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24 अगस्त 2026

वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की भी जरूरत: संविधान दिवस पर बोले PM मोदी

नई दिल्ली: संविधान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर वन नेशन वन इलेक्शन की बात पर जोर दिया है|गुरुवार को अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि ए…

वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की भी जरूरत: संविधान दिवस पर बोले PM मोदी
वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की भी जरूरत: संविधान दिवस पर बोले PM मोदी | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: संविधान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर वन नेशन वन इलेक्शन की बात पर जोर दिया है|गुरुवार को अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि एक देश एक चुनाव पर बहस बहुत जरूरी है|मोदी ने कहा 'वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की भी जरूरत है| यह विकास कार्य को बाधित करता है और आप सभी इसके बारे में जानते हैं| हमें इसके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए| पीएम ने कहा कि लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए केवल एक मतदाता सूची का उपयोग किया जाना चाहिए| हम इन सूचियों पर समय और पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं?




80वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्‍मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि,'हमारे यहां बड़ी समस्या ये भी रही है कि संवैधानिक और कानूनी भाषा, उस व्यक्ति को समझने में मुश्किल होती है जिसके लिए वो कानून बना है। मुश्किल शब्द, लंबी-लंबी लाइनें, बड़े-बड़े पैराग्राफ, क्लॉज-सब क्लॉज, यानि जाने-अनजाने एक मुश्किल जाल बन जाता है|




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,'हमारे कानूनों की भाषा इतनी आसान होनी चाहिए कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी उसको समझ सके। हम भारत के लोगों ने ये संविधान खुद को दिया है। इसलिए इसके तहत लिए गए हर फैसले, हर कानून से सामान्य नागरिक सीधा कनेक्ट महसूस करे, ये सुनिश्चित करना होगा|



प्रधानमंत्री ने कहा कि,''समय के साथ जो कानून अपना महत्व खो चुके हैं, उनको हटाने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए। बीते सालों में ऐसे सैकड़ों कानून हटाए जा चुके हैं। क्या हम ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकते जिससे पुराने कानूनों में संशोधन की तरह, पुराने कानूनों को रिपील करने की प्रक्रिया स्वत: चलती रहे?



प्रधानमंत्री ने कहा कि,हर नागरिक का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़े, ये संविधान की भी अपेक्षा है और हमारा भी ये निरंतर प्रयास है।  ये तभी संभव है जब हम सभी अपने कर्तव्यों को, अपने अधिकारों का स्रोत मानेंगे, अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे| अब हमारा प्रयास ये होना चाहिए कि संविधान के प्रति सामान्य नागरिक की समझ और ज्यादा व्यापक हो। आजकल आप लोग सुनते हैं KYC.. Know Your Customer डिजिटल सुरक्षा का अहम पहलू है। उसी तरह KYC यानि Know Your Constitution हमारे संवैधानिक सुरक्षा कवच को भी मज़बूत कर सकता है|





प्रधानमंत्री ने कहा कि,आज की तारीख, देश पर सबसे बड़े आतंकी हमले के साथ जुड़ी हुई है। 2008 में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने मुंबई पर धाबा बोल दिया था। इस हमले में अनेक भारतीयों की मृत्यु हुई थी। कई और देशों के लोग मारे गए थे। मैं मुंबई हमले में मारे गए सभी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं|मुंबई हमले के जख़्म भारत भूल नहीं सकता। आज का भारत नई नीति-नई रीति के साथ आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है|




प्रधानमंत्री ने कहा कि,इस हमले में हमारे पुलिस बल के कई जाबांज भी शहीद हुए थे। मैं उन्हें नमन करता हूं। आज का भारत नई नीति-नई रीति के साथ आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है|मैं आज मुंबई हमले जैसी साजिशों को नाकाम कर रहे, आतंक को एक छोटे से क्षेत्र में समेट देने वाले, भारत की रक्षा में प्रतिपल जुटे हमारे सुरक्षाबलों का भी वंदन करता हूं|




प्रधानमंत्री ने कहा कि,संविधान के तीनों अंगों की भूमिका से लेकर मर्यादा तक सबकुछ संविधान में ही वर्णित है। 70 के दशक में हमने देखा था कि कैसे separation of power की मर्यादा को भंग करने की कोशिश हुई थी, लेकिन इसका जवाब भी देश को संविधान से ही मिला|इमरजेंसी के उस दौर के बाद Checks and Balances का सिस्टम मज़बूत से मज़बूत होता गया। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों ही उस कालखंड से बहुत कुछ सीखकर आगे बढ़े|




प्रधानमंत्री ने कहा कि,भारत की 130 करोड़ से ज्यादा जनता ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है,  उसकी एक बड़ी वजह, सभी भारतीयों का संविधान के तीनों अंगों पर पूर्ण विश्वास है। इस विश्वास को बढ़ाने के लिए निरंतर काम भी हुआ है|इस दौरान संसद के दोनों सदनों में तय समय से ज्यादा काम हुआ है। सांसदों ने अपने वेतन में भी कटौती करके अपनी प्रतिबद्धता जताई है। अनेक राज्यों के विधायकों ने भी अपने वेतन का कुछ अंश देकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपना सहयोग दिया है|





कोरोना के इसी समय में हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती भी दुनिया ने देखी है। इतने बड़े स्तर पर चुनाव होना, समय पर परिणाम आना, सुचारु रूप से नई सरकार का बनना, ये इतना भी आसान नहीं है। हमें हमारे संविधान से जो ताकत मिली है, वो ऐसे हर मुश्किल कार्यों को आसान बनाती है|केवड़िया प्रवास के दौरान आप सभी ने सरदार सरोवर डैम की विशालता देखी है, भव्यता देखी है, उसकी शक्ति देखी है। लेकिन इस डैम का काम बरसों तक अटका रहा, फंसा रहा। आज इस डैम का लाभ गुजरात के साथ ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के लोगों को हो रहा है: PM





इस बांध से गुजरात की 18 लाख हेक्टेयर जमीन को, राजस्थान की 2.5 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित हुई है। गुजरात के 9 हजार से ज्यादा गांव, राजस्थान और गुजरात के अनेकों छोटे-बड़े शहरों को घरेलू पानी की सप्लाई इसी सरदार सरोवर बांध की वजह से हो पा रही है|ये सब बरसों पहले भी हो सकता था। लेकिन बरसों तक जनता इनसे वंचित रही। जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्हें कोई पश्चाताप भी नहीं है। इतना बड़ा राष्ट्रीय नुकसान हुआ, लेकिन जो इसके जिम्मेदार थे, उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। हमें देश को इस प्रवृत्ति से बाहर निकालना है: PM




'वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की भी जरूरत है।यह विकासात्मक कार्य को बाधित करता है और आप सभी इसके बारे में जानते हैं।हमें इसके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और कार्यालय-धारक इस पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए केवल एक मतदाता सूची का उपयोग किया जाना चाहिए। हम इन सूचियों पर समय और पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं? पूर्ण डिजिटलीकरण का समय यहां है।आम आदमी के पास हर सदन के कामकाज का डेटा होना चाहिए और देश के हर सदन के पास भी ऐसा डेटा होना चाहिए।: PM





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यह रिपोर्ट 26 नवंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 10 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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