नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को Mann Ki Baat रेडियो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'लोग अपना ध्यान रखते हुए, दूसरों का ध्यान रखते हुए, अपने रोजमर्रा के काम भी कर रहे हैं। देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है।'कहा, 'गणेशोत्सव भी कहीं ऑनलाइन मनाया जा रहा है, तो ज्यादातर जगहों पर इस बार इकोफ्रेंडली गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई है।'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'हम बारीकी से देखेंगे तो एक बात ध्यान में आएगी-हमारे पर्व और पर्यावरण। इनके बीच बहुत गहरा नाता रहा है। एक ओर हमारे पर्वों में पर्यावरण और प्रकृति के साथ सह जीवन का संदेश छिपा होता है तो दूसरी ओर कई सारे पर्व प्रकृति की रक्षा के लिए ही मनाए जाते हैं। PM ने थारू आदिवासी समाज की बरना नामक परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारू आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लॉकडाउन, उनके शब्दों में 60 घंटे के बरना का पालन करते हैं।
आमतौर पर ये समय उत्सव का होता है, जगह-जगह मेले लगते हैं, धामिर्क पूजा-पाठ होते हैं। कोरोना के इस संकट काल में लोगों में उमंग तो है, उत्साह भी है, लेकिन हम सबको मन को छू जाए , वैसा अनुशासन भी है। लोग अपना ध्यान रखते हुए अपने रोजमर्रा के काम भी कर रहे हैं: मन की बात में पीएम मोदी
ऋगवेद में मंत्र है- अन्नानां पतये नमः, क्षेत्राणाम पतये नमः अर्थात अन्नदाता को नमन है। किसान को नमन है। किसानों ने कोरोना जैसे कठिन समय में अपनी ताकत को साबित किया है।हमारे देश में इस बार खरीफ की फसल की बुआई पिछले साल के मुकाबले 7% ज्यादा हुई है। धान इस बार 10%, दालें 5%, मोटे अनाज लगभग 3%, ऑयलसीड लगभग 13%, कपास लगभग 3% बोए गए हैं। इसके लिए मैं देश के किसानों को बधाई देता हूं : मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
खिलौने जहां activity को बढ़ाने वाले होते हैं, तो खिलौने हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं। खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, खिलौने मन बनाते भी हैं और मकसद गढ़ने वाले भी होते हैं।हमारे देश में Local खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं। भारत के कुछ क्षेत्र Toy Clusters यानी खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं|
ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री 7लाख करोड़ रु. से भी अधिक है। इतना बड़ा कारोबार लेकिन भारत का उसमें हिस्सा बहुत ही कम। 7 लाख करोड़ रुपयों का इतना बड़ा कारोबार, लेकिन भारत का हिस्सा उसमें बहुत कम है। जिस राष्ट्र के पास इतने विरासत हो, परम्परा हो, क्या खिलौनों के बाजार में उसकी हिस्सेदारी इतनी कम होनी चाहिए?खिलौनों के साथ हम दो चीजें कर सकते हैं - अपने गौरवशाली अतीत को अपने जीवन में फिर से उतार सकते हैं और अपने स्वर्णिम भविष्य को भी संवार सकते हैं: मन की बात में PM
मैं अपने स्टार्ट अप मित्रों, नए उद्यमियों से कहता हूं टीम अप फॉर टॉएज़-आइए मिलकर खिलौने बनाएं। अब सभी के लिए लोकल खिलौनों के लिए वॉकल होने का समय आ गया है|इस जमाने में कंप्यूटर गेम्स का भी बहुत ट्रेंड है। लेकिन इनमें जितने भी गेम् होते हैं उनकी थीम्स अधिकतर बाहर की होती हैं। हमारे देश में इतने आइडियाज़ और कॉन्सेप्ट हैं। मैं देश के युवा से कहता हूं कि भारत में और भारत के भी गेम्स बनाइए: मन की बात में PM
आत्मनिर्भर भारत अभियान में वर्चुअल गेम्स हो,खिलौने का सेक्टर हो,बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, ये अवसर भी है। जब आज से सौ वर्ष पहले असहयोग आंदोलन शुरू हुआ, तो गांधी जी ने लिखा था कि "असहयोग आंदोलन, देशवासियों में आत्मसम्मान और अपनी शक्ति का बौध कराने का एक प्रयास है"|आज जब हम देश को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो हमें पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है, हर क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। असहयोग आंदोलन के रूप में जो बीच बोया गया था उसे अब आत्मनिर्भर भारत के वट वृक्ष में परिवर्तित करना हम सब का दायित्व है: PM
बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारु आदिवासी समाज के लोग 60घंटे के लॉकडाउन का पालन करते हैं। प्रकृति की रक्षा के लिए बरना को थारु समाज ने अपनी परंपरा हिस्सा बना लिया है इस दौरान न कोई गांव में आता है न ही कोई अपने घरों से बाहर निकलता है|लोग मानते हैं कि अगर वो बाहर निकले या कोई बाहर से आया तो उनके आने-जाने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों से नए पेड़-पौधों को नुकसान हो सकता है: Mann Ki Baat में पीएम मोदी
वर्ष 2022 में हमारा देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष का पर्व मनायेगा। स्वतंत्रता के पहले अनेक वर्षो तक हमारे देश में आजादी का जन्म उसका एक लंबा इतिहास रहा है। इस दौरान देश का कोई कोना ऐसा नहीं था जहां आजादी के मतवालों ने अपने प्राण न्योछावर न किए हों|यह बहुत आवश्यक है कि हमारी आज की पीढ़ी, हमारे विद्यार्थी, आजादी की जंग हमारे देश के नायकों से परिचित रहे, उसे उतना ही महसूस करें:: पीएम मोदी