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26 अगस्त 2026

किसान आंदोलन: केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की बातचीत खत्म

नई दिल्ली: दिल्ली-यूपी और दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का धरना लगातार जारी है। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की कई सीमाओं पर बैठे किसान…

किसान आंदोलन: केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की बातचीत खत्म
किसान आंदोलन: केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की बातचीत खत्म | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली:  दिल्ली-यूपी और दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का धरना लगातार जारी है। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए  तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की कई सीमाओं पर बैठे किसानों का आंदोलन आज 56वां दिन है|  अन्नदाताओं और सरकार के बीच आज 10वें दौर की वार्ता होने वाली है|



Farmers Protest




कृषि मंत्री किसान यूनियनों को बताते हैं कि सरकार किसानों के मन में किसी भी तरह की शंका को दूर करने के लिए SC में एक हलफनामा देने को तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर दोनों पक्षों को बैठक समाप्त होने से पहले आम सहमति तक पहुंचना चाहिए|





सरकार के प्रस्ताव को लेकर किसान नेताओं की आपस में चल रही बैठक समाप्त हो गई है। किसान नेताओं ने तय किया कि वे गुरुवार को अन्य किसानों से बातचीत करने के बाद फैसला लेंगे।


केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की बातचीत खत्म हो गई है। इस बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकला है। केंद्र सरकार ने एक साल तक कृषि कानून को निलंबित रखने का प्रस्ताव दिया था, पर किसानों को यह मंजूर नहीं था।



सरकार ने कानून को स्थगित करने के साथ ही एक समिति बनाने का भी प्रस्ताव दिया, जिसमें किसान और सरकार दोनों के प्रतिनिधि होंगे। हालांकि किसानों ने इसे भी अस्वीकार कर दिया है।


कोरोना काल में हमारे प्रवासी मजदूरों के मुद्दे अभी तक अनछुए रह गए, उन पर चर्चा होगी। किसानों के मसले सामने लाने होंगे अर्थव्यवस्था को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं, इस पर चर्चा होगी: राजद नेता और राज्यसभा सासंद मनोज झा, 29 जनवरी से शुरू हो रहे संसद सत्र पर



आज सुप्रीम कोर्ट ने 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड को रोकने की याचिका पर कहा कि दिल्ली में क़ानून व्यवस्था बनाए रखना दिल्ली प्रशासन की ज़िम्मेदारी है। इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता: भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के वकील, ए.पी. सिंह



संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड को लेकर यह सुनिश्चित किया है कि यह अनुशासित परेड होगी। इसमें किसी उपद्रवी को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल किसान इसे लेकर दिल्ली पुलिस की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं कि क्या उन्हें रिंग रोड तक जाने दिया जाएगा या बॉर्डर पर ही परेड करनी होगी।



भोजनावकाश के बाद किसान नेताओं और सरकार की बैठक फिर शुरू हो गई है। इस दौरान किसानों ने कहा कि एनआईए प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रही है। तब सरकार ने उनसे बेगुनाह लोगों की लिस्ट देने को कहा है।



किसान नेताओं और सरकार के बीच चल रही वार्ता में अभी भोजनावकाश हुआ है। हालांकि अब तक इसमें कोई नतीजा नहीं निकला है। वहीं एनआईए की नोटिस का विरोध भी किसानों ने जताया तो मंत्री जी ने कहा पता करेंगे। अब तक की बैठक में सरकार ने एक बार फिर कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा तो किसानों कानून वापसी की अपनी मांग पर जोर दिया। एक किसान नेता ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा से सरकार भाग रही है।


किसान नेताओं और सरकार के बीच बैठक जारी है। किसान नेताओं ने बैठक में जाने से पहले कहा था कि वो सरकार से किसानों को मिले एनआईए के नोटिस पर चर्चा करेगी।



टिकरी बॉर्डर पर बुधवार को एक और किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई है।



दिल्ली: विज्ञान भवन में किसानों और केंद्र सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता शुरू हुई। बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सोमप्रकाश मौजूद हैं। 




दिल्लीः किसान प्रतिनिधियों के साथ कृषि अधिनियमों पर आधारित चर्चा हेतु  कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का विज्ञान भवन पहुंचे|



दिल्लीः केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल किसानों के साथ बैठक करने के लिए विज्ञान भवन पहुंचे। आज किसानों और केंद्र सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता होनी है।




दिल्ली: केंद्र सरकार के साथ होने वाली 10वें दौर की वार्ता के लिए किसान नेता विज्ञान भवन पहुंचे। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता ने बताया,"हम बैठक और आंदोलन भी करेंगे। किसान यहां से वापस नहीं जाएगा।MSP पर कानून,3 कानूनों की वापसी और स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं करेंगे"




'''किसान महापंचायत की ओर से पेश हुए वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के एक सदस्य के इससे अलग होने पर उन्होंने कमेटी को दोबारा बनाने के लिए आवेदन दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या यह वही संस्था है जिसने कल कमेटी के गठन को खारिज कर दिया था।




सीजेआई ने कहा, "हमने समिति को किसानों (सुनने) और हमारे पास आने और अपनी रिपोर्ट दर्ज करने की शक्ति दी।" "इसमें पक्षपात की बात क्या है ?," CJI ने कहा कि कोर्ट पर डामरीकरण न करें। समिति के सदस्यों को चीजों को स्थगित करने की कोई शक्ति नहीं दी गई है, उन्हें हमें रिपोर्ट करना होगा। पूर्वाग्रह का सवाल कहां है? अगर आप समिति के सामने पेश नहीं होना चाहते हैं, तो मत दिखाइए, लेकिन किसी को इस तरह से बदनाम या ब्रांड मत बनाइए, अदालत में डामरीकरण मत कीजिए।



फिलहाल,''सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत द्वारा दायर याचिका पर एक सदस्य द्वारा पुनर्विचार के बाद पुनर्विचार के लिए नोटिस जारी किया



जब सीजेआई ने कहा कि कमेटी को निर्णय लेने के अधिकार नहीं दिए गए हैं तो वकील हरीश साल्वे ने कहा कि, अदालत हमेशा से ही कमेटी का सहारा लेती रही है। अगर अगली बार कुछ ऐसा हुआ या कोर्ट पर कोई आक्षेप लगा तो हम अवमानना नोटिस लाएंगे ।सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के सदस्यों के बारे में जिस तरह से बात की गई और उनकी छवि को खराब किया गया उस पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ किया कि कमेटी सिर्फ सलाह देने के लिए बनाई गई है उसके पास कोई निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।''''''




-पहली बैठक में हमारे नेताओं से स्पष्ट कह दिया था कि अगली बैठक रखते हैं तो मन बना कर आएं कि कानून रद्द करना है और MSP पर कानून बनाने से नीचे कोई बात शुरू नहीं होगी। आज उम्मीद है कि कि सरकार ने मन बनाया होगा: ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू




सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैक्टर रैली के खिलाफ डाली गई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि वह इस पर कोई आदेश पारित नहीं करेगा। सिर्फ यही नहीं अदालत ने कहा कि किसानों द्वारा 26 जनवरी को किए जाने वाले किसी भी और तरह के प्रदर्शन पर वह आदेश पारित नहीं करेगी। सीजेआई ने कहा कि यह पुलिस को निर्णय लेना है। हम कोई आदेश नहीं देंगे। आप एक्शन लेने के लिए उचित अथॉरिटी हैं।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से अपनी याचिका वापस लेने के लिए कहा है जो उसने 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली के खिलाफ दायर किया है।



भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार के साथ होने वाली दसवें दौर की वार्ता के लिए रवाना होने से पहले ट्वीट किया- हम होंगे कामयाब, इसी उम्मीद के साथ विज्ञान भवन रवाना।



सरकार को 3 कानूनों को रद्द करना होगा और MSP पर कानून बनाना होगा, तभी हम किसानों को लाभ मिलेगा: किसान और सरकार के बीच आज होने वाली 10वें दौर की वार्ता से पहले राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता



किसानों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पुलिस के साथ होने वाली बैठक के लिए विज्ञान भवन पहुंचा है। बैठक के लिए अंदर जाने से पहले किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि, 'हम 26 जनवरी को सरकार की परेड में बाधा नहीं डालेंगे। हम उनसे कहेंगे कि ट्रैक्टर रैली के लिए रिंग रोड ठीक रहेगा क्योंकि ट्रैक्टर बहुत ज्यादा होंगे।'



आज की बैठक भी पहले जैसे ही होगी। बैठक से हमें कोई उम्मीद नहीं। जब भी बैठक होती है हम इसलिए जाते हैं कि सरकार हमारे साथ बैठक कर इसका हल निकाले। लेकिन हल निकालने का सरकार का अभी भी मन नहीं बना है: किसानों और सरकार के बीच आज होने वाली वार्ता पर एक किसान नेता, सिंघु बॉर्डर




किसानों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पुलिस के साथ होने वाली बैठक के लिए विज्ञान भवन पहुंचा।  किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया, "हम 26 जनवरी को सरकार की परेड में बाधा नहीं डालेंगे। हम उनसे कहेंगे कि ट्रैक्टर रैली के लिए रिंग रोड ठीक रहेगा क्योंकि ट्रैक्टर बहुत ज़्यादा होंगे।"



किसानों और सरकार के बीच आज की वार्ता पर भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि,''दो दिन पहले सरकार के मंत्री ने ऐलान किया कि हम कानूनों को निरस्त नहीं करेंगे। सरकार का रवैया अभी भी नकारात्मक है। इस परिस्थिति में बहुत कुछ होगा ऐसी कोई उम्मीद नहीं है|




कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 56वें दिन भी जारी है। किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष ने बताया,"आज की बैठक से भी उम्मीद नहीं है। इसका नतीजा पहली बैठक जैसा ही रहेगा क्योंकि सरकार का कानूनों को रद्द करने और MSP पर कानून बनाने का मन नहीं है।"




गाज़ीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जयंती ('प्रकाश पर्व') मना रहे हैं। 




सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गुरु गोविंद सिंह के 'प्रकाश पर्व' पर अरदास की।  एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "गुरु गोविंद सिंह हमारे 10वें गुरु हैं। उन्होंने सिख पंथ की नीव रखी थी। उनकी कुर्बानी बहुत बड़ी है।आज हमारी खुशी का ठिकाना नहीं है।"




गुरु पर्व के दिन यूपी गेट पर किसान आंदोलन के बीच नगर कीर्तन निकाला गया। सिख समाज के किसानों ने नगर कीर्तन में धार्मिक सद्भावना के साथ प्रार्थना की। नगर कीर्तन में शामिल पंच प्यारे यूपी गेट अंडरपास से होकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बने मंच के पास तक पहुंचे।




सरकार NIA के नोटिस भेज रही है, मुकदमें कर रही है। वे किसानों को इसमें उलझाना चाहते हैं ताकि किसानों का ध्यान इस पर केंद्रित हो जाए और वे दूसरे मामलों को छोड़ दें: राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता




जहरीला पदार्थ खाने वाले किसान की देर रात इलाज के दौरान मौत: टिकरी बॉर्डर पर मंगलवार को जहरीला पदार्थ खाने वाले किसान की देर रात संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उसने कल मुख्य मंच के पास जहर खाया था। वह रोहतक का रहने वाला था।




चंडीगढ़: कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में आज विभिन्न क्षेत्रों के लोग पोस्टर और झंडे लेकर चंडीगढ़ में सड़क पर खड़े नजर आए। एक लेखिका भवनीत कौर ने बताया, "हम किसानों के समर्थन के लिए आए हैं। हमें उनका समर्थन करना चाहिए, जब सरकार उन्हें नहीं सुन रही।"





समिति के सदस्य अनिल घनवट ने कहा, इन कानूनों पर निष्पक्ष चर्चा होगी। समिति के सदस्य रिपोर्ट तैयार करने के दौरान कृषि कानूनों पर अपनी निजी राय को अलग रखेंगे। महाराष्ट्र के शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट ने कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि हमें कानूनों के समर्थन और विरोध कर रहे सभी किसान संगठनों को सुनना है और रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट को भेजनी है। हम सरकार या किसी के भी  पक्ष में नहीं हैं।



दरअसल, मंगलवार को होने वाली इस बैठक को सरकार ने ट्रैक्टर रैली और सुप्रीम कोर्ट की गठित समिति पर किसान संगठनों का रुख भांपने के लिए एक दिन के लिए टाल दी थी। आज ही ट्रैक्टर रैली के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी है। वहीं, दसवें दौर की बैठक में भी सरकार अपने पुराने रुख से पीछे नहीं हटेगी। सरकार की ओर से एक बार फिर से किसान संगठनों को कानून के प्रावधानों पर आपत्तियां देने के लिए कहा जाएगा।



पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को सुबह 11 बजे से  शुरू हुई तकरीबन एक घंटे की बैठक में किसान नेताओं से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा, मगर किसान नहीं माने। माना जा रहा है कि अगली बैठक एक या दो दिन में फिर होगी। वहीं, तीनों कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति की मंगलवार को पहली बैठक पूसा परिसर में हुई, जिसमें यह तय किया गया है कि समिति किसानों के साथ 21 जनवरी को पहली बैठक करेगी, जो सुबह 11 बजे शुरू होगी। जो किसान बैठक में नहीं आ सकते हैं उनकी राय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ली जाएगी।



दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 55 दिनों से जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार आज किसान संगठनों के साथ दसवें दौर की बातचीत करेगी। सरकार इस बैठक में किसानों से गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली न करने का अनुरोध करने के साथ ही फिर से कानूनों के प्रावधान पर चर्चा का प्रस्ताव देगी। वहीं, ट्रैक्टर रैली निकालने पर अडे़ किसान नेताओं को दिल्ली, यूपी और हरियाणा की पुलिस मना नहीं पाई।





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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 20 जनवरी 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 25 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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