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17 सितंबर 2026

संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार को घेरने की तैयारी, कांग्रेस उठाएगी ये तीन बड़े मुद्दे

नई दिल्ली: कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर शनिवार को एक बैठक की | कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र में चीन सीमा मामला, संस्थाओं ( मीडिया, ज्यूडिशरी, इलेक्शन कमीशन..etc) और महंगाई (आर्थिक स्थि…

संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार को घेरने की तैयारी, कांग्रेस उठाएगी ये तीन बड़े मुद्दे
संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार को घेरने की तैयारी, कांग्रेस उठाएगी ये तीन बड़े मुद्दे | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली:  कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर शनिवार को एक बैठक की | कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र में चीन सीमा मामला, संस्थाओं ( मीडिया, ज्यूडिशरी, इलेक्शन कमीशन..etc) और महंगाई (आर्थिक स्थिति, इन्फ्लेशन, बेरोजगारी, जीएसटी) के मसले को प्रमुखता से उठाने की योजना बना रही है| बता दें, संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है|



कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 70 मिनट के लिए हमारी कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी ने पार्लियामेंट्री रणनीतिक ग्रुप की एक बैठक ली। 7 दिसम्बर, 2022 से शीतकालीन सत्र शुरु होने वाला है। उस संदर्भ में ये मीटिंग बुलाई गई। इसमें हमारे कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे जी, वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम जी, केसी वेणुगोपाल जी, अधीर रंजन चौधरी जी, मनीष तिवारी जी, माणिक टैगोर जी, जावेद जी, कोडिकुनील सुरेश जी और मैं मौजूद थे।



कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा ,‘‘वैसे तो कई मुद्दों पर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ 14 या 15 मुद्दों का जिक्र किया। बेरोजगारी, किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, प्राईस राइज़ और इन्फ्लेशन, साइबर क्राईम जो अभी-अभी हम पढ़ रहे हैं एम्स के बारे में। पांचवा मुद्दा जो उन्होंने उठाया, खासतौर से जो यूपीए के कार्यकाल में अधिकार आधारित कानून जो बनाए गए थे, राइट बेस्ड रजिस्ट्रेशन बनाया गया था, आरटीआई, मनरेगा, फॉरेस्ट राइट एक्ट, वन अधिनियम, जो कमजोर किए जा रहे हैं। सीमा पर जो आज स्थिति है, चीन के साथ जो तनाव बरकरार है पिछले 22 महीने में, उसका भी जिक्र हुआ। जो संवैधानिक संस्थाएं हैं, जिनको कमजोर किया जा रहा है और जिनमें सरकार का हस्तक्षेप रोज हमें देखने को मिल रहा है, वो भी एक मुद्दा है।



जयराम रमेश ने कहा ,‘‘कांग्रेस प्रेसीडेंट ने मोरबी ब्रिज के गिरने के बारे में भी बात की। न्याय पालिका और सरकार के बीच में जो टेंशन पैदा की जा रही है, खासतौर से कानून मंत्री की ओर से जो न्यायपालिकाओं के लिए खतरनाक है। रुपए का डॉलर के संबंध में गिरता हुआ मूल्य, गिरता निर्यात और जो आर्थिक स्थिति काफी निराशाजनक है। वायु प्रदूषण, खासतौर से उत्तर भारत में उसका भी जिक्र हुआ। जम्मू और कश्मीर में जो कश्मीरी पंडितों पर टारगेटेड किलिंग हुए हैं और कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से भी प्रोटेस्ट हुए, उसके बारे में भी बातचीत हुई।



उन्होंने कहा ,‘‘कुल मिलाकर तीन बड़े मुद्दे हैं कांग्रेस की ओर से। ये एक छोटा सा सत्र है। 17 दिन हैं, 17 दिन में से 14 दिन हमें मिलते हैं, विपक्ष को बात उठाने को क्योंकि शुक्रवार को तो प्राईवेट मेंबर बिल होता है। तो इन 14 दिन में हम कौन-कौन से मुद्दे उठाएंगे, उनको प्राईयोरिटी देना है। 



जयराम रमेश ने कहा ,‘‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी, सभी विपक्ष के नेताओं के साथ अगले दो-तीन दिन में बातचीत करेंगे। पर तीन मुद्दे बड़े हैं। एक तो 22 महीने से जो चीन के साथ हमारी सीमा पर सवाल खड़े हुए हैं, तनाव बरकरार है और पार्लियामेंट में बहस नहीं हुई है। मैं आपको याद दिला दूं, ठीक 60 साल पहले जब चीन का आक्रमण हुआ था, 1962 में, नवंबर, 1962 में, दो चरण में हुआ था। पहला चरण अक्टूबर में हुआ, 20 से लेकर 28 को और दूसरा नवंबर के 15 तारीख के बाद हुआ और जब चीन का आक्रमण हुआ, उसी मुद्दे पर पार्लियामेंट में उस समय बहस हो रही थी। प्रधानमंत्री बैठा करते थे, प्रधानमंत्री ने सबको सुना, जवाब दिया। आक्रमण चल रहा था और ये आज की स्थिति देखिए 22 महीने से विपक्ष कोशिश कर रही है कि इस पर बहस तो हो, लोकसभा और राज्यसभा में, पर इस पर सरकार की ओर से हमें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। हालांकि उन्होंने इंकार कर दिया है, इस पर बहस पर भी ।



उन्होंने कहा ,‘‘तो एक मुद्दा जरुर उठेगा कांग्रेस की ओर से और हम उम्मीद करते हैं कि अन्य दल भी हमें समर्थन देंगे। जो सीमा से संबंधित चुनौतियां हैं, जो बॉर्डर सिचुएशन है। ये एक सामूहिक संकल्प हम बना सकते हैं, इस बहस को। सिर्फ आलोचना के लिए हम बहस नहीं चाहते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा है, जून के महीने में 2020 में कि कोई इनकर्शन नहीं हुआ। उसको छोड़िए, पर आज हम एक सामूहिक संकल्प दिखाना चाहते हैं और एक तरीका है पार्लियामेंट के अंदर बहस होना, पर बहस भी नहीं हो पा रही है, ये अजीब सी स्थिति है।



दूसरा जो मुद्दा है, वो आर्थिक स्थिति, इन्फ्लेशन, बेरोजगारी, जीएसटी । जो चुने हुए पूंजीपतियों को सार्वजनिक संपत्तियां बेची जा रही हैं। जो आर्थिक परिस्थितियां हैं आज देश के सामने, जो आंकड़े भी बताते हैं, निर्यात गिर रहा है, डॉलर और रुपए की वैल्यू में भारी गिरावट आई है। तो इस पर हम जरुर बहस मांगेगे ।



तीसरा बड़ा मुद्दा है - संस्थाओं के बारे में। जो इंडिपेंडेड संस्थाएं है, जो संवैधानिक संस्थाएं हैं। जो हमारे लोकतंत्र के स्तंभ हैं - मीडिया, ज्यूडिशरी, इलेक्शन कमीशन, ऐसी संस्थाएं हैं, जिनमें हस्तक्षेप हो रहा है। जिनको प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय का एक अंग बनाया जा रहा है, ये नामुमकिन है और जरुर कांग्रेस पार्टी इसके बारे में बहस चाहेगी।



कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा ,‘‘तो ये तीन बड़े मुद्दे हैं, पर इसके अंदर बहुत से छोटे-छोटे मुद्दे जुड़े हुए हैं। किसान के मुद्दे हैं जरुर। जब काले कानून वापस लिए गए थे, एमएसपी को कानूनी दर्जा देने के लिए बात हुई थी, उस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। वो जरुर हम उठाएंगे और जो आदिवासी और वन क्षेत्र से जुड़े हुए कानून में कमजोरी लाई जा रही है, उसका भी जिक्र होगा।



पर मोटे तौर से ये तीन बड़े मुद्दे हैं, जो मैंने कहा- बॉर्डर सिचुएशन, उस पर बहस। आर्थिक परिस्थितियां, इकॉनमिक सिचुएशन पर बहस और जो संस्थाएं हैं, संवैधानिक संस्थाएं हैं, जो हमारे लोकतंत्र के स्तंभ हैं, जिनका अधिकार छीना जा रहा है और जिनकी इंडिपेंडेस छीनी जा रही है, उस पर हम जरुर बहस चाहेंगे।



कांग्रेस सांसद ने कहा ,‘‘हमें बहस के लिए तीन या चार दिन मिलेंगे, क्योंकि ये छोटा सत्र है। तो कांग्रेस पार्टी विपक्ष की पार्टियों के साथ जरुर बातचीत करेगी, अगले दो-तीन दिन में । कांग्रेस अध्यक्ष खुद बात करेंगे और एक आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे कि इन तीन बड़े मुद्दों पर बहस हो ।



जातिगत जनगणना के पक्ष में है कांग्रेस पार्टी: जयराम रमेश

जयराम रमेश ने कहा,,‘‘मैंने पहले ही कहा है कि कांग्रेस पार्टी जाति के आधार पर जनगणना के पक्ष में है। 2011-2012 में ये जनगणना की गई थी, जब मैं ग्रामीण विकास मंत्री था। हमने करवाया था। 2013 तक वो जाति के आधार पर जनगणना पूरी हो चुकी थी, पर बाद में सरकार बदली और वो प्रकाशित नहीं हुई। उस सर्वे का जो नतीजा था, जो जानकारी हासिल की गई थी, प्रकाशित नहीं हुई। आज के हालात में मैं समझता हूं कि सेंसस (जनगणना) करवाना अनिवार्य है, बहुत जरुरी है और ये कांग्रेस पार्टी का एक बहुत सार पोजिशन है इस पर, क्लीयर है, स्पष्ट तरीके से हम कह रहे हैं।


उन्होंने कहा ,‘‘EWS आरक्षण पर बात हुई और ये तय हुआ है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की बात सही है कि जो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय था, तीन न्यायाधीशों ने उस संविधान संशोधन को सही ठहराया, पर दो न्यायाधीशों ने और जो चीफ जस्टिस उनमें शामिल थे, उन्होंने बहुत गंभीर सवाल उठाए हैं उस संशोधन के बारे में और कांग्रेस पार्टी चाहती है कि इस पर पुर्नविचार हो, हम इस पक्ष में हैं। इस विषय को हम जरुर उठाएंगे पार्लियामेंट में, और भी पार्टियां उठाएंगी, पर हम भी उठाएंगे कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मद्देनजर रखते हुए और जो दो न्यायाधीशों ने अपने जजमेंट में कहा है।



जयराम रमेश ने कहा,,‘‘जब पहली बार संविधान संशोधन बिल आया था, हमारे वक्ताओं ने भी पार्लियामेंट में यही सवाल उठाए थे, पर हमने तब संविधान संशोधन को समर्थन दिया था फरवरी 2019 को, पर उसके बाद में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया है और ये 5-0 जजमेंट नहीं है, ये 3-2 जजमेंट है यानि कि तीन जजों ने इसका समर्थन किया है, सही ठहराया है और दो न्यायाधीशों ने कहा है कि ये संविधान के खिलाफ है, ये गैर संवैधानिक है। तो हम चाहते हैं कि इस पर पुर्नविचार हो और इस पर भी हम बहस चाहेंगे और हम उम्मीद करते हैं कि सरकार ये माने ।



उन्होंने कहा ,‘‘तो ये सब बिल विधेयक के बारे में बातचीत हुई। 17 बिल लिस्ट हुए हैं और इन 17 विधेयकों में से तीन या चार ऐसे हैं, जिसका समर्थन हम नहीं कर सकते। मिसाल के तौर से बायलॉजिकल एडवर्सिटी अमेंडमेंट बिल है, उसका समर्थन हम नही कर सकते । मल्टी स्टेट कॉपरेटिव सोसाइटी अमेंडमेंट बिल, उसका भी हम समर्थन नहीं कर सकते, उस पर हम चाहेंगे कि वो स्टैंडिंग कमेटी में जाए और एक फॉरेस्ट कंजर्वेशन अमेंडमेंट बिल है, जो लिस्ट हुआ है, वो भी हम चाहेंगे, कि वो स्थाई समिति को भेजा जाए, ताकि उस पर और गहराई से विचार हो ।


जयराम रमेश ने कहा,‘‘इसके अलावा जो बाकी बिल हैं, तीन जो मैंने कहा- बायोलॉजिकल डायवर्सिटी अमेंडमेंट बिल 2021, दूसरा है, मल्टी स्टेट कॉपरेटिव सोसाइटीज अमेंडमेंट बिल 2022, जो हम चाहते हैं कि स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाए और तीसरा है, फॉरेस्ट कंजर्वेशन अमेंडमेंट बिल, 2022, वो भी हम चाहते हैं कि वो स्थाई समिति को भेजा जाए।



कांग्रेस नेता ने कहा,‘17 में से 3 ऐसे बिल हैं, जो मैं समझता हूँ कि कांग्रेस पार्टी इसका समर्थन नहीं कर सकती, इस रूप में, इस पर और बहस होने की जरुरत है। बायलॉजिकल डायवर्सिटी अमेंडमेंट बिल ज्वाइंट कमेटी को गया था । ज्वाइंट कमेटी में कई सदस्यों ने अपना डाईसेंट नोट भी दिया। मैं भी उस ज्वाइंट कमेटी का सदस्य था, कुछ समय तक, पर हमारी बातें मानी नहीं गईं, तो हम इस बिल का भी समर्थन नहीं कर सकते।



जयराम रमेश ने कहा,‘तो ये तीन बिल हैं, 17 में से, तो सरकार, हमारा अनुभव रहा है, लिस्ट करती रही है, पर और भी बिल लाते आखिरी वक्त में, तो क्या बिल लाएंगे, आज नहीं मैं बता सकता हूँ, पर जो लिस्ट भेजी गई है, हमें 17 बिलो में से, इनमें से तीन ऐसे हैं, जिसका समर्थन कांग्रेस पार्टी इस रूप में नहीं कर सकती। तो संक्षिप्त में यही है, तीन बड़े मुद्दे हैं, ये तीन बिल हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सभी विपक्ष के नेताओं से बात करेंगे, आज से लेकर अगले 2-3 दिन में । हमेशा हम कहते रहे हैं कि अगर सरकार बहस के लिए तैयार है, हम रचनात्मक सहयोग के लिए तैयार हैं। पर हमारा अनुभव है कि बहस कभी नहीं होती और हमेशा सरकार चाहती है कि उन्हीं के कहे हुए आदेशों के आधार पर पार्लियामेंट चले, ये नामुमकिन है।


पार्लियामेंट में अपोजीशन को मौका मिलना चाहिए

उन्होंने कहा ,‘‘एक पुरानी कहावत है, पार्लियामेंट के बारे में, पार्लियामेंट में ''Opposition must have its say''' यानि कि अपोजीशन को मौका मिलना चाहिए, अपनी बात रखने का । अगर बहुमत है, सरकार का ही, तो जो सरकार कहती है, वो चलेगा। तो दोनों के बीच में तालमेल होना चाहिए, पर हमारा अनुभव पिछले कुछ सालों में ये रहा है, पर हम उम्मीद करते हैं कि ये जो मुद्दे हमने उठाए हैं, तीन बड़े मुद्दे, आर्थिक परिस्थिति, बॉर्डर पर चुनौती और जो संवैधानिक और लोकतांत्रिक और हमारे लोकतंत्र की जो संस्थाए हैं, उनकी जो स्वतंत्रता और प्रोफेशनलिज्म पर हस्तक्षेप किया जा रहा है, उस पर बहस हो ।



उन्होंने कहा ,‘‘तो कल 10 बजे स्टियरिंग कमेटी की बैठक है, उसके बाद मैं आपको ब्रीफ करूँगा। कल की मीटिंग का मुख्य मकसद ये है कि प्लीनरी कहाँ है और प्लीनरी कब हो, उसी पर चर्चा होगी और कल भारत जोड़ो यात्रा कल शाम को राजस्थान के झालावर जिले तक पहुंचेगी और कल रात हम झालावर जिले में रहेंगे, कल रात को और कल 88वां दिन है, भारत जोड़ो यात्रा का ।



राज्य सभा के नेता विपक्ष के लिए पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्री जयराम रमेश ने कहा कि उस पर कोई बहस नहीं हुई, सोनिया जी हमारे संसदीय दल की अध्यक्ष हैं। खरगे जी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं। ये बात किसी समिति में नहीं बात की जाती। जो कुछ कार्रवाई करनी है, जो हमारे पार्लियामेंट्री पार्टी के अध्यक्ष हैं, वो करेंगे। पर खरगे जी सभी विपक्ष की पार्टियों से बातचीत करेंगे। न केवल कांग्रेस प्रेसीडेंट होने के नाते, परंतु एलओपी राज्यसभा की हैसियत से भी ।


बहस मांगना हमारा अधिकार है : 'चीन सीमा विवाद' पर जयराम रमेश
एक प्रश्न पर कि क्या आप 'चीन सीमा विवाद' को लेकर जो पिछली बार बात की थी, वो हो नहीं पाई थी, क्या इस बार भी मांग करेंगे, कितनी उम्मीद है, अगर ऐसा नहीं होता तो क्या विकल्प होंगे, श्री जयराम रमेश ने कहा कि विकल्प मैं नहीं कह सकता हूँ। बहस मांगना हमारा अधिकार है। आप हमें रोक नहीं सकते, बहस मांगने से और हम जानते हैं कि ये संवेदनशील मामला है। देशभक्ति की कोई मनोपॉली नहीं है, बीजेपी की और इस सरकार की, पर हम बहस चाहते हैं। मैंने आपको उदाहरण दिया 1962 में चीन का आक्रमण हो रहा था और पार्लियामेंट सेशन चल रहा था, लोकसभा में बहस हुई, राज्यसभा में बहस हुई, प्रधानमंत्री वहाँ बैठे थे, रक्षा मंत्री वहां बैठे थे। तो आलोचना, कड़ी आलोचना हो रही थी, सरकार की और वो सुन रहे थे।



हम बहस चाहते हैं और बहस हम क्यों चाहते हैं। एक सामूहिक संकल्प दिखाने के लिए। हम एक हैं, पर हमें बोलने दीजिए, हमें सवाल करने दीजिए और जो संवेदनशील मामले हैं, उसको हम भी पहचानते हैं। क्या संवेदनशील है, क्या नहीं संवेदनशील हैं, पर अगर प्रधानमंत्री ने जून के 2020 में कहा कि कोई हमारी जमीन पर नहीं बैठा है, तो ढाई साल से क्या चल रहा है, ये बातचीत और क्या ये रिपोर्ट आ रहे हैं, रोज और आज इस पर हमारी एक प्रेस कांफ्रेंस भी हुई है, तो इस पर बहस होनी चाहिए। ये हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा, कमजोर नहीं करेगा।

सरकार द्वारा बुलाई मीटिंग में शामिल होगी कांग्रेस

एक अन्य प्रश्न पर कि सरकार ने मीटिंग बुलाई है, पार्लियामेंट सेशन में, क्या आप ये बातें उठाने वाले हैं, श्री जयराम रमेश ने कहा कि जाएंगे, खरगे जी जाएंगे, अधीर रंजन जी जाएंगे।


पार्लियामेंट में हंगामा करना विपक्ष का अधिकार है

एक अन्य प्रश्न पर कि अगर सरकार ने आपको प्रश्न उठाने नहीं दिया और पिछली बार की तरह हंगामा हुआ और सांसदों को बाहर निकाल दिया, तो आप क्या करेंगे, श्री जयराम रमेश ने कहा कि मैं आपको याद दिला दूँ, एक बड़े वरिष्ठ राज्यसभा के सांसद और नेता अरूण जेटली जी ने क्या कहा था, पार्लियामेंट में कि हंगामा करना विपक्ष का अधिकार है। यह लोकतंत्र को कमजोर नहीं करता, लोकतंत्र को मजबूत करता है और जब सरकार सुनती नहीं है, तो हंगामा के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मैं उम्मीद करता हूँ कि हंगामा नहीं हो। मैं उम्मीद करता हूँ कि बहस हो, दो घंटे की बहस हो, तीन घंटे की बहस हो, हम रात को 10 बजे तक बैठने के लिए तैयार हैं, 11 बजे तक बैठने के लिए तैयार हैं, पर बहस हो । बहस से क्यों भाग रही है, ये सरकार?


ईडबल्यूएस आरक्षण हमारे घोषणापत्र में था..:  जयराम रमेश

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या कांग्रेस पार्टी ईडबल्यूएस आरक्षण के खिलाफ है, श्री जयराम रमेश ने कहा कि मैंने क्या कहा फरवरी, 2019 में हमने संविधान संशोधन बिल को समर्थन दिया, पर हमने कई सवाल उठाए, बिल को समर्थन दिया, ताकि इस पर चर्चा आगे और बढाई जाए। फिर सुप्रीम कोर्ट में गया, सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने उसको सही ठहराया, पर दो न्यायाधीशों ने, जिमसें चीफ जस्टिस भी शामिल थे, कई गंभीर सवाल उठाए हैं और वही सवाल हमारे प्रवक्ताओं ने भी उठाए हैं, कपिल सिब्बल जी, तब हमारे प्रवक्ता थे, राज्यसभा में, उन्होंने उठाया था और ये सवाल बहुत गंभीर सवाल हैं और इसीलिए हमने कहा, मैंने इस पर एक वक्तव्य भी दिया था, स्टेटमेंट भी दिया था कि ये बात सही है कि 2019 में हमने समर्थन दिया था। हमने हमारे 2009 के घोषणापत्र में और 2014 के घोषणापत्र में भी कहा है और मैं उसको दोहरा दूँ, कि हम ईडबल्यूएस आरक्षण के पक्ष में हैं, पर सभी समुदायों के लिए। 



ये हमारे घोषणापत्र 2009 में है और 2014 के घोषणापक्ष में है। तो हम इसके खिलाफ नहीं है, हमने कहा है, सभी को ये आरक्षण होना चाहिए, पर क्योंकि ये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद जो सवाल खड़े हुए हैं, उस पर विचार तो होना चाहिए, उस पर बहस तो होनी चाहिए, बहुमत तो सरकार के पास है और जाति आधारित जनगणना क्यों, बीजेपी चुप है? कांग्रेस पार्टी मांग कर रही है। सभी विपक्षी पार्टियाँ मांग कर रही हैं, क्यों बीजेपी चुप है? तो इस मुद्दे पर बिल्कुल स्पष्ट तरीके से मैं कह रहा हूँ, ईडबल्यूएस आरक्षण सभी समुदायों और क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से कई सवाल खड़े हुए हैं, हम चाहते हैं कि इस पर बहस हो, पार्लियामेंट में बहस हो, उसको बहस सरकार क्या करेगी, वो सरकार पर है, पर हम चाहते हैं कि इस पर बहस हो, और इस पर पुनर्विचार ह




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यह रिपोर्ट 3 दिसंबर 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 16 सितंबर 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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