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24 अगस्त 2026

भारतीय सेनाओं की गरिमा-परम्परा-अनुशासन की परिपाटी से खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार: अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर कांग्रेस ने पूछे 8 सवाल, चार साल की 'कॉन्ट्रैक्ट फौज भर्ती' के प्रावधान देखें...

सेनाओं में रेग्युलर भर्ती रोक 4 साल के ठेके पर फौज भर्ती देश की सुरक्षा के लिए सुखद संदेश नहीं!चार साल की नौकरी के बाद भर्ती हुए युवाओं के भविष्य का क्या होगा?नई दिल्ली: कांग्रेस ने सेना में भर्ती के…

भारतीय सेनाओं की गरिमा-परम्परा-अनुशासन की परिपाटी से खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार: अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर कांग्रेस ने पूछे 8 सवाल, चार साल की 'कॉन्ट्रैक्ट फौज भर्ती' के प्रावधान देखें...
भारतीय सेनाओं की गरिमा-परम्परा-अनुशासन की परिपाटी से खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार: अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर कांग्रेस ने पूछे 8 सवाल, चार साल की 'कॉन्ट्रैक्ट फौज भर्ती' के प्रावधान देखें... | फ़ोटो: TVL News

सेनाओं में रेग्युलर भर्ती रोक 4 साल के ठेके पर फौज भर्ती देश की सुरक्षा के लिए सुखद संदेश नहीं!

चार साल की नौकरी के बाद भर्ती हुए युवाओं के भविष्य का क्या होगा?



नई दिल्ली: कांग्रेस ने सेना में भर्ती के लिए आई 'अग्निपथ योजना' को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘बुधवार 14 जून, 2022 को मोदी मंत्रीमंडल ने देश की तीनों सेनाओं में चार साल की सेना भर्ती की घोषणा की व अपने चिर-परिचित अंदाज में इसकी पैकेजिंग करते हुए चार साल की "कॉन्ट्रैक्ट फौज भर्ती" को "अग्निवीर" बताया।



रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,तीनों सेनाओं में की जाने वाली इस चार साल की 'कॉन्ट्रैक्ट फौज भर्ती' के प्रावधान देखें। 

1. ट्रेनिंग समेत फौज में कुल सेवा केवल चार साल होगी। 

2. पहले साल में मासिक तनख्वाह केवल ₹30,000 होगी, जो आखिरी साल में ₹40,000 हो जाएगी। चार साल के आखिर में एकमुश्त पाँच लाख रुपया दिया जाएगा। 

3. चार साल की सेवा के बाद वापस जाने पर कोई ग्रेच्युइटी या पेंशन नहीं मिलेगी। 

4. चार साल की इस भर्ती वाले व्यक्ति को सैन्य कैंटीन का लाभ नहीं मिलेगा और न ही ECHS यानि किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा।

 5. चार साल की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत व्यक्तियों को ही सेना में रैग्युलर सेवा करने का मौका मिल सकता है। 75 प्रतिशत को घर वापस जाना पड़ेगा। 

6. चार साल की भर्ती वाले लोगों को सेना की रैंक नहीं मिलेगी, बल्कि इन्हें केवल 'अग्निवीर' कहा जाएगा।




कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला न?? कहा, ‘‘सैन्य विशेषज्ञों, तीनों सेनाओं के उच्चतम अधिकारियों व रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने मोदी सरकार की इस पूरी स्कीम पर गहन चिंता जताई है। एक से अधिक सैन्य अधिकारियों व विशेषज्ञों ने कहा है कि मोदी सरकार का यह फैसला भारतीय सेनाओं की गरिमा, परंपरा, जुड़ाव की भावना व अनुशासन की परिपाटी के साथ खिलवाड़ है। 



रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘‘रक्षा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि 4 साल की कॉन्ट्रैक्ट भर्ती देश की सुरक्षा के लिए उचित संदेश नहीं। यह निर्णय कहीं न कहीं तीनों सेनाओं की कार्यक्षमता, निपुणता, योग्यता, प्रभावशीलता व सामर्थ्य पर समझौता करने वाला है। सबसे चिंता का विषय है कि चार साल के बाद इन युवा सैनिकों के भविष्य का क्या होगा? यह सब तब किया जा रहा है, जब भारत के दो एक्टिव बॉर्डर हैं तथा देश पाकिस्तान व चीन के साथ जुड़ी सीमा पर लगातार संघर्षरत है। 




सैन्य अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों व सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट्स ने आनन-फानन में लिए इस निर्णय को लेकर कई गहन चिंताएं जताई हैं, जिनका जवाब आगे आकर प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री को देना चाहिए,



1. देश की तीनों सेनाओं में 2,55,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं। मोदी सरकार ने 2 साल से सेनाओं की भर्ती रोक रखी है। युवाओं में भारी बेचैनी है तथा हरियाणा व पंजाब के कई युवा भर्ती न होने के कारण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में क्या चार साल की कॉन्ट्रैक्ट भर्ती से सेना की रेग्युलर भर्तियों की आवश्यकता पूरी हो सकती है? क्या मोदी सरकार तीनों सेनाओं की 'ऑपरेशनल तैयारी' से खिलवाड़ नहीं कर रही? 



2. क्या इस पूरी 'अग्निवीर स्कीम' का लक्ष्य केवल और केवल तीनों सेनाओं के संख्याबल को हर साल 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत कम करना है? क्या यह स्कीम केवल तनख्वाह, पेंशन, हैल्थ बेनेफिट्स व कैंटीन सेवाओं आदि में कटौती करने के लक्ष्य से बनाई गई है? क्या इस वजह से दो साल से तीनों सेनाओं की भर्ती पर मोदी सरकार ने रोक लगा रखी है? अगर यह सही है, तो क्या यह देश की सुरक्षा के लिए सही संदेश है? 



3. भारत की तीनों सेनाओं की एक विशेष गरिमा, इतिहास, चरित्र व अनुशासन की परिपाटी है। सेना में सबसे बड़ा एस्सेट सैनिक है, जो 'यूनिट' के जुड़ाव के आधार पर लड़ता है और देश की रक्षा करता है। सैनिक के बलिदान की भावना, जिसे "नाम", "नमक" व "निशान" से जाना जाता है, वह सालों के जुड़ाव से पैदा होता है। एक अनुशासित कमान में हर कुर्बानी देने वाली फौज के लिए परंपराओं का यह जुड़ाव उन्हें एक परिवार बनाता है, तथा उस मार्ग पर चलकर वह देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानी करने को सदैव तत्पर रहते हैं। क्या चार साल के कॉन्ट्रैक्ट भर्ती के सैनिक इस परंपरा, परिपाटी, जुड़ाव व अनुशासन की भावना अपना पाएंगे? क्या इतने थोड़े समय में यह संभव हो पाएगा? 



4. जब दो पड़ोसी मुल्कों के साथ हमारे बॉर्डर एक्टिव हैं – एक तरफ पाकिस्तान की सीमा और दूसरी तरफ चीन की सीमा - तो ऐसे में रैग्युलर भर्ती पर पाबंदी लगाकर क्या चार साल की कॉन्ट्रैक्ट भर्ती करना देशहित में है?



 5. चार साल की सेना भर्ती योजना किसने बनाई? क्या इसे बनाने से पहले देश की सैन्य व सुरक्षा जरूरतों बारे उपयुक्त समीक्षा हुई? क्या यह सुझाव थल सेना, वायु सेना या नौसेना से आया? क्या ऐसा कोई सुझाव सीडीएस कार्यालय या पार्लियामेंट्री डिफेंस कमिटी से आया? अगर यह सुझाव सेनाओं, सीडीएस कार्यालय या पार्लियामेंट्री डिफेंस कमिटी से नहीं आया, तो फिर आधुनिक 'वॉर गेम' के मद्देनजर तथा दो मुल्कों के साथ ‘एक्टिव बॉर्डर' के मद्देनजर, यह सुझाव व इसकी उपयोगिता, जरूरत व तर्कसंगत योग्यता किस विशेषज्ञ ने आंकी तथा इस बारे क्या रिपोर्ट सरकार को मिली? क्या यह किसी राजनैतिक विशेषज्ञ के दिमाग की उपज है?



 6. नौसेना व वायुसेना के ज्यादातर पद टेक्निकल हैं व उन्हें एक स्पेशलिस्ट काडर की जरूरत है। इस स्पेशलिस्ट काडर में ट्रेनिंग की अवधि ही 1.5 से 2 साल है तथा कुछ समय एडवांस ईक्विपमेंट्स को जानने व समझने में भी लगता है। ऐसे में ट्रेनिंग कैसे देंगे और चार साल बाद इन ट्रेन किए गए लोगों को छोड़ेंगे कैसे? इसी प्रकार से थलसेना की आर्मर्ड, आर्टिलरी, टैंक, गन, इंजीनियरिंग ईक्विपमेंट्स, मिज़ाईल यूनिट्स आदि ब्रांचेस में भी टेक्निकल स्पेशलिस्ट व व्यापक तजुर्बे की आवश्यकता है। तीन महीने में ट्रेन किए गए व कुल चार साल के कॉन्ट्रैक्ट पर लगाए सैनिक किस प्रकार से थल सेना की इस जरूरत को पूरा कर पाएंगे?



7. चार साल के इन कॉन्ट्रैक्ट सैनिकों की कुल तनख्वाह यानि ग्रॉस सेलरी मात्र ₹30,000 है। इसके विपरीत भारत सरकार के क्लास 4, यानि ग्रुप डी कर्मचारी की कुल तनख्वाह यानि ग्रॉस सेलरी (31,000 है। भारत सरकार के क्लास 4 कर्मचारी से भी कम तनख्वाह देकर किस प्रकार की सैनिक भर्ती कर रही है मोदी सरकार? 



8. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चार साल के बाद इन युवाओं के भविष्य का क्या होगा? चार साल के बाद 22 से 25 साल की उम्र में बगैर किसी अतिरिक्त योग्यता के ये युवा अपने भविष्य का निर्माण कैसे करेंगे? क्या यह सही नहीं कि 15 साल की सेवा के बाद जब रैग्युलर सैनिक भी वापस घर लौटता है, तो उसे अधिकतर समय केवल बैंक में गार्ड या सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी ही मिल पाती है? तो ऐसे में चार साल की कॉन्ट्रैक्ट सेवा के बाद यह 23 से 25 साल का युवा क्या कर सकेगा? क्या उसकी जिंदगी प्रश्नचिन्ह में तो नहीं चली जाएगी और क्या वह रोजी-रोटी तथा अच्छी जिंदगी की तलाश में कहीं किसी गलत मार्ग की तरफ तो आकर्षित नहीं हो जाएगा? क्या मोदी सरकार इन चिंताओं और संभावनाओं का



जवाब देगी? देश जवाब मांगता है?


गौरतलब है कि सरकार ने  सशस्त्र बलों के लिए 'अग्निपथ' नामक एक नई भर्ती योजना लॉन्च की है| रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'अग्निपथ' (Agneepath) योजना हमारी आर्म्ड फोर्सेस (Armed Forces) में परिवर्तन लाकर उन्हें पूरी तरह आधुनिक और अच्छी तरह से सुसज्जित बनाएगी| अग्निपथ' योजना में भारतीय युवाओं को, बतौर 'अग्निवीर' आर्म्ड फोर्सेस में सेवा का अवसर प्रदान किया जाएगा| योजना के अंतर्गत 17.5 वर्ष से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को सशस्त्र बल- सेना, नौसेना और वायु सेना में 4 साल के लिए अग्निवीर के रूप में शामिल किया जाएगा|



रक्षामंत्री ने कहा,'अग्निवीरों के लिए इस योजना में वेतन का एक अच्छा पैकेज, 4 साल की सेवा एक्जिट पर सेवा निधी पैकेज एवं एक लिबरल डेथ और डिसेबिलिटी पैकेज की भी व्यवस्था की  गई है|






tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 15 जून 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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