नई दिल्ली: एडीआर ने SBI की अर्जी के खिलाफ चुनावी बांड मामले में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की | वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका का जिक्र करते हुए इसे एसबीआई की अर्जी के साथ सूचीबद्ध करने का आग्रह किया है। सीजेआई ने कहा, "हम इसे सूचीबद्ध करेंगे"
बता दें कि,''भारतीय स्टेट बैंक ने 04 मार्च 2024 को चुनावी बांड (Electoral Bonds) के विवरण का खुलासा करने के लिए समय सीमा 30 जून तक बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पिछले महीने अपने फैसले में अदालत ने बैंक को छह मार्च तक चुनाव पैनल को विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
भारतीय स्टेट बैंक ने चुनाव आयोग को विवरण प्रस्तुत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की 6 मार्च की समय सीमा को 30 जून तक बढ़ाने की मांग करते हुए बांड के डिकोडिंग से संबंधित "व्यावहारिक कठिनाइयों" का हवाला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार- 15 फरवरी को चुनावी बांड (Electoral Bonds) मामले पर अपना फैसला सुनाया था और इस योजना को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि चुनावी बांड योजना को "असंवैधानिक" करार दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार की चुनावी बांड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया है, जो राजनीतिक दलों को गुमनाम फंडिंग की अनुमति देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि बैंक तत्काल चुनावी बांड जारी करना बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि एसबीआई राजनीतिक दलों द्वारा लिए गए चुनावी बांड का ब्योरा पेश करेगा। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि एसबीआई भारत के चुनाव आयोग को विवरण प्रस्तुत करेगा और ECI इन विवरणों को वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा।
इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम 'असंवैधानिक': सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की चुनावी बांड योजना
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने गुरुवार को कहा कि गुमनाम चुनावी बांड योजना अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। इस निर्णय को भारतीय जनता पार्टी के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो 2017 में शुरू की गई प्रणाली का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। एसबीआई 12 अप्रैल, 2019 से अब तक खरीदे गए चुनावी बांड का विवरण चुनाव आयोग को प्रस्तुत करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया में प्रासंगिक इकाइयां हैं और चुनावी विकल्पों के लिए राजनीतिक दलों की फंडिंग की जानकारी जरूरी है। अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक या एसबीआई को ये बांड जारी नहीं करने का भी निर्देश दिया था।
नरेंद्र मोदी ने 'चंदे के धंधे' को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी
इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए एसबीआई द्वारा चार महीने का समय मांगे जाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'चंदे के धंधे' को छिपाने की पूरी ताक़त झोंक दी है। इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए एसबीआई द्वारा चार महीने का समय मांगे जाने को लेकर राहुल ने कहा है कि चुनाव से पहले मोदी के ‘असली चेहरे’ को छिपाने का यह ‘अंतिम प्रयास’ है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून तक का समय मांगना बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है। कांग्रेस नेता ने पूछा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड का सच जानना देशवासियों का हक़ है, तब एसबीआई क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले यह जानकारी सार्वजनिक न हो पाए?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि देश की हर स्वतंत्र संस्था ‘मोडानी परिवार’ बन कर उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि,''नरेंद्र मोदी ने ‘चंदे के धंधे’ को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉण्ड का सच जानना देशवासियों का हक़ है, तब SBI क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले यह जानकारी सार्वजनिक न हो पाए? एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून तक का समय मांगना बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है। देश की हर स्वतंत्र संस्था ‘मोडानी परिवार’ बन कर उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है। चुनाव से पहले मोदी के ‘असली चेहरे’ को छिपाने का यह ‘अंतिम प्रयास’ है।