नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत कोटा बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया| कांग्रेस ने EWS Category के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाले 103वें संविधान संशोधन पर SC के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह आरक्षण मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा आरंभ की गई प्रक्रिया का परिणाम है| पार्टी ने यह भी कहा कि मोदी सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ताजा जाति जनगणना पर उसका क्या रुख है|
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार (7 नवंबर 2022 ) को कहा कि,''103वें संविधान संशोधन को बरकरार रखने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के आज के निर्णय का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस स्वागत करती है, जिसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी के अलावा अन्य जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
जयराम रमेश ने कहा कि,'' यह संशोधन वर्ष 2005-06 में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा सिन्हो आयोग की नियुक्ति के साथ शुरू की गई प्रक्रिया का परिणाम था, जिसने जुलाई 2010 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद, इस पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया और विधेयक 2014 तक तैयार हो गया था। मोदी सरकार ने इस विधेयक को कानून की शक्ल देने में पांच साल का समय लगा दिया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ये भी कहा कि,'' उल्लेखनीय है कि सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना वर्ष 2012 तक पूरी हो चुकी थी, जब मैं स्वयं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री था। मोदी सरकार ने अभी तक ताजी जाति जनगणना पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है, जिसका कांग्रेस पार्टी समर्थन करती है और मांग भी करती है।
बरकरार रहेगा 'EWS' आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण पर लगाई मुहर
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार, 07 नवंबर, 2022 को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दाखिले और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने वाले 103 वें संविधान संशोधन की वैधता पर अपनी मुहर लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की बेंच ने संविधान के 103 वें संशोधन अधिनियम 2019 की वैधता को बरकरार रखा। जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 10% EWS आरक्षण प्रदान किया गया है। 3 न्यायाधीश अधिनियम को बरकरार रखने के पक्ष में जबकि 2 न्यायाधीश ने इसपर असहमति जताई।
बेंच के न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी, बेला त्रिवेदी और जेबी पारदीवाला ने EWS संशोधन को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश उदय यू ललित और न्यायाधीश रवींद्र भट ने इस पर असहमति व्यक्त की है। EWS संशोधन को बरकरार रखने के पक्ष में निर्णय 3:2 के अनुपात में हुआ।