नई दिल्ली: कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया है| कांग्रेस पार्टी ने कहा कि,सुप्रीम कोर्ट ने जो संज्ञान लिया और चिंता जाहिर की, वो स्वागत योग्य है। सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फ़ैसले पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने जो चिंता ज़ाहिर की उसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन जो 4 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है वो काफी चौंकाने वाला है, काफी अजीबो-गरीब है, क्योंकि हमने ये पाया कि वो चारों सदस्य जो कमेटी के सदस्य हैं, उन्होंने तो पहले से ही सार्वजनिक तौर से ये निर्णय कर रखा है और बात कही है कि ये तीनों काले कानून सही हैं
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज किसानों से बातचीत के लिए 4 सदस्यों की कमेटी बनाई है। कमेटी में शामिल 4 लोगों ने सार्वजनिक तौर पर पहले से ही निर्णय कर रखा है कि ये काले क़ानून सही हैं और कह दिया है कि किसान भटके हुए हैं। ऐसी कमेटी किसानों के साथ न्याय कैसे करेगी? ,''सुरजेवाला ने कहा कि,''ये 3 काले क़ानून देश की खाद्य सुरक्षा पर हमला हैं, जिसके 3 स्तंभ हैं- सरकारी खरीद, MSP, राशन प्रणाली जिससे 86 करोड़ लोगों को 2 रुपये किलो अनाज मिलता है। इसलिए कांग्रेस 3 कृषि क़ानूनों का विरोध तब तक करती रहेगी जब तक मोदी सरकार इन्हें खत्म नहीं कर देती|
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 49 दिन से अधिक सेलाखों किसान दिल्ली की सीमा पर न्याय की गुहार मांग रहेहैं। देश का 62 करोड़ अन्नदाता, गरीब खेत मजदरू, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्गों के लोग, साधारण किसान पूरे देश में जगह-जगह आं दोलनरत हैं और मोदी सरकार द्वारा बनाए तीन कालेक़ानूनों को खत्म करनेकी गुहार लगा रहा है। 66 सेअधिक किसानों नेअभी तक दिल्ली की सीमाओं पर दम तोड़ दिया, अपनी कुर्बानी देदी, पर देश के प्रधानमंत्री, माननीय नरेन्द्र मोदी जी का दिल नहीं पसीजा। कोई दिन नहीं जाता जब एक सेअधिक किसान काल का ग्रास नहीं बन जाता। पर प्रधानमंत्री जी नेआज तक सांत्वना का एक शब्द देश के अन्नदाता किसान के लिए नहीं कहा।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'' देश का किसान के वल एक मांग कर रहा है और वो मांग है 3 काले कानून खत्म करिए। पहले दिन से ही, जब रात के अंधेरे में अध्यादेश आया था, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि ये तीन काले कानून किसान विरोधी हैं, खेत और खलिहान विरोधी हैं और इन्हें फौरी तौर से खत्म करना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, श्रीमती सोनिया गांधी, श्री राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर से कहा कि ये तीन काले कानून हिंदुस्तान के संविधान पर कुठाराघात हैं, प्रांतों के अधिकार पर कुठाराघात हैं और इन्हें फौरी तौर से समाप्त करना चाहिए, इससे कम कोई और सोल्यूशन मंज़ूर नहीं। कारण बड़ा सीधा है, जो कांग्रेस ने बताया, क्योंकि इन तीन काले क़ानूनों के माध्यम से मोदी सरकार सरकारी खरीद, राशन प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली, इन तीनों को खत्म करना चाहती है।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''आठ दौर की वार्तालाप एक महीने से अधिक में सरकार द्वारा बनाई केन्द्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में बनाई कमेटी से हुई। सरकार हर बार अपनी ज़िम्मेदारी को टालती रही है और हद तो तब हो गई, जब 8वें राउंड की वार्तालाप के बाद देश के कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर जी ने आप सबके सामने कहा कि किसानों, अगर तुम्हें हम पर विश्वास नहीं, तो सुप्रीम कोर्ट चले जाईए। उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर धकेलने का प्रयास भी किया। पर किसान संगठन जो आंदोलनरत है, उन्होंने बार-बार कहा कि वो किसी हालत में सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे
सुरजेवाला ने कहा कि,''आदरणीय मित्रों, अब आज के संदर्भ में बात करें, तो आज का दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि कल और आज, दोनों दिनों में देश के उच्चतम न्यायालय ने भी जो वस्तुस्थिति बार्डर पर बनी है, क्योंकि शांतिप्रिय गाँधीवादी तरीके से अपना विरोध दर्ज करनेआ रहे किसानों को सरकार आने नहीं देती दिल्ली में, उन्हें बार्डर पर रोक रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के प्रति कल अपनी निराशा जाहिर की थी और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आज फिर अपनी चिंता किसान के प्रति जाहिर की और सरकार को सच्चाई का आईना दिखाने का प्रयास किया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,सुप्रीम कोर्ट ने कल ये भी कहा था कि अगर आप कानून खत्म नहीं करते, तो हम इन्हें स्टे कर देंगे और कानून को लागू करने की प्रणाली को अस्थाई तौर से, टैंपरेरी तौर से सुप्रीम कोर्ट ने रोक भी लगा दी और रोक लगा कर वार्तालाप के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बना दी। मैं उस कमेटी पर आऊं उससे पहले ये कहूँगा, हमारे देश में प्रजातंत्र के तीन स्तम्भ हैं – कानून बनाना और कानून खत्म करना विधायिका यानि संसद और प्रांतों में प्रांतों की ऐसेंबली का काम है। उन कानून, गलत हैं या सही है, संविधान की परिपाटी पर है, ये काम अदालतों का है यानि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का है और प्रशासनिक अमला, जिसे हम एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर कहते हैं, वो प्रशासनिक अंग हैं और ये तीनों अंग इंडिपेंडेड हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्यीय कमेटी भी बनाई और कहा कि ये किसानों से वार्तालाप करेंगे।
कांग्रेस ने कहा कि,सुप्रीम कोर्ट ने जो संज्ञान लिया और चिंता जाहिर की, वो स्वागत योग्य है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता से हम भी अपने आपको जोड़ते हैं। पर हम उस 4 सदस्यीय कमेटी जो सुप्रीम कोर्ट ने बनाई, उसका हमने अध्ययन करने का प्रयास किया और वो काफी चौंकाने वाला है, काफी अजीबो-गरीब है, क्योंकि हमने ये पाया कि वो चारों सदस्य जो कमेटी के सदस्य हैं, उन्होंने तो पहले से ही सार्वजनिक तौर से ये निर्णय कर रखा है और बात कही है कि ये तीनों काले कानून सही हैं। किसानों से तीन काले कानून को खत्म करने वाली कमेटी के सदस्यों ने पहले ही ये कह दिया कि ये तीनों काले कानून सही हैं और किसान गलत हैं, किसान भटके हुए हैं, तो ऐसी कमेटी किसानों से कैसे न्याय करेगी। मैं एक-एक करके आपको ये कागज़ात भी भेजूंगा।
पहले सदस्य हैं कमेटी के, अशोक गुलाटी जी, उन्होंने बाक़ायदा ये लेख लिखा और कहा कि ये तीनों कानून जो हैं, वो बिल्कुल रास्ता और सही चीज है और ये भी कहा कि अपोजिशन यानि विपक्षी दल, वो भटक गए हैं और किसान भी शायद भटक गए हैं। ये मैं नहीं कह रहा, ये अशोक गुलाटी, उस कमेटी के सदस्य कह रहे हैं। और बड़े अजीबो-गरीब तरीके से उन्होंने ये भी कहा कि मैं पहले से ही कह रहा हूं कि इन क़ानूनों के फायदे किसानों के समझ नहीं आ रहे। ये अशोक गुलाटी जी का कहना है।
उसके दूसरे सदस्य हैं – पीके जोशी साहब, जो शायद एक इंस्टिट्यूट के हैड भी रहे हैं। उन्होंने भी एक लेख लिखा और वो तो एक कदम और भी आगे निकल गए। उन्होंने कहा कि ये कानून भी ठीक हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं होना चाहिए। ये भी गलत है। मैं आपको अंग्रेजी में लेख की दो लाइन पढ़ता हूं, उन्होंने कहा, पीके जोशी साहब ने एक ज्योइंट आर्टिकल लिखा और कहा –The farm-agitations’ demand to repeal the three farm laws and legalise minimum support prices (MSPs) baffle us, given the apprehensions over the impact of the laws on the farmers are mostly misplaced. वो कहते हैं मैं इससे बहुत चौंक गया हूं।
तो बोलते हैं कि किसान जो हैं, वो भटके हुए हैं, उनकी जो सोच है, वो सही नहीं है और आगे जाकर उन्होंने ये भी कहा कि अगर सरकार को खेती की उपज खरीदनी पड़ेगी, तो सरकार के लिए तो ये संभव ही नहीं, सरकार को खेती की उपज खरीदनी ही नहीं चाहिए। I" तो उन्होंने कहा कि एमएसपी भी नहीं देना चाहिए, किसान भी भटके हैं और कानून भी गलत हैं।
तीसरे सदस्य हैं, माननीय अनिल घनवट साहब, जो एक संगठन के प्रमुख हैं। अब घनवट साहब तो इससे भी आगे चले गए। वो तो जाकर मैमोरेंडम देकर आए, चिट्ठी लिख कर देकर आए और उन्होंने ये कहा कि इन क़ानूनों से ही असली आजादी मिलेगी। यानि इन तीन काले कानून जो हैं, वो ना केवल सही हैं, उन्हीं से आजादी मिलेगी और वो इन काले कानूनों को लागू करने के हक में अपने संगठन के माध्यम से प्रदर्शन तक कर रहे हैं। (The Sanghatana has welcomed the three farm Bills, passed in Parliament amid strong protests by the opposition, and termed them as the first step towards “financial freedom for farmers. The new legislation limits powers of Agricultural Produce Marketing Committees (APMCs) and this is a welcome step, said Ghanwat) ये हमारे घनवंत साहब हैं।
चौथे जो मैंबर हैं, ऑल इंडिया किसान जो कॉर्डिनेशन कमेटी, जो सरकारी एक कमेटी है, वो उसके चैयरमेन हैं - भूपेन्द्र सिंह मान साहब और उन्होंने 14 दिसंबर को ये चिट्ठी लिखी बाक़ायदा और वो मिलकर आए मंत्री जी से। और इस चिट्ठी में क्या लिखा है, ये बड़ी इंटरेस्टिंग बात है, मान साहब ने लिखा कि आज भारत की कृषि व्यवस्था को मुक्त करनेके लिए प्रधानमंत्री, माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जो तीन कानून पारित किए गए हैं, हम उन क़ानूनों के पक्ष में सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं। ये तो मोदी जी की कमेटी के सदस्य हैं पहले से ही और ये हैं, (एक तस्वीर दिखाते हुए श्री सुरजेवाला ने कहा) ये नरेन्द्र तोमर जी को भूपेन्द्र सिंह जी को, ये वो फोटो है, गए और ज्ञापन देकर आए कि तीन काले कानून लागू करिए। हम ये सब आपको भेज रहे हैं।
कांग्रेस ने कहा कि,''अब सवाल ये है कि कमेटी के जब चारों सदस्य पहले से ही मोदी जी के साथ खड़े हैं, मोदी जी के काले क़ानूनों के साथ खड़े हैं, खेत और खलिहान को बेचने की मोदी जी की साजिश के साथ खड़ी है, तो ये कमेटी किसानों के साथ न्याय कैसे करेगी या कैसे कर सकती है और इसका नतीजा क्या निकलेगा? हम सबको, हमें नहीं मालूम कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने ये तथ्य किसी वकील ने रखे भी या नहीं रखे, क्योंकि जो आंदोलनकारी किसान बॉर्डर पर बैठे हैं, वो तो सुप्रीम कोर्ट गए नहीं, तो सुप्रीम कोर्ट कौन गया? सुप्रीम कोर्ट यही संगठन गया हुआ है। ये ऑल इंडिया जो कॉर्डिनेशन कमेटी है, किसान कॉर्डिनेशन कमेटी, ये तो सुप्रीम कोर्ट में पेटिशनर है। तो पेटिशनर कोई कमेटी का सदस्य कै से बनाया जा सकता है? ये बड़ी अजीब बात है।
सुरजेवाला ने कहा कि,''अब हमें नहीं पता कि माननीय मुख्य न्यायाधीश जी को किसने ये नाम दे दिए? इनके बैक ग्राउंड और इनके स्टैंड की जांच क्यों नहीं कराई गई? ये चारों व्यक्ति इन काले क़ानूनों के पक्षधर हैं और मोदी जी के साथ खड़े हैं, तो ऐसे में इस कमेटी से न्याय कैसे मिलेगा? ये देश के हर नागरिक को समेत माननीय सुप्रीम कोर्ट को सोचने की जरुरत है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट तो किसान के पक्ष में बात कर रही है। सुप्रीम कोर्ट तो किसानों के प्रति चिंता जाहिर कर रही है। मुख्य न्यायाधीश तो निराशा जाहिर कर रहे हैं, गुस्सा भी जाहिर कर रहे हैं सरकार से कि वो किसानों की स्थिति से निपटते नहीं और जो कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई है, वो सारी मोदी जी के साथ खड़ी है, इन काले क़ानूनों के साथ खड़े हैं। तो काले क़ानूनों की पक्षधर 4 सदस्यीय कमेटी क्या खाक न्याय करेगी किसानों से? इसलिए इस पर जरुर अंतरमथंन की देश को जरुरत है।
सुरजेवाला ने कहा कि,''इसलिए हमारे किसान भाईयों ने भी साफ कहा, जो कांग्रेस ने कहा, जो राहुल गांधी जी ने पहले कहा कि केवल एक ही सोल्यूशन है, इन तीन काले क़ानूनों को खत्म करिए और साफ है सरकार धक्का मारकर किसानों को कभी कहती है कि सुप्रीम कोर्ट चले जाओ, कभी कहती है कि हम कानून खत्म नहीं करेंगे और साथ में कहते हैं कि हम 15 जनवरी को वार्तालाप करेंगे।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'15 जनवरी को प्रधानमंत्री जी को बातचीत करनी चाहिए। ये आज पक्ष सुप्रीम कोर्ट में भी रखा गया। साफ है सुप्रीम कोर्ट कैसे निर्णय कर सकती है एग्जीक्यूटिव का, इसलिए उन्होंनेक हा कि ये सरकार का काम है। तो सबसे बड़ी कमेटी तो पहले से ही खेती के मंत्री के नेतृत्व में बनी हुई है। ये जो आज कमेटी बनी, हमें बड़ी आशा थी कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के चिंता जाहिर करने के बाद कुछ ना कुछ हल निकलेगा, पर जब इनका बैकग्राउंड जांचा गया, तो ये तो चारों सदस्य जो हैं, इनमें से एक तो उसी संगठन का सदस्य है, जो सुप्रीम कोर्ट के सामने इन क़ानूनों को लागू करवाने के लिए गया, तो हल क्या निकलेगा?
सुरजेवाला ने कहा कि,''ये सवाल आज इस देश के जहन में हम छोड़कर जाना चाह तेहैं। किसानों को इस कमेटी से न्याय नहीं मिल सकता। एक लाइन की बात है। जो पहले से ही मोदी जी के साथ खड़े हैं, जो पहले से ही काले क़ानूनों के साथ खड़े हैं, जो पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करवा ने के साथ खड़े हैं, ऐसे सदस्यों से कुछ न्याय नहीं मिल सकता। इस पर हर व्यक्ति को सोचना चाहिए और अंतरमंथन करने की जरुरत है।