मुख्य सामग्री पर जाएँ
24 अगस्त 2026

बागियों को धमका रहे प्रधानमंत्री: निर्दलीय कैंडिडेट को चुनाव से हटने के लिए कहने पर पीएम मोदी को कांग्रेस ने घेरा, कहा- यह निर्वाचन का दुरुपयोग...भ्रष्ट निर्वाचन की प्रक्रिया

नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला कहा कि ,'' वो अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं। क…

बागियों को धमका रहे प्रधानमंत्री: निर्दलीय कैंडिडेट को चुनाव से हटने के लिए कहने पर पीएम मोदी को कांग्रेस ने घेरा, कहा- यह निर्वाचन का दुरुपयोग...भ्रष्ट निर्वाचन की प्रक्रिया
बागियों को धमका रहे प्रधानमंत्री: निर्दलीय कैंडिडेट को चुनाव से हटने के लिए कहने पर पीएम मोदी को कांग्रेस ने घेरा, कहा- यह निर्वाचन का दुरुपयोग...भ्रष्ट निर्वाचन की प्रक्रिया | फ़ोटो: TVL News

 नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला कहा कि ,'' वो अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं।   कांग्रेस ने कहा,'' हिमाचल प्रदेश में BJP हार रही है,  यह मोदी जी भी मान चुके हैं।  एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पीएम मोदी BJP के बागी नेता कृपाल परमार को धमका रहे हैं। आप खुद वीडियो देखकर यह निर्णय कर सकते हैं कि BJP का शीर्ष नेतृत्व कितना घबराया और बौखलाया हुआ है| प्रधानमंत्री अपने पद और वरिष्ठ स्थान का दुरुपयोग कर रहे हैं जो एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के विषय में किया जा रहा है।  यह निर्वाचन का दुरुपयोग है, भ्रष्ट निर्वाचन की एक प्रक्रिया है|



दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है|  इस वीडियो में पीएम मोदी की भाजपा के बागी नेता कृपाल परमार के साथ बातचीत हो रही है। वीडियो में कृपाल परमार (निर्दलीय चुनाव लड़ रहे भाजपा नेता कृपाल परमार) के साथ भाजपा नेता ओपी चौधरी भी नजर आ रहे हैं। वीडियो में नरेंद्र मोदी कृपाल परमार को यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वे चुनाव प्रचार करना बंद कर दें| 'चुनाव से तुम (कृपाल परमार) हट जाओ, मैं कुछ नहीं सुनूंगा'..| वहीं, कृपाल परमार ने कहा कि जेपी नड्डा (भाजपा अध्यक्ष) ने मुझे बहुत जलील किया है ।




हिमाचल हार रही है भाजपा, मोदीजी ने भी है माना 

यही बता रहा है - डेरे के चक्कर लगाना और बागियों को धमकाना।"

“चुनाव में व्यस्त है प्रधानमंत्री, कौन आएगा गिरती अर्थव्यवस्था बचाने? 

पूरा देश छोड़ मोदी जी लगे हैं स्थानीय बागियों को मनाने।": कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी 



ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ,'वीडियो (पीएम मोदी की बातचीत का वीडियो) कल से है वायरल हो रहा है सबके पास, आप लोगों के पास होगा, नहीं हो तो हमारे डिपार्टमेंट ने भिजवा दिया है आपको। कोई लंबाचौड़ा नहीं है, एकाध मिनट का है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में सब जगह है। जो बड़ा स्पष्ट बताता है कि प्रधानमंत्री जी वीडियो पर बात कर रहे हैं। आवाज स्पष्ट है और बड़े स्पष्ट रूप से दबाव डाल रहे हैं और मानसिक रुप से भी दबाव डाल रहे हैं, इमोशनली, मानसिक, एक प्रकार से मानसिकता वाली ब्लैकमेलिंग चल रही है, बीजेपी के बागी कृपाल परमार के साथ वार्तालाप में। कांगड़ा डिस्ट्रिक्ट के फतेहपुर के विषय में कि आप वहाँ से स्वतंत्र कैंडिडेट न बनेंगे, नहीं बनिए, न बन सकते हैं। ये सब आप वीडियो में देख सकते है, ये सब आप अपने आप निर्णय कर सकते हैं कि कितना डेस्पिरेशन, कितनी घबराहट और बौखलाहट दिख रही है, बीजेपी के शीर्षस्थ व्यक्ति में, जिस प्रकार का वार्तालाप उस वीडियो में है।



कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि,''अब इसके 5 बड़े महत्वपूर्ण पहलू हैं, परिणाम हैं, मुख्य रुप जिनके उनके लिए मैं आया हूँ, आपके समक्ष। हमारे मुखर और माननीय और वरिष्ठ प्रधानमंत्री की जो वरीयता की सूची है, प्रायोरिटी लिस्ट, वो दुर्भाग्यवश बहुत उल्टी-सीधी है, विकृत है। उनकी प्रायोरिटी जो चीजें हैं, वो विकृत एक सूची है।


-पहला पहलू, क्योंकि वो इसमें अपना समय बिता रहे हैं, इस चीज में लगे हुए हैं, माइक्रो मैनेज कर रहे हैं, एक व्यक्ति, एक एमएलए, एक कॉन्स्टीट्यूएंसी में, तो आप समझ सकते हैं कि देश का क्या हाल होगा।


-दूसरा पहलू कि ये सुशासन नहीं, लेकिन चुनावी प्रचार और चुनावी काम ही सबसे बड़ा प्यारा शब्द है, इस सत्तारूठ पार्टी और सरकार के लिए, माननीय प्रधानमंत्री के लिए।


-तीसरा, बड़ा स्पष्ट है कि माननीय प्रधानमंत्री अपने वरिष्ठ स्थान और पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और वो दुरुपयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव के विषय में किया जा रहा है। हमारा मानना है कि ये निर्वाचन, यानि इलेक्टोरल दुरुपयोग है, भ्रष्ट निर्वाचन की एक प्रक्रिया है और मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि जो भी हमारे पास कानूनी अधिकार क्षेत्र हैं, चुनाव आयोग के समक्ष जाना और उसके अलावा जो अतिरिक्त है, उनको हम इंवोक करेंगे, उनका हम उपयोग करेंगे।


- चौथा, इस वार्तालाप से बड़ा स्पष्ट है कि बीजेपी एक घबराई हुई, बौखलाई हुई, एक असुरक्षित सी पार्टी है, जो जानती है कि हार उसके सामने लिखी है।


- पांचवा, हम इस देश के लिए छोड़ देते हैं, ये निर्णय करना, ये न्यायसंगत निर्णय करना कि क्या इतने ऊँचे पद, प्रधानमंत्री जिस पर बैठे हैं, उनको इस स्तर पर जाना चाहिए, इस स्तर की बातें होनी चाहिए, इस स्तर की प्रक्रियाओं में पड़ना भी चाहिए।



अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि,'' अंत में मैं ये कहना चाहूँगा कि देश के प्रधानमंत्री और ये छठा बिंदु भी बहुत महत्वपूर्ण है, आप गौर फरमाएं कि देश के प्रधानमंत्री यदि चुनाव के दौरान भाजपा से निष्कासित एक बागी नेता को फोन करके चुनाव से हटने का पूरा प्रयत्न कर सकते हैं, जो कि इस वीडियो में बड़ा स्पष्ट है तो आप समझिए कि चुनी हुई सरकारों को गिराने के लिए, विधायकों को बीजेपी के पाले में लाने के लिए क्या कुछ नहीं होता होगा, जिसके अंदर हम जानते हैं, प्रमाणित है, पुराने ट्रैक रिकॉर्ड द्वारा कि बीजेपी के पास पीएचडी है। चाहे वो कर्नाटक से हो, महाराष्ट्र से हो, गोवा से हो, मणिपुर से हो और इसके अतिरिक्त कई ऐसे मील पत्थर हैं।



उन्होंने कहा कि, “ तो मैं ये कहना चाहूँगा विनम्रता से प्रधानमंत्री से कि आपको ध्यान देना चाहिए कि आर्थिक दुर्व्यवस्था पर, सुशासन की तरफ, न कि आप राधास्वामी सत्संग जाएं, व्यास में, क्यों-क्योंकि चुनाव हिमाचल में, पास में, पड़ोस में होने वाले हैं। ये सिर्फ आपकी पार्टी का, आपके सिस्टम का भय, घबराहट और बौखलाहट दर्शाता है। ये जाहिर है कि बीजेपी को धर्म और ऐसे डेरे और ये सब मुद्दे तब याद आते हैं, जब वोटों की कमी पड़ रही होती है।



डॉ सिंघवी ने कहा कि,''अंत में मैं आपके समक्ष वो चीजें रखना चाहूँगा, बहुत ही संक्षेप में, जो वास्तव में प्रधानमंत्री को, चीफ एग्जीक्यूटिव जो हैं देश के, उनका ध्यान आकर्षित होना चाहिए, उस पर ध्यान देना चाहिए, वरीयता की सूची में वो सबसे पहले आने चाहिए न कि परमार साहब के साथ ऐसे वार्तालाप करें, आप। उसमें से मुख्य है, रिटेल इंफ्लेशन, जो अंतिम कंज्यूमर के लिए महत्व रखता है और सिर्फ एक महीने का आप उदाहरण लें, कई महीनों के उदाहरण हैं, सितम्बर, 2022 में ये रिटेल यानि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स जो अंतिम कंज्यूमर होता है, 7.5 प्रतिशत से थोड़ा सा कम बढ़ा है, यानि 7.4 प्रतिशत बढ़ा है। इससे भी ज्यादा घबराने वाली बात, इससे भी ज्यादा एक खतरनाक बात कि ये जो सीपीआई होता है, कंज्यूमर के विषय में ये ग्रामीण एरियाज में, शहरों से भी ज्यादा बढ़ा है। यानि ग्रामीण में इसका दुष्प्रभाव ज्यादा हुआ है।



उन्होंने कहा कि, “इसका मुख्य कारण है खाद्य पदार्थों की कीमतें, जो सीधा आम आदमी के पेट पर लात मारती हों। खाद्य पदार्थ को अगर आप लें, सितम्बर का जो मैंने आपको आंकड़ा दिया, साढ़े सात प्रतिशत, उसमें खाद्य पदार्थों का, वेजीटेबल्स का, यानि सब्जियों का 18 प्रतिशत है लगभग। मिर्च मसालों का 16.8 यानि करीब-करीब 17 प्रतिशत, सीरियल्स का साढ़े ग्यारह प्रतिशत। ये जो तीन आंकड़े दिए हैं मैंने आपको, सब्जियों के, मिर्च-मसालों के और सीरियल्स के, ये सितम्बर, 2013 के बाद हाइएस्ट सबसे ऊँचे आंकड़े हैं। यानि 9 वर्षों के सबसे बड़े। 



साथ-साथ इंफ्लेशन बढ़ना, कीमतें बढ़ना जाहिर है क्योंकि उत्पादन की दर 0.7 प्रतिशत गिरी है और अंत में रोजगार, जिसको तो खैर भूल ही गई है ये सरकार, माननीय प्रधानमंत्री भूल गए हैं, अपने वक्तव्यों को सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी, सीएमआईई दिखाता है कि 7.77 था, अक्टूबर का आंकड़ा और ग्रामीण बेरोजगारी 8.04 था, अक्टूबर में। 



सिंघवी ने कहा कि,''मैंने आपको बहुत कम आंकड़े दिए हैं, लेकिन उनसे आप कंट्रास्ट करिए जो वरीयता की सूची, एमएलएज बागियों को धमकाना, दबाव डालना, धर्म स्थानों के चक्कर लगाना, डेराओं के और चुनावी प्रचार में लगना, उस वरीयता की सूची में ऐसे आंकड़े बहुत महत्व रखते हैं।



प्रधानमंत्री द्वारा भाजपा के एक बागी प्रत्याशी को फोन करके मैदान से हटने के मामले में क्या कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग को शिकायत करेगी के उत्तर में डॉ अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मैंने 6 पहलू रखे हैं आपके समक्ष, उसमें से एक पहलू ये है। देखिए, चुनाव चल रहा है, चुनाव में आचार संहिता है, चुनाव में नियम होते है, समतल जमीन होती है, अगर आज आप मानसिक या किसी और प्रकार का दुष्प्रभाव मेरे ऊपर डालते हैं कि तुम खड़े नहीं हो सकते, ये आपने सुना है टेप में मैं शब्द दोहरा नहीं रहा हूँ, सीधा ये है कि आप किसी रुप में खड़े नहीं होना चाहिए, नहीं होंगे, नहीं होना है, ये बड़ा स्पष्ट है और उन्होंने कहा कि मैं तो भगवान के शब्द मानता हूँ, ये शब्द, आकाशवाणी है। तो इस प्रकार से अगर कुछ चीज होगी तो मैं समझता हूँ कि ये समतल जो जमीन, जिसके आधार पर, जो मर्जी, जिसकी मर्जा हो, जो स्वतंत्र रुप से जो चाहे कर सकता है, उसका उल्लंघन है।



-दूसरा, आचार संहिता, मैं हूँ, आप हो, प्रधानमंत्री हो, सब पर लागू होता है। तो हम इसका जो भी कानून बनता है, हम निश्चित रुप से याचिका करेंगे।



क्या पार्टी नेताओं द्वारा अपने बागी प्रत्याशियों को मनाने की बात आम नहीं है के उत्तर में डॉ सिंघवी ने कहा कि ये आमतौर वाली बात नहीं है, आपकी बात सही है, आपने अपने प्रश्न का उत्तर दिया है कि क्या आप समझते हैं कि प्रधानमंत्री जब एक व्यक्ति को गिड़-गिड़ाकर मांग रहे हैं, उससे बात करते हैं, और उसको बिना सुने इस प्रकार से मानसिक उसके ऊपर दुष्प्रभाव डालते हैं, तो वो आमतौर की बात हुई क्या? आपने किस प्रधानमंत्री को सुना है इस प्रकार से एमएलए इलेक्शन में बात करते हुए और चुनाव संहिता के बाद एक प्रकार से ये उसको समझा देना, चेतावनी दे देना कि किसी कारण से आप खड़े नहीं होंगे और खड़े होंगे, तो आप समझते हैं इसका दुष्प्रभाव। मैं नहीं समझता कि ये आमतौर की बात है।



गुजरात चुनाव को लेकर अरविंद केजरीवाल द्वारा कांग्रेस के संबंध में की गई भविष्यवाणी के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के  उत्तर में डॉ सिंघवी ने कहा कि मैं समझता हूँ कि अब उनको अपने पेशे को बदलकर, भविष्यवाणी बाला पेशा ले लेना चाहिए। हमारे अंदर तो इतनी हिम्मत नहीं कि हम राजनीति से भविष्यवाणी में चले जाएं, और इसी पर कहावत है कि one swallow does not make a summer. एक बार अगर आप जीत गए, तो वो भविष्यवाणी हर प्रदेश में अगर चलती होती, तो मैं समझता हूँ कि पूरा चित्र ही अलग होता। तो मैं बड़ी विनम्रता से कहूँगा कि ये भविष्यवाणियाँ छोड़ दीजिए जन आदेश पर, ये भविष्यवाणी छोड़ दीजिए उस जनता पर, जो वोट देने वाली है और अपने गिरेबान में झांककर अपने लोग जो इस्तीफा दे रहे हैं, उन पर ध्यान दीजिए।



डॉ सिंघवी ने कहा कि,''चुनावी हथकंडे हम सब समझते हैं। चुनाव में जब वोटों की कमी होती है, तो धर्म याद आता है। चुनाव में जब वोटों की कमी होती है, तो ऐसे वायदे याद आते हैं, जो 5 वर्ष से आप सत्तारूढ में हैं, आप सत्तारूढ़ पार्टी हैं, आप पद पर बैठे है, आपने कुछ भी नहीं किया और आप उससे भी ज्यादा देश के सेन्ट्रल लेवल पर 8 वर्ष से हैं, आप हमेशा चुनाव के वक्त कभी-कभी बोलते रहते हैं।



उन्होंने कहा कि, “तीसरा पहलू, कि आप समझते हैं कि यूसीसी प्रादेशिक स्तर पर चल सकता है? ये कभी किसी ने कानून के अनुसार किसी ने अपना माइंड अप्लाई किया कि आपके प्रदेश में यूसीसी है और साथ वाले प्रदेश में जाएंगे और वहाँ यूसीसी नहीं होता। तो मैं मतलब उत्तर प्रदेश से ट्रैवल करूँगा हिमाचल और हिमाचल से ट्रैवल करूँगा बंगाल तो मेरा यूसीसी बदलता रहेगा। उसके अनुसार मैं शादी करूँ या कुछ करूँ तो। कभी आपने सुना है ये? ये एक प्रदेश ने नहीं किया, ये कई बीजेपी प्रदेश होड़ में लगे हैं। ये होड़ है राजनैतिक, ये होड़ है देश को बरगलाने वाली, ये होड़ है जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने की, ये होड़ है जनता जनार्दन को ये समझना कि वो घास खाती है, लेकिन वो घास नहीं खाती, वो आपसे ज्यादा इंटेलिजेंट है।



इसी संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के  उत्तर में डॉ सिंघवी ने कहा कि हमने कह रखा है हमेशा, कोई नई चीज नहीं है। हम बिल्कुल समर्थन करेंगे अगर एक सहमति और कंसेंसस बनाने की प्रक्रिया शुरु हो और उसके बाद बहुत हद तक वो सहमति अधिकतर दिखे, लेकिन आप इस प्रकार के धूल झोंकने वाले, बरगलाने वाले, मूर्ख बनाने वाले वक्तव्यों का समर्थन चाहते हैं, तो मैं समझता हूँ, हमारा उत्तरदायित्व बनता है कि हम इसको एक्सपोज करें।


केन्द्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के एक बयान के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ सिंघवी ने कहा कि ये तो मैं नहीं समझता कि कोलिजियम या नेशनल जुडिशियल कमीशन या सेन्ट्रल गवर्मेंट, जो नियुक्तियों की जो प्रक्रिया है, उस पर कोई डिबेट आपत्तिजनक है। जो मैं कह रहा हूँ, मैं ये कह रहा हूँ कि ये आज मुद्दा एक नेशनल जूडिशियल कमीशन को प्रस्तावित करने के बाद और उसको असंवैधानिक करार करने के बाद बंद हो गया है। अभी पिछले 3 महीनों से क्या चीज हो गई है, जो बार-बार माननीय कानून मंत्री ये कहते हैं? 



मैं ये समझ सकता हूँ कि जब ये राष्ट्रीय न्यायिक आयोग प्रस्तावित और पारित हुआ था, तब ये डिबेट लाइव थी। जब ये डिबेट असंवैधानिक हो गयी है, जब आप सरकार, मैं तीन पहलू आपके लिए बड़े गौर से फरमा रहा हूँ, जब आप सरकार उसके बाद अभी तक कोई नया कानून नहीं लाए हैं। जो इस देश का कानून है, वह वो निर्णय है, जो आया था कुछ वर्ष पहले, तो क्या फायदा ये बार-बार वाक्य और भाषण और ये वक्तव्य देने का? इसका उद्देश्य क्या है?



उन्होंने कहा कि, “ये है कि आप सर्वोपरि रूप से ये अधिकार क्षेत्र अपने पास, केन्द्र सरकार के पास लाना चाहते हैं? क्या आपका जो ट्रैक रिकॉर्ड है, विलंब करने का, नियुक्तियों को नहीं मानने का, दो बार पारित हुई नियुक्तियाँ, जो उच्चतम न्यायालय दो बार पारित करता है, उसको भी नहीं मानने का, उसको बदलना चाहते हैं, जिससे कि अधिकार क्षेत्र आपका एकाकी हो, लेकिन ये सब डिबेट आज एक बार नहीं, माननीय रिजिजू जी ने कम से कम 4 बार कहा है, पिछले कुछ हफ्तों में। ये मैं समझता हूँ कि संदेहजनक है, आपत्तिजनक है। इसका कोई न कोई बाहरी इरादा है और उसको वो खुद स्पष्ट करें कि जब वो कुछ कानून नहीं लाए हैं, कुछ चीज नहीं कही है, तो ये बार-बार वक्तव्य देने से क्या फायदा?





tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 6 नवंबर 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।