नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शुक्रवार को कहा कि चीनी आक्रमकता 'यथास्थिति को बदलने की एक साजिश है' और जोर देकर कहा कि गलवान में जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुंकुंद नरवणे ने कहा कि करीब 300 से 400 पाकिस्तानी आतंकवादी नियंत्रण रेखा के पार लॉन्चपैड में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अग्रिम चौकी पर तैनात सेना के जवान उनकी गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
सेना दिवस पर सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे ने करियप्पा ग्राउंड में परेड का निरीक्षण किया। सेना दिवस पर सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे ने कहा कि,''आज हम उन शहीदों को याद करते हैं जिहोंने देश की रक्षा में वीरगति प्राप्त की है। उनकी शहादत समस्त देश और भारतीय सेना के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। मैं उनके परिवारों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हम उनके साथ हमेशा खड़े हैं|
सेना प्रमुख ने कहा कि,'लगभग 300-400 आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के लिए सीमा के पास प्रशिक्षण शिविरों में बैठे हैं। पिछले वर्ष संघर्ष विराम उल्लंघन की संख्या में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पाकिस्तान के नापाक इरादों को दर्शाता है| प्रमुख ने कहा कि,',''पिछले साल सेना ने एलओसी के पास और आतंकवाद-रोधी अभियानों में 200 से अधिक आतंकवादियों का सफाया किया
सेना दिवस पर सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने चीन को दो टूक जवाब में दिया कि किसी को भी भारत के सब्र का इम्तिहान लेनी की गलती नहीं करनी चाहिए| सेना प्रमुख ने कहा कि,''आप सभी उत्तरी सीमाओं पर चीन के साथ चल रहे तनाव से अवगत हैं। सीमा पर एकतरफा तरीक़े से यथास्थिति बदलने के षड्यंत्र का भारत की ओर से जोरदार जवाब दिया गया है|
सेना प्रमुख ने कहा,''मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि गालवान के बहादुरों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा| हम चर्चा और राजनीतिक प्रयासों के माध्यम से अपने विवादों का समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन किसी को भी हमारे धैर्य की परीक्षा लेने की गलती नहीं करनी चाहिए| उन्होंने कहा कि,''सेना अपने आधुनिकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। आपातकालीन और फास्ट-ट्रैक योजनाओं के तहत, सेना ने लगभग 5,000 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे और पूंजीगत खरीद के तहत पिछले साल 13,000 करोड़ रुपये के अनुबंधित अनुबंध किए।
भारतीय सेना ने आज अपना 73वां सेना दिवस मनाया। भारतीय सेना हर साल 15 जनवरी को 'सेना दिवस' के रूप में मनाती है। वर्ष 1949 में आज के दिन जनरल के.एम. करियप्पा (बाद में फील्ड मार्शल) ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर एफ.आर.आर. बुचर से सेना की कमान संभाली थी। वे स्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने थे। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण के साथ हुई जहां सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने करियप्पा परेड ग्राउंड, दिल्ली छावनी में सेना दिवस परेड का निरीक्षण किया और वीरता के व्यक्तिगत कार्यों के लिए 15 सेना पदक (पांच मरणोपरांत सहित) और अपनी-अपनी इकाइयों के लिए सराहनीय कार्य प्रदर्शन के लिए 23 सी.ओ.ए.एस. यूनिट प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। सेना दिवस परेड की कमान दिल्ली एरिया के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल आलोक केकर ने संभाली थी। परेड के प्रमुख दल में परमवीर चक्र और अशोक चक्र पुरस्कार विजेता शामिल हुए।
इसके बाद सेना के दस्ते आए जिनमें टी-90 टैंक भीष्म, पैदल सेना इन्फेन्ट्री कॉम्बैट वाहन बीएमपी II, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, उन्नत चिल्का गन सिस्टम, ब्रिज लेयर टैंक, अंतर्राष्ट्रीय खेल पुरस्कार विजेता और 7 घुड़सवार दस्ते तथा माउंटिड होर्स केवेलरी शामिल थे।
भारतीय सेना ने 75 स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित ड्रोनों का उपयोग कर के ड्रोन स्वार्मिंग क्षमता का एक लाइव प्रदर्शन किया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) युक्त कृत्रिम आक्रमण मिशनों और नजदीकी सहायक कार्यों की श्रृंखला का निष्पादन भी किया गया।