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23 अगस्त 2026

New Education Policy शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली है, शिक्षा और महंगी हो जाएगी: कांग्रेस

नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन शिक्षा के आधार पर जीईआर(Gross Enrollment ratio) को 26% से बढ़ाकर 50% करने की बात कही गई है। क्या मोदी जी को ये मालू…

New Education Policy शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली है, शिक्षा और महंगी हो जाएगी: कांग्रेस
New Education Policy शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली है, शिक्षा और महंगी हो जाएगी: कांग्रेस | फ़ोटो: TVL News

 नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन शिक्षा के आधार पर जीईआर(Gross Enrollment ratio) को 26% से बढ़ाकर 50% करने की बात कही गई है। क्या मोदी जी को ये मालूम है कि इससे देश में गरीब, मध्यम वर्गीय और अमीर के बच्चों के बीच नया डिजिटल डिवाइड पैदा हो जाएगा|




 कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा,राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (एनईपी 2020), जिसका उद्देश्य ‘स्कूल एवं उच्च शिक्षा’ में परिवर्तनकारी सुधार लाना होना चाहिए, वह केवल शब्दों, चमक-दमक, दिखावे व आडंबर के आवरण तक सीमित रही है|इस नीति में (1) एक तर्कसंगत कार्ययोजना व रणनीति, (2) स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्य एवं (3) इस भव्य सपने के क्रियान्वयन के लिए सोच, दृष्टि, रास्ते व आर्थिक संसाधनों का अभाव व विफलता साफ है|




 कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा,'बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा नीति 2020 की घोषणा कोविड-19 के संकट के बीचों बीच क्यों की गई, वो भी तब जब सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। पूरे शैक्षणिक समुदाय ने आगे बढ़ विरोध जताया है कि शिक्षा नीति 2020 के बारे में कोई व्यापक परामर्श, वार्ता या चर्चा हुई ही नहीं|हमारे आज और कल की पीढ़ियों के भविष्य का निर्धारण करने वाली इस महत्वपूर्ण शिक्षा नीति को पारित करने से पहले मोदी सरकार ने संसदीय चर्चा या परामर्श की जरूरत भी नहीं समझी। जब कांग्रेस ‘शिक्षा का अधिकार कानून’ लाई, तो संसद के अंदर व बाहर व्यापक चर्चा हुई थी|




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,'स्कूल और उच्च शिक्षा में व्यापक बदलाव करने, परिवर्तनशील विचारों को लागू करने तथा बहुविषयी दृष्टिकोण को अमल में लाने के लिए पैसे की आवश्यकता है|शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने की सिफारिश की गई है। इसके विपरीत मोदी सरकार में बजट के प्रतिशत के रूप में शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च, 2014-15 में 4.14% से गिरकर 2020-21 में 3.2% हो गया है|




कांग्रेस नेता ने कहा, ,कोरोना महामारी के चलते इस बजट की राशि में भी लगभग 40 प्रतिशत की कटौती होगी, जिससे शिक्षा पर होने वाला खर्च कुल बजट के 2 प्रतिशत (लगभग) के बराबर ही रह जाएगा|शिक्षा नीति 2020 में किए गए वादों एवं उस वादे को पूरा किए जाने के बीच जमीन आसमान का अंतर है |




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,शिक्षा नीति 2020 का मुख्य केंद्र ‘ऑनलाइन शिक्षा’ है। इसके आधार पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का औसत भर्ती अनुपात मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने का दावा किया गया है|हाशिए पर रहने वाले वर्गों के 70 प्रतिशत से अधिक बच्चे पूरी तरह ऑनलाईन शिक्षा के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जैसा कोविड-19 की अवधि में ऑनलाइन क्लासेस की एक्सेस में गरीब के बच्चे पूर्णतया वंचित दिखे|




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,'यहां तक कि UDISE+(’यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन ऑन स्कूल एजुकेशन’, स्कूल शिक्षा विभाग, भारत सरकार) डेटा के अनुसार केवल 9.85 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में ही कंप्यूटर हैं तथा इंटरनेट कनेक्शन केवल 4.09 प्रतिशत स्कूलों में है|शिक्षा नीति 2020 में शैक्षणिक संस्थानों में दलित, आदिवासी, ओबीसी आरक्षण का कोई उल्लेख नहीं - चाहे वह छात्रों के लिए हो, शिक्षकों के लिए या अन्य कर्मचारियों के लिए हो|




कांग्रेस नेता ने कहा, "वास्तव में, शिक्षा नीति 2020 में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शामिल करने या लाभ देने के  बारे में किसी प्रावधान का उल्लेख नहीं है|शिक्षा नीति 2020 में प्राईवेट शिक्षा पर ज्यादा निर्भरता व सरकारी शिक्षण संस्थानों को कम करने का प्रावधान किया गया है|लेकिन सरकारी शिक्षण संस्थान बंद होते जाएंगे, तो फिर, दलित, आदिवासी, ओबीसी विद्यार्थियों के लिए कम होने वाले शैक्षणिक अवसरों का क्या विकल्प होगा? शिक्षा नीति में इसकी कोई चर्चा नहीं है|




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों की ‘स्वायत्तता’ व ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर हो रहे हमलों ने शिक्षा नीति के ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ एवं ‘जिज्ञासा की भावना’ जागृत करने के उद्देश्य को खारिज कर दिया|शिक्षा नीति 2020 का ‘क्रिटिकल थिंकिंग’, रचनात्मक स्वतंत्रता एवं ‘जिज्ञासा की भावना’ का उद्देश्य मात्र खोखले शब्द बनकर रह गया है|





कांग्रेस नेता ने कहा, "मोदी सरकार के संरक्षण में भाजपा व उसके छात्र संगठन सुनियोजित साजिश के तहत विश्वविद्यालयों पर लगातार हमले बोल रहे हैं, शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को समाप्त किया जा रहा है तथा शिक्षकों एवं छात्रों की बोलने की आजादी का गला घोंट दिया गया है|शैक्षणिक संस्थानों में भय, उत्पीड़न, दमन व दबाव का माहौल फैला है। यहां तक कि मेरिट को दरकिनार कर भाजपा-आरएसएस विचारधारा वाले लोगों को ही विश्वविद्यालय के कुलपति व अन्य महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है|





रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद , पंजाब, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, भगवंत राव मंडलोई कृषि महाविद्यालय, जेएमआई, NIFT मुंबई, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी, IIT मद्रास, IIM आदि पर लगातार हमलों के अनेक उदाहरण सार्वजनिक पटल पर मौजूद हैं|शिक्षा नीति गुणवत्तायुक्त ‘‘बचपन देखभाल एवं शिक्षा’’  प्रदान करने के लिए मूलभूत तौर से आंगनवाड़ियों पर निर्भर है। आंगनवाड़ी वर्कर पहले से ही अनेकों स्वास्थ्य तथा पोषण कार्यों के बोझ तले दबी हैं। उन्हें तो ‘सरकारी कर्मचारी’ का दर्जा भी प्राप्त नहीं है|




कांग्रेस नेता ने कहा, "आंगनवाड़ी वर्करों एवं सहायिकाओं को मात्र 4500 रु. और 2250 रु. का मासिक मानदेय ही मिलता है|दिसंबर 2019 के आंकड़ों के अनुसार, 3,62,940 आंगनवाड़ी केंद्रों में शौचालय नहीं हैं और 1,59,568 में पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं। क्या उनसे शिक्षा नीति द्वारा निर्धारित महत्वाकांक्षी ईसीसीई गुणवत्ता लक्ष्यों को पूरा करने व प्रदान करने की उम्मीद की जा सकती है?




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, शिक्षा नीति ने लर्निंग के संकट को समझकर मूलभूत साक्षरता व संख्याज्ञान, यानी मूलभूत स्तर पर पढ़ने, लिखने और बुनियादी अंकगणित की क्षमता पर बल दिया है|जुलाई 2018 तक, स्कूलों में टीचर्स के 10 लाख से अधिक पद खाली थे। शिक्षा नीति 2020 में टीचर्स के खाली पदों को भरने के लिए कोई रोडमैप नहीं बताया गया। शिक्षकों के ये पद भरे बगैर शिक्षा नीति 2020 लागू ही नहीं हो पाएगी|




कांग्रेस नेता ने कहा, "शिक्षा नीति 2020 खराब बुनियादी ढांचे व शिक्षकों की अनुपलब्धता के समाधान के रूप में ‘सामूहिक स्कूल परिसरों’ का प्रस्ताव करती है। पर एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में कई स्कूलों के बीच शिक्षकों, स्टाफ सदस्यों एवं संसाधनों को साझा करना एक बड़ी चुनौती है|शिक्षा नीति 2020 में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (एचईसीआई) और इसके चार वर्टिकल के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के संचालन के लिए एक टॉप-डाउन व्यवस्था की गई है|





रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,शिक्षा नीति 2020 में टॉप-डाउन मैनेजमेंट के चलते स्थापित लोकतांत्रिक संरचनाओं को खत्म करने से रचनात्मकता एवं क्रिटिकल थिंकिंग नष्ट हो जाएगी |शिक्षा नीति 2020 में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों के संचालन की व्यवस्था अपने आप में चिंताजनक है |




कांग्रेस नेता ने कहा, "सत्ताधारी दल की विचारधारा के प्रति वफादार लोगों की विवादास्पद नियुक्तियों के साथ संस्थानों में सत्ता का केंद्रीकरण होगा, जो विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा के संस्थानों के कामकाज में बाधा डालेगा तथा शिक्षा का अनावश्यक राजनीतिकरण करेगा|हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया व अनुदान, आर्थिक संसाधनों, मानकों के लिए बनाए जा रहे चार वर्टिकल्स की स्थापना के बाद देश में एक सर्वाधिक केंद्रीकरण वाले संस्थान का गठन होगा लेकिन इससे उच्च शिक्षा के स्वतंत्र विचारधारा वाले बौद्धिक विकास में बाधा उत्पन्न हो जाएगी|




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा,शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली है। इससे सरकारी अनुदान राशि में भारी कमी आएगी, फंड में कटौती होगी, फीस कई गुना बढ़ेंगी तथा शिक्षा और महंगी हो जाएगी|कई एक्ज़िट प्वाईंट्स के साथ शिक्षा का निजीकरण सरकार के दावे के विपरीत ड्रॉप आउट रेट बढ़ाएगा। सरकारी संस्थानों के बंद होने एवं अनियंत्रित निजीकरण पर अधिक निर्भरता के कारण उच्च शिक्षा मध्यम वर्ग और गरीबों की पहुंच से बाहर हो जाएगी|अंत में यह कहा जा सकता है कि शिक्षा नीति 2020 - मानवीय विकास, ज्ञान प्राप्ति, क्रिटिकल थिंकिंग एवं जिज्ञासा की भावना के हर पहलू पर फेल साबित हुई है









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