नई दिल्ली: लोकसभा के बाद रविवार को राज्यसभा में पेश किए गए कृषि संबंधित विधेयक विपक्ष के भारी हंगामे के बीच पारित हो गए। वोटिंग ध्वनि मत के जरिए करवाई गई।किसान संबंधी विधेयकों के राज्यसभा से पारित होने के बाद सदन को कल सुबह 9 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।ध्वनि मत के जरिए करवाई गई वोटिंग से पहले सदन में विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया और इन बिलों का जमकर विरोध किया।
Parliament Monsoon Session Updates:
विपक्ष ने लोकतंत्र की हत्या की। हम इसकी निंदा करते हैं। ये सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी की पार्टी सोचती है कि ये बादशाह हैं : केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री प्रह्लाद जोशी राज्यसभा में विपक्ष द्वारा हंगामा करने पर
राज्यसभा में चर्चा ठीक हो रही थी, बिल बहुमत से पास होने वाले थे। जब कांग्रेस को लगा कि वो बहुमत में नहीं है तो वो गुंडागर्दी पर उतर आए। आज कांग्रेस ने आपातकाल के बाद फिर एक बार ये सिद्ध कर दिया कि इस कांग्रेस का भी लोकतंत्र और प्रजातंत्र पर भरोसा नहीं है: केंद्रीय कृषि मंत्री
70 साल से जिस तरीके से किसानों के साथ अन्याय हो रहा था, शोषण हो रहा था, उनको आजादी दिलाने का काम सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किया है|राज्यसभा में जो भी हुआ (विपक्ष द्वारा हंगामा) मैं उसकी निंदा करता हूं। जो पार्टियां किसान विरोधी हैं उन्होंने आज इस तरह का प्रयास करके प्रजातंत्र पर बहुत बड़ा कुठाराघात किया है। उनको प्रजातंत्र पर भी विश्वास नहीं है इसलिए उन्होंने इस तरह से प्रयास किया था: BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष
जो पार्टियां बार-बार सभ्यता की बात करती हैं उन्होंने सभ्यता को ताक में रख कर जिस तरीके का कार्य किया है ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय है। चेयरमैन साहब इसका नोट लेंगे और इस पर एक्शन भी लेंगे : भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा
आज राज्यसभा में दो ऐतिहासिक कृषि विधेयकों के पारित होने के साथ, भारत ने 'आत्मनिर्भर कृषि' की मजबूत नींव रखी है : केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
लोकसभा के बाद रविवार को राज्यसभा में पेश किए गए कृषि संबंधित विधेयक विपक्ष के भारी हंगामे के बीच पारित हो गए।
राज्यसभा में विपक्ष के लगातार विरोध के बीच कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 पारित किया गया। राज्यसभा कल सुबह 9 बजे तक स्थगित।
राज्यसभा : TMC सांसद डेरेक ओ' ब्रायन और सदन के अन्य सदस्यों ने कृषि बिलों पर चर्चा के दौरान वेल में प्रवेश किया। डेरेक ओ' ब्रायन ने राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश को सदन की नियम पुस्तिका दिखाई।
कांग्रेस सांसद टी.एन. प्रथपन ने "सरकार के किसान विरोधी कानूनों" के खिलाफ देश भर में किसानों के विरोध पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया।
(भाजपा) वैसे तो पढ़ने लिखने में थोड़ा कम ही ये लोग जानते हैं लेकिन पहली बार घोषणापत्र में दिन और रात एक करके उसमें से कुछ चीज निकाली और अपने अध्यादेश से तुलना की कोशिश की। हमारा घोषणापत्र घोड़ा है लेकिन गधे के साथ इन्होंने तुलना करने की कोशिश की: राज्यसभा में MP अहमद पटेल
आज आप जो बिल ला रहे हैं जिसमें आपने कहा कि ये किसान के हित में है। क्या आप देश को आश्वस्त कर सकते हैं कि ये जो तीन बिल हैं ये मंज़ूर होने के बाद क्या हमारे किसानों की आय सच में डबल हो जाएगी और एक भी किसान इस देश में आत्महत्या नहीं करेगा : राज्यसभा में शिवसेना MP संजय राउत
प्रधानमंत्री ने कृषि बिल के बारे में कहा कि ये किसानों के लिए नई क्रांति है नई आज़ादी है। MSP और सहकारी खरीद की व्यवस्था खत्म नहीं की जाएगी, ये सिर्फ अफवाह है। तो क्या अकाली दल के एक मंत्री ने अफवाह पर भरोसा रखकर कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया : राज्यसभा में शिवसेना MP संजय राउत
यह सरकार सिर्फ तीन चीज़ें जानती है- पैकेजिंग करना, मार्केटिंग करना और मीडिया को मैनेज करना। हमारे घोषणा पत्र के दो बिंदुओं को पढ़कर भाजपा अपने अध्यादेश से तुलना तो करती है लेकिन 20 अन्य बिंदुओं को पढ़ना भूल गई|इस समय जो यह हमारे manifesto की बात कह रहे हैं वह सही नहीं है अगर इनको हमारा मेनिफेस्टो इतना पसंद है तो इस मेनिफेस्टो की सारी बातों को स्वीकार करें: कांग्रेस सांसद अहमद पटेल
राज्यसभा : डॉ. एल. हनुमनथैया ने कहा कि कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा।
आज नरेंद्र मोदी के राज में कृषि और किसान सबसे नीचे चले गए हैं। उसी का नतीजा है कि यह सरकार किसानों के लिए उन्हें नीचे ले जाने वाले अध्यादेश लेकर आ रही है। मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा हुआ था:कांग्रेस MP डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह
यह बिल किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। आप लफ़्ज़ों की कितनी भी सजावट कर लीजिए, आखिर में विधेयक कानून से असर करता है, सेक्शन सब-सेक्शन क्लॉज से असर करता है। आप यह अध्यादेश किसानों को बर्बाद करने हेतु लेकर आए हैं|ये किसान को बर्बाद करने वाले क़ानून है जब आप अपने कैबिनट के मंत्री को नहीं समझा पाए आप देश को कैसे समझाओगे मेरे नेता Rahul Gandhi सच्ची बात करते है, तो आपको अच्छि नहीं लगती ये bill काले अक्षरों से लिखा जाएगा: कांग्रेस MP शक्ति सिंह गोहिल
राज्यसभा में YSRCP MP वी.वी. रेड्डी ने कहा, "कांग्रेस के पास इन विधेयकों का विरोध करने का कोई कारण नहीं है। कांग्रेस मिडलमैन 'दलालों' की पार्टी है।" कांग्रेस ने हंगामा किया। कांग्रेस MP आनंद शर्मा ने उनसे माफी की मांग की।
क्या यह उचित नहीं होगा पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में कि देश की 7 फीसदी लोगों को रोजी-रोटी देने वाले सेक्टर के बारे में जब आप बिल लाएं तो विपक्ष के नेताओं से भी बात करें और देश के तमाम संगठनों से बात करें : राज्यसभा में कृषि विधेयकों पर सपा सांसद राम गोपाल यादव
राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कृषि विधेयकों पर कहा, आपने कहा था कि किसानों की आय 2022 तक डबल हो जाएगी। पर अभी वर्तमान में जो रेट चल रहा है उसके हिसाब से किसान की आय 2028 तक डबल नहीं हो सकती। मैं भी बड़ी बातें कर सकता हूं|
राज्यसभा में कृषि विधेयकों पर BJP सांसद भूपेंद्र यादव ने कहा, देश को जब आजादी मिली थी तब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आय का अनुपात 2:1 था। आपकी पार्टी जो नीतियां लेकर आई दुर्भाग्य से आज आय का अनुपात 7:1 हो गया है। ये ग्रामीण आय क्यों कम हुई है इसका जबाव दो आप|
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, 'पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है। पंजाब और हरियाणा के किसानों का मानना है कि ये उनकी आत्मा पर हमला है। इन विधेयकों पर सहमति किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा है।'
राज्यसभा में कृषि विधेयकों पर कांग्रेस MP बाजवा ने कहा,''ये जो बिल हैं उन्हें कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से रिजेक्ट करती है। ये बिल हिंदुस्तान और विशेष तौर से पंजाब, हरियाणा और वेस्टर्न यूपी के जमींदारों के खिलाफ है। हम किसानों के इन डेथ वारंटों पर साइन करने के लिए किसी भी हाल में तैयार नहीं |फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया मूल रूप से हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी के किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हिंदुस्तान के केंद्रीय भंडार में चावल और गेंहू लेती है। यह अध्यादेश मूल रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का मंसूबा हैं
ये दोनों बिल ऐतिहासिक हैं और किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। इस बिल के माध्यम से किसान अपनी फसल किसी भी जगह पर मनचाही कीमत पर बेचने के लिए आजाद होगा। इन विधेयकों से किसानों को महंगी फसलें उगाने का अवसर मिलेगा : राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
यह विधेयक इस बात का भी प्रावधान करते हैं कि बुआई के समय ही जो करार होगा उसमें ही कीमत का आश्वासन किसान को मिल जाए। किसान की संरक्षण हो सके और किसान की भूमि के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो इसका प्रावधान भी इन विधेयकों में किया गया है : केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, 'यह बहुत स्पष्ट है कि इस सरकार का मकसद हमारे किसानों को बर्बाद करना और कॉरपोरेट क्षेत्र की मदद करना है। हमारी पार्टी ने कृषि विधेयकों का विरोध करने का निर्णय लिया है। सरकार को विधेयकों पर पुनर्विचार करना होगा, कम से कम उन्हें इसे चयन समिति को भेजना चाहिए।'
सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिवसेना और एनसीपी के नेताओं से फोन पर बात की है और उनसे कृषि विधेयकों के पक्ष में समर्थन करने की अपील की है। बता दें कि सरकार के पास ऊपरी सदन में विधेयक को पास करवाने के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में कृषि संबंधित तीन विधेयक- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 पेश किए। कृषि मंत्री ने विधेयकों को पेश करते हुए कहा, 'दो विधेयक ऐतिहासिक हैं और किसानों के जीवन में बदलाव लाएंगे। किसान देश में कहीं भी अपनी उपज का स्वतंत्र रूप से व्यापार कर सकेंगे। मैं किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये विधेयक न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने भी ने कहा है कि एमएसपी जारी है और आगे भी जारी रहेगी।'