नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में फेरबदल बुधवार शाम 6 बजे किया जाएगा| शीर्ष सूत्रों ने बताया कि,कल शाम को केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की संभावना है। कई दिग्गज नेताओं को नई दिल्ली बुलाया जा रहा है, जबकि केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को अब राज्यपाल बना दिया गया है|इसके साथ ही मंत्रिमंडल में उनकी जगह खाली हो गई है|
कैबिनेट में शामिल होने को लेकर जिन लोगों की चर्चा हैं, उनमें से कई दिल्ली आ चुके हैं, जबकि कुछ दिल्ली आ रहे हैं|इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, सर्बानंद सोनोवाल, पशुपति पारस, नारायण राणे और वरुण गांधी शामिल हैं|
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में चिराग पासवान से बगावत कर एलजेपी के एक धड़े के अध्यक्ष बने पशुपति कुमार पारस को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इसपर चिराग पासवान ने कहा है कि एलजेपी से निकाले गए सभी पांच सांसद अब निर्दलीय हैं। ऐसे में अगर उन्हें एलजेपी कोटे से मंत्री बनाया जाता है तो उन्हें इसपर आपत्ति है।
पशुपति पारस को कुर्ता खरीदते हुए देखा गया| जब उस दौरान उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें दिल्ली से निमंत्रण मिला है तो उन्होंने कहा, 'राज को राज ही रहने दो| उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि उन्हें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से फोन आया था|
गौरतलब है कि अनुप्रिया पटेल, पंकज चौधरी, रीता बहुगुणा जोशी, रामशंकर कठेरिया,वरुण गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरसीपी सिंह, लल्लन सिंह, पशुपति पारस,राहुल काँस्वा, सी पी जोशी और सर्वानंद सोनोवाल को भी मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है| संभावनाओं के अनुसार, पीएम मोदी के कैबिनेट विस्तार में एक से अधिक मंत्रालय का काम संभाल रहे मंत्रियों के काम का 'बोझ' कम किया जाएगा|
केंद्रीय मंत्रिमंडल में 81 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन इस वक्त मंत्रिमंडल में सिर्फ 53 सदस्य हैं| इसका अर्थ यह हुआ कि 28 सदस्य जोड़े जा सकते हैं| अपने दूसरे कार्यकाल में PM नरेंद्र मोदी पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रहे हैं, तो वह अगले वर्ष पांच राज्यों में होने जा रहे चुनाव तथा वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को ज़रूर ध्यान में रखेंगे|
केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया गया है| इसके साथ ही मंत्रिमंडल में उनकी जगह खाली हो गई है| उनका राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल 2024 तक का है| ऐसे में मंत्रिमंडल में ऐसे व्यक्ति को शामिल किया जा सकता है, जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है|उसे गहलोत के बाकि बचे हुए कार्यकाल के लिए राज्यसभा में भेजा जा सकता है|
कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद थावरचंद गहलोत ने कहा कि,''मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता, राज्यसभा की सदस्यता और मंत्री पद से कल त्यागपत्र दे दूंगा|