नई दिल्ली: दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ बैठे किसानों ने हरियाणा की राजनीति में हलचल पैदा कर रखी है| किसान आंदोलन ने राज्य की मनोहर लाल खट्टर सरकार को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है| इस बीच,''हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला गृह मंत्रालय (एमएचए) में गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे।
तीनों कृषि कानूनों पर 8 दौर की बातचीत के बाद भी जब किसानों और सरकार के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई तो आखिर में सुप्रीम कोर्ट को मामले में फैसला लेना पड़ा, जिसके बाद अब तीनों कानूनों पर रोक लगा दी गई है, साथ में चार सदस्यों की एक कमेटी भी गठित की है| मगर इन सब से किसान आंदोलन पर शायद ही कोई फर्क पड़ेगा, ये हम नहीं बल्कि दिल्ली के बॉर्डरों पर बैठे किसान कह चुके हैं|उधर दिल्ली में जेजेपी विधायकों के साथ डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बैठक की, और आंदोलन पर चर्चा की|
किसानों पर एक-एक विषय पर चर्चा हुई है, उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी इसका हल निकाल पाएगी: गृह मंत्री से मिलने के बाद हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर बातचीत हुई। 26 जनवरी का कार्यक्रम ठीक से हो जाए, किसानों ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि सारे कार्यक्रम शांतिपूर्ण होंगे: गृह मंत्री से मिलने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
कृषि कानूनों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अगले आदेश तक तीन कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी है| कोर्ट के अगले आदेश तक ये कानून लागू नहीं होंगे| शीर्ष अदालत ने इन कानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन भी किया है|। इस कमेटी में कुल 4 लोग शामिल होंगे, जिनमें भारतीय किसान यूनियन के जितेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल धनवत (शिवकेरी संगठन, महाराष्ट्र) शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर एक समिति गठित करने के फैसले पर किसान नेता डॉ दर्शनपाल सिंह ने कहा कि,''हमने कल रात एक प्रेस नोट जारी किया था जिसमें कहा गया था कि हम मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित किसी भी समिति को स्वीकार नहीं करेंगे। हमें भरोसा था कि केंद्र को अपने कंधों से बोझ हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से एक समिति का गठन किया जाएगा|
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि,'सरकार अपने ऊपर से दबाव कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जरिए कमेटी ले आई, इसका हमने कल ही विरोध कल दिया था। हम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कमेटी को नहीं मानते हैं, कमेटी के सारे सदस्य कानूनों को सही ठहराते रहे हैं| राजेवाल ने कहा कि,''हमने कल ही कहा था कि हम ऐसी किसी समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे। हमारा आंदोलन हमेशा की तरह आगे बढ़ेगा। इस समिति के सभी सदस्य सरकार के समर्थक हैं और सरकार के कानूनों को सही ठहरा रहे हैं|
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि,;;हमारा 26 जनवरी का प्रोग्राम पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, जिस तरह से भ्रम फैलाया जा रहा है जैसे किसी दुश्मन देश पर हमला करना हो, ऐसी गैर ज़िम्मेदार बातें संयुक्त किसान मोर्चा की नहीं हैं। 26 जनवरी के प्रोग्राम की रूपरेखा हम 15 जनवरी के बाद तय करेंगे|