्त मंत्री अगले 25 वर्षों के लिए एक योजना की रूपरेखा तैयार कर रहीं थीं|



पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार को लगता है कि वर्तमान में किसी ओर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है और जनता को ‘अमृत काल’ के उदय होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कराया जा सकता है| यह बजट भारत के लोगों का मजाक उड़ा रहा है| पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट जाहिर तौर पर देश के बहुत अमीर लोगों के इशारे वाला है| आरबीआई (RBI) के बजाय वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि क्रिप्टोकरेंसी आज से कानूनी है|



चिदंबरम ने दावा किया कि यह बजट अर्थव्यवस्था के समक्ष खड़ी सभी बड़ी चुनौतियों से निपटने में विफल है| उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट भाषण में गरीबों और दो साल में पीड़ा झेलने वालों की नकदी के जरिए मदद करने के लिए कुछ नहीं कहा गया| नौकरियों के सृजन के बारे में कुछ नहीं कहा गया, छोटे एवं मझोले उद्योगों में नई जान डालने के बारे में एक शब्द नहीं बोला गया, कुपोषण एवं भूखमरी की स्थिति से निपटने के संदर्भ में कुछ नहीं कहा गया और अप्रत्यक्ष करों विशेषकर जीएसटी में कटौती को लेकर कुछ नहीं कहा गया|



कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा,''वित्त मंत्री ने महंगाई पर काबू करने और मध्य वर्ग को कर में राहत देने के बारे में भी कुछ नहीं कहा| उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास विशाल बहुमत है और इसलिए वह इस बजट को संसद में पारित करा लेगी, लेकिन जनता इस पूंजीवादी बजट को नकार देगी|



भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सुरजेवाला ने कहा- आदरणीय चिंदबरम साहब ने एक विशेष बात कही – ये बजट पूंजीवादी है| ये पूंजीवादी बजट है और चिदंबरम साहब ने विशेष तौर से ये बताया कि 7 या 8 महत्वपूर्ण पहलू वो वित्त मंत्री, मोदी सरकार दोनों के सामने थे, पर उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। भारत की अर्थव्यवस्था 2019-20 के स्तर पर आज भी सरकार के मुताबिक है, तो दो साल खत्म हो गए तरक्की के।



रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सुरजेवाला ने कहा,''उन्होंने ये भी बताया कि करोड़ों नौकरियां चली गई, 60 लाख छोटे उद्योग खत्म हो गए, 84 प्रतिशत घरों की आय टूट गई। प्रति व्यक्ति आय एक लाख आठ हजार से कम होकर एक लाख सात हजार हो गई। प्रति व्यक्ति खर्च 62 हजार से कम होकर 59 हजार रह गया। साढ़े चार, चार करोड़ साठ लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे धकेल दिए गए। पढ़ने वाले बच्चों का, खासतौर से गरीब और ग्रामीण अंचल में उनका भविष्य अंधकार में चला गया। जिस प्रकार से कुपोषण के संदर्भ में देश 116 मुल्कों की सूची में 101 नंबर पर पहुंच गया। बेरोजगारी शहरों में 8 प्रतिशत पार कर गई और गांव में 6 प्रतिशत और जो मुद्रास्फीति है, महंगाई जो है, वो 12 प्रतिशत को पार कर गई और कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन भी छह प्रतिशत को पार कर गई। इसलिए इस बजट का सार अगर देखें, तो इस बजट का सार है – कुछ नहीं, nothing.


उन्होंने कहा कि,''ये इस बजट का सार है और विशेष तौर से ये बजट और वित्त मंत्री जी ने जिस प्रकार से ये पेश किया, ये वित्त मंत्री और सरकार के जिद्दीपन, उनकी कठोरता और उनकी निर्दयता का सूचक है, उसे दर्शाता है। देश के गरीब के प्रति, देश के नौकरी पेशा व्यक्ति के प्रति, देश के मध्यम वर्ग के प्रति, देश के किसान के प्रति, देश के अनुसूचित जाति और जनजातियों के लोगों के प्रति और ग्रामीण अंचल में रहने वाले, शहरों में रहने वाले साधारण मजदूर के प्रति ये एक क्रूर मजाक, ये इस देश के लोगों के साथ है।



कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,'''गरीब की मदद के लिए एक शब्द बजट में नहीं है, रोजगार सृजन के लिए बजट में एक शब्द नहीं है। महंगाई पर नियंत्रण के लिए बजट में एक शब्द नहीं है। गरीब तक पैसा पहुंचाने के लिए बजट में एक शब्द नहीं है। बजट में किसी वर्ग को टैक्स रिलीफ देने के लिए एक शब्द नहीं है। लोक कल्याण को जैसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया हो। खासतौर से चिदंबरम साहब ने आपका ध्यान आकर्षित किया कि हर प्रकार की राहत और मदद यानि सब्सिडी में कटौती की गई पेट्रोलियम प्रोडक्ट में, जो आज सबसे ज्यादा महंगाई का कारण है, पिछले साल के बनिस्बत 704 करोड़ रुपए कटौती हुई। 


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किसान की खाद की सब्सिडी में 35,000 करोड़ की कटौती हुई। गरीब को मिलने वाले राशन की दुकान पर भोजन में 80,000 करोड़ की कटौती हुई। किसान की क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम में 500 करोड़ की कटौती हुई। यहाँ तक कि मजदूर की मनरेगा स्कीम के अंदर भी 25,000 करोड़ रुपए काट लिया गया। 27 प्रतिशत इस देश में गरीब, साधारण और मध्यम वर्ग को मिलने वाली राहत में कटौती की गई, जो अपने आपमें एक निर्दयतापूर्ण निर्णय है। शायद पूंजीवादी और पूंजीपति जो इस सरकार के मित्र हैं, वो तो माफ कर दें, पर इस देश का गरीब और मध्यम वर्ग भारतीय जनता पार्टी की इस मोदी सरकार को कभी माफ नहीं करेगा। बजाए इसके कि गरीबों को राहत दी जाए, बजाए इसके कि बहुत अमीर 142 लोग जो हैं, जिनकी पूंजी 23 लाख 14 हजार करोड़ से बढ़कर 53 लाख 16 हजार करोड़ हो गई, उनसे अपनी पूंजी साझा करने के लिए कहा जाए, ये सरकार ने एक पूंजीवादी बजट दिया।

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'एक प्रश्न पर कि चुनाव के बावजूद, जनता को कोई राहत नहीं दी गई, आपको क्या लगता है कि बीजेपी में इतना आत्मविश्वास कहाँ से आ रहा है, श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि आदरणीय साथी, जैसा चिदंबरम साहब ने कहा, ये सरकार केवल कुछ पूंजीपतियों की चाकरी कर देश के मध्यम वर्ग, नौकरी पेशा, गरीब, किसान, मजदूर उनकी घोर अनदेखी और उनसे क्रूरता कर रही है, क्योंकि उन्हें लगता है कि समाज में नफरत और बंटवारा ही उनकी चुनावी कामयाबी का एकमात्र सूत्र है। जनता की सेवा नहीं, जनता को राहत नहीं, किसान, गरीब, मजदूर, युवा, बच्चे, महिलाएं, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों की मदद नहीं, केवल और केवल धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण ही उनका एकमात्र रास्ता है। हमें ये विश्वास है कि इस देश के हर जाति, हर धर्म, हर क्षेत्र के लोग आगे बढ़कर मणिपुर से, गोवा से, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, वो मौजूदा सरकारों से सवाल पूछेगे कि उनकी आय, उनकी जिंदगियां, उनके रोजगार, उनका कल्याण, इस सरकार ने क्रूरता से क्यों छीन लिया और केवल बंटवारा और नफरत ही क्यों सत्ता में बैठे हुक्मरानों का एकमात्र रास्ता बन गया?



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इसी संदर्भ में श्री सुरजेवाला ने जवाब देते हुए कहा कि आदरणीय साथी मैं चिदंबरम साहब की अनुमति से उनका जवाब पढ़कर बताऊंगा और उस पर अपनी टिप्पणी जरुर दूंगा। निर्मला सीतारमण जी और भाजपा ने उत्तर प्रदेश के लोगों के सम्मान पर ठेस पहुंचाई। उत्तर प्रदेश के लोगों का मजाक उड़ाया, उत्तर प्रदेश के लोगों का अपमान किया ये कहकर - On Rahul Gandhi's 'Zero-Sum Budget' comment, FM Nirmala Sitharaman says, it's a typical UP type comment. माफ कीजिए आप भी उत्तर प्रदेश से और बिहार की ये जो हमारी भूमि है, उससे आते हैं, तो क्या निर्मला सीतारमण जी और भाजपा मानती है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग जो हैं, वो सोच नहीं सकते, समझ नहीं सकते, उनके अंदर बुद्धि नहीं? ये घोर अपमान है इस देश के सबसे बड़े प्रांत के लोगों का। ये केवल एक नेता पर टिप्पणी नहीं, उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों को अपमानित किया है, निर्मला सीतारमण जी ने। मोदी जी और निर्मला जी को फौरन माफी मांगनी चाहिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, केन्द्रीय हिंदुस्तान के इन प्रांतों के लोगों से।



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