नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) ने कृषि कानूनों (Three FarmLaws of Central Government) पर 'खेती का खून तीन काले कानून' बुकलेट जारी की। राहुल गांधी ने कहा, हर इंडस्ट्री में चार-पांच लोगों का एकाधिकार बढ़ रहा है, मतलब इस देश के चार-पांच नए मालिक हैं। आज तक खेती में एकाधिकार नहीं हुआ। नरेंद्र मोदी चार-पांच लोगों के हाथों में खेती का पूरा ढांचा दे रहे हैं|
राहुल गांधी ने कहा,;सरकार किसानों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, सरकार किसानों से बात करने के लिए कह रही है। 9 बार बात हो गई, सरकार मामले में कोर्ट को घसीटती जा रही है| ये तीन कानून एक प्रक्रिया है, ये यहां नहीं रूकने वाले। इनका लक्ष्य हिन्दुस्तान के किसान को खत्म करना और पूरा कृषि का सिस्टम अपने तीन-चार मित्रों को देना है|
दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा,''अगर आप पिछले 6-7 साल को देखें तो हर इंडस्ट्री में उन्हीं चार-पाँच लोगों का एकाधिकार बन रहा है। एयरपोर्ट या टेलीकॉम देखिए, जहां भी आप देखेंगे तो इन्हीं लोगों का एकाधिकार है|इस देश के 4-5 नए मालिक है। आज तक खेती में एकाधिकार नहीं था। आज तक हिंदुस्तान के खेतों का फायदा किसानों, मजदूरों, मिडिल क्लास और गरीबों को जाता था|
राहुल गांधी ने कहा,''कैसे एक पूरा ढांचा था जो इन लोगों की रक्षा करता था। उसमें मंडियाँ और आवश्यक वस्तु अधिनियम शामिल था, लीगल सिस्टम शामिल था। ये तीन कानून खेती में एक बार फिर से आज़ादी से पहले वाली हालत करने जा रहे हैं|4-5 लोगों के हाथ में पूरे कृषि हिंदुस्तान की खेती का ढांचा नरेंद्र मोदी जी दे रहे हैं। इसलिए किसान बाहर सड़कों पर खड़े हैं| हमारे मिडिल क्लास भाइयों और युवाओं को समझना होगा कि किसान अपनी रक्षा नहीं कर रहे हैं बल्कि वो आपकी और आपके भोजन की रक्षा कर रहे हैं|
राहुल गांधी ने कहा,''हम सभी को किसानों को अपना पूरा का पूरा समर्थन देना है। ये हिंदुस्तान की सच्चाई है|सरकार और उनका अहंकार समझता है कि किसानों को थकाया जा सकता है, उन्हें बेवकूफ बनाया जा सकता है। किसानों को ना तो थकाया जा सकता है, ना उन्हें बेवकूफ बनाया जा सकता है| राहुल गांधी ने कहा,''प्रधानमंत्री से ज्यादा समझ हिंदुस्तान के किसान को है कि क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है। यही सच्चाई है और इसका एक ही उपाय है कि इन तीन काले क़ानूनों को वापस लेना पड़ेगा|सरकार किसानों को भटकाने की कोशिश कर रही है। सरकार किसानों से कह रही है कि, बात करिए हमसे। 9-10 बार की बातचीत हो चुकी है लेकिन सरकार इसे घसीटते जा रही है|