नई दिल्ली: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया है कि मई में पार्टी के आंतरिक चुनाव कराए जाएंगे| सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि कांग्रेस पार्टी में संगठनात्मक चुनाव मई महीने में हो सकता|
सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नेता मधुसूधन मिस्त्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने कांग्रेस अध्यक्ष समेत संगठन का चुनाव तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव के बाद मई में कराने का प्रस्ताव रखा है। सूत्रों का कहना है कि चुनाव प्राधिकरण ने 29 मई को अधिवेशन कराए जाने की भी पेशकश की है। सीडब्ल्यूसी चुनाव प्राधिकरण के प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है और आज इस पर कोई अंतिम निर्णय होगा।
कांग्रेस कार्य समिति(CWC) ने किसानों पर एक प्रस्ताव पारित किया। कांग्रेस ने वैज्ञानिकों का धन्यवाद करने, लोगों को कोरोना वैक्सीनेशन के लिए आगे आने की अपील करने और व्हाट्सएप चैट लीक की संयुक्त संसदीय समिति की जांच पर भी प्रस्ताव पारित किया।
बैठक में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी की कथित वायरल वाट्सएप चैट को लेकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से पूरी तरह से समझौता किया गया। सरकार ने इसपर चुप्पी साधी हुई है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार निजीकरण को लेकर हड़बड़ी में है। कोरोना टीकाकरण पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आशा है कोविड टीकाकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी और इसे पूरा किया जाएगा।
सीडब्ल्यूसी की बैठक में उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार ने किसान संगठनों के साथ बातचीत के नाम पर हैरान करने वाली असंवेदनशीलता और अहंकार दिखाया है। सोनिया गांधी ने कहा, 'एक सप्ताह में संसद सत्र आरंभ होने जा रहा है। यह बजट सत्र है, लेकिन जनहित के कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पूरी तरह चर्चा किए जाने की जरूरत है। क्या सरकार इस पर सहमत होती है, यह देखने होगा।' केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया, 'किसानों का आंदोलन जारी है और सरकार ने बातचीत के नाम पर हैरान करने वाली असंवेदनशीलता और अहंकार दिखाया है।'
उन्होंने यह भी कहा, 'यह स्पष्ट है कि कानून जल्दबाजी में बनाए गए और संसद को इनके प्रभावों का आकलन करने का अवसर नहीं दिया गया। हम इन कानूनों को खारिज करते हैं क्योंकि ये खाद्य सुरक्षा की बुनियादों को ध्वस्त कर देंगे।'