नई दिल्ली: केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के पिछले साल 26 नवंबर को शुरू हुए आंदोलन को आज सात महीने पूरे हो गए हैं| इस मौके पर एक बार फिर किसान संगठन सरकार के खिलाफ लामबंद हुए हैं| दिल्ली-यूपी गाजीपुर बॉर्डर पर भारी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे हैं|
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा,''संसद तो किसानों का अस्पताल हैं। वहां हमारा इलाज होगा। हमें पता चला हैं कि किसानों का इलाज एम्स से अच्छा तो संसद में होता है। हम अपना इलाज वहां कराएंगे। जब भी दिल्ली जाएंगे हम संसद में जाएंगे|
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा,''हमारे जिन पदाधिकारियों को पकड़ा हैं उन्हें या तो तिहाड़ जेल भेजो या फिर राज्यपाल से इनकी मुलाकात कराओ। हम आगे बताएंगे कि दिल्ली का क्या इलाज करना है। दिल्ली बगैर ट्रैक्टर के नहीं मानती है। लड़ाई कहां होगी, स्थान और समय क्या होगा यह तय कर बड़ी क्राांति होगी|
26 जून को दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के सात महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने देशभर में राजभवन मार्च का ऐलान किया| इस दौरान किसान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सभी राज्यपालों/ उप राज्यपालों को सौंपेंगे| किसान मोर्चा ने इस विरोध मार्च का नाम "खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ दिवस" रखा है|
किसान नेता युद्धवीर सिंह दिल्ली में उपराज्यपाल के घर के पास 8-10 लोगों के साथ पहुँचे| पुलिस ने उन्हें राजभवन नहीं जाने दिया, बल्कि उन्हें अपने साथ ले गई.|दिल्ली के उपराज्यपाल के घर के बाहर दिल्ली पुलिस ने किलेबंदी कर दी है| ताकि किसान वहां तक पहुँच ही न पाएं| उपराज्यपाल के घर जाने वाले सभी रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है| इसके अलावा कंटीले तारों से बैरिकेडिंग की गई है| ट्रैक्टर रोकने के लिए रास्तों पर ट्रक और डम्फर खड़े कर दिए गए हैं|
गाज़ीपुर बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा,'अगर हमारे लोगों को उपराज्यपाल से मिलने नहीं दिया गया तो हम दिल्ली कूच करेंगे। हम कैसे जाएंगे इस पर हम अभी बैठक कर रहे हैं। हम उपराज्यपाल के पास जाएंगे|
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों का इलाज संसद में होगा और सरकार में बैठे लोगों का इलाज गांव में होगा| उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि हमने अहंकारी सरकार की मर्ज पकड़ ली है| उस मर्ज की दवा भी मिल गई और पहली ही खुराक ने बीमारी पर काबू करना भी शुरू कर दिया|