नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के एडीजीपी प्रशांत कुमार ने दावा किया था कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में हाथरस की पीड़िता के साथ दुष्कर्म का जिक्र नहीं किया गया है, इस पर कांग्रेस ने आईपीएस अधिकारी को लॉ स्कूल में वापस जाने और खुद को 2013 में संबंधित कानून में किए गए संशोधन को लेकर अपडेट करने के लिए कहा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा, "यूपी के एडीजीपी को कानून स्कूल वापस जाने और 2013 में भारतीय दंड संहिता (दुष्कर्म) की धारा 375 में किए गए संशोधन पर खुद को अपडेट करने की सलाह दी जानी चाहिए।"
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट किया,'' कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेट बिल्कुल सही हैं। एडीजीपी यूपी को कानून स्कूल वापस जाने और 2013 में धारा 375 आईपीसी (बलात्कार) में संशोधन पर खुद को अपडेट करने की सलाह दी जानी चाहिए।"उन्हें संशोधन के पहले भी बलात्कार के मामले में यूपी बनाम बाबुल नाथ राज्य में सर्वोच्च न्यायालय के 1994 के फैसले को पढ़ना चाहिए। वीर्य के निशान के अभाव की कोई प्रासंगिकता नहीं है
पी चिदंबरम ने कहा,यूपी पुलिस अपने आप में एक कानून लगती है। ADGP ने एक अदालत की भूमिका निभाई है और सर्वोच्च न्यायालय के घोषित कानून के विपरीत है, जो कानून के बेतुके प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहा है।
दरअसल,''गुरुवार को यूपी पुलिस के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार का दावा है कि हाथरस कांड पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई।ADG कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कहा,''दिल्ली में पीड़िता के किए गए पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण गले में चोट होने के कारण उसके दौरान हुआ ट्रॉमा है। फोरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सैंपल्स में किसी तरह के स्पर्म और शुक्राणु नहीं पाए गए|
एडीजी के इस बयान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने कहा वीर्य (सीमन) नहीं मिला तो रेप नहीं हुआ है Hathras Case में.. | सुप्रिया श्रीनेत ने कहा ,''IPC धारा 375 का 2013 में संशोधन -सर्वोच्च न्यायालय का State of UP vs Babulnath 1994 साफ़ तौर से कहा है सीमन का ना मिलना या लिंग का पेनेट्रेशन ही नहीं रेप है उसकी कोशिश करना भी रेप है। शर्म कीजिए...