नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस पर किसान संगठनों की ओर से आयोजित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा मामले में कांग्रेस पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है| कांग्रेस ने 26 जनवरी के दिन दिल्ली में हुई हिंसा के लिए गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''किसान आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा के लिए सीधे-सीधे गृह मंत्री अमित शाह ज़िम्मेदारी हैं। उन्हें एक पल भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं, उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ये मांग है|
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''सालभर के भीतर राष्ट्रीय राजधानी में दूसरी बार हुई हिंसा को रोक पाने में बुरी तरह विफल रहने वाले श्री अमित शाह को बगैर देरी के गद्दी छोड़नी चाहिए! यदि मोदी जी अब भी उन्हें बर्खास्त नहीं करते तो साबित हो जाएगा कि श्री अमित शाह से इस पूरे हिंसा में देश के PM की प्रत्यक्ष मिलीभगत है| एक व्यक्ति की कुछ 'खास' तस्वीरों ने किसान आंदोलन को बदनाम करने वाले साजिशकर्ताओं को बेनक़ाब कर दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''आज़ादी के 73 सालों में यह पहला मौका है जब कोई सरकार लाल किले जैसी राष्ट्रीय धरोहर की रक्षा करने में भी पूरी तरह नाकाम रही है। BJP करीबी व मोदी-शाह के चेले दीप सिद्धू की पूरे समय लाल किले में मौजूदगी, इस उपद्रव में मौजूदगी, किसान आंदोलन को बदनाम करने की एक सुनियोजित साजिश है!
देश की राजधानी दिल्ली में किसान आंदोलन की आड़ में हुई सुनियोजित हिंसा अराजकता के लिए सीधे-सीधे गृहमंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं |इस संबंध में तमाम खुफिया इनपुट के बावजूद हिंसा के तांडव को न रोक पाने में नाकामी के चलते उन्हें एक पल भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। श्री अमित शाह को बगैर देरी के बर्खास्त किया जाना चाहिए|
यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अब भी उन्हें बर्खास्त नहीं करते तो साबित हो जाएगा कि श्री अमित शाह से इस पूरी हिंसा में देश के प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष मिलीभगत है|आज़ादी के 73 साल??ं में यह पहला मौका है, जब कोई सरकार लाल किले जैसी राष्ट्रीय धरोहर की सुरक्षा करने में नाकाम रही। किसानों के नाम पर साज़िश के तहत उपद्रवियों को लाल किले में घुसने दिया गया और दिल्ली पुलिस कुर्सियों पर बैठी आराम फरमाती रही |भाजपा के करीबी और मोदी-शाह के चेले, दीप सिद्धू की पूरे समय लाल किले में मौजूदगी किसान आंदोलन को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है|
गृहमंत्री के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू व उनके गैंग की बजाय संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करके उपद्रवियों के साथ भाजपा सरकार की मिलीभगत को खुद ही बेनकाब कर दिया है| बीते 63 दिनों से लाखों अन्नदाता दिल्ली के दरवाजे पर तीनों काले कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्वक अपना आंदोलन कर रहे हैं। मोदी सरकार जब उन्हें ‘बलपूर्वक’ नहीं हटा पाई, तो छलपूर्वक हटाने का षडयंत्र करने लगी|
पहले ‘प्रताड़ित करो और परास्त करो’ की नीति, फिर मीटिंग पर मीटिंग कर ‘थका दो और भगा दो’ की नीति, फिर किसानों में ‘फूट डालो और आंदोलन तोड़ो’ की नीति और अब अंतिम छल है, अराजकता का आरोप लगा ‘बदनाम करो और बाहर करो’ की नीति|
सवाल यह है कि जो किसान 63 दिन से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, अचानक से ऐसा क्या हुआ, जो वो इतना बिफर गए?... अगर सरकार 10 दौर की बातचीत करने का ड्रामा करे, किसानों की समस्या के समाधान की बजाय व्यवधान का षडयंत्र करे और किसान आंदोलन को बदनाम करने पर जोर रखे, तो सरकार की साज़िश साफ है|
- हमारा सीधा सवाल है कि केवल 30 से 40 ट्रैक्टर लेकर उपद्रवी लाल किले में कैसे घुस पाए?
- यह किसकी असफलता है? इसका जिम्मेदार कौन है?
- लाल किला तो हमारी आजादी का प्रतीक है। किसानों और गरीबों के लिए सर्वमान्य है, तो 500-700 हिंसक तत्व जबरदस्ती लाल किले में कैसे घुस सकते हैं?
जो दीप सिद्धू प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ फोटो खिंचवा बैठक साझा करता है, उसे और उसके समर्थकों को लाल किले तक जाने की अनुमति किसने दी? मोदी सरकार को यह बताना पड़ेगा कि :
- इतनी आसानी से कोई भी हिंसक समूह लाल किले तक कैसे पहुंच सकता है?
- लाल किले की प्राचीर पर चढ़कर झंडा कैसे लगा सकता है?
- क्या यह साफ नहीं दिखा कि पुलिस बैठकर तमाशा देख रही थी और टीवी कैमरों का मुंह लाल किले की प्राचीर की तरफ था?
- किसानों के मुताबिक कल तक 178 से अधिक किसान इस आंदोलन में दम तोड़ गए। किसानों को हिंसा ही करनी होती तो वो 63 दिन से हाड़ कंपकपाती सर्दी में दिल्ली की सीमाओं पर लाखों की संख्या में क्यों बैठते?
- कल से सारे न्यूज़ चैनलों ने किसान नेताओं और दूसरे लोगों से तो बहुत सारे सवाल पूछे, पर गृहमंत्री श्री अमित शाह से इन घटनाओं की जिम्मेदारी लेने के लिए क्यों नहीं कहा? :
- क्या हिंसा का वातावरण बना यह सब किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश नहीं?
- क्या यह दिल्ली दंगों, शाहीन बाग, CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों, JNU, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रकरण की पुनरावृत्ति तो नहीं?