पटना: लोक जनशक्ति पार्टी से बगावत करने वाले चिराग पासवान के चाचा और सांसद पशुपति कुमार पारस को लोकसभा में पार्टी संसदीय दल का नेता चुना गया है|पशुपति कुमार पारस को सर्वसम्मति से लोकसभा में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) संसदीय दल का नेता चुना गया।इसका फैसला आज (13 जून को) हुई मीटिंग में लिया गया है|
बात दें कि चिराग पासवान के चाचा पशुपति समेत पांच सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है| यही नहीं, आज दोपहर करीब 3 बजे पशुपति कुमार पारस समेत पार्टी के बागी पांचों सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी मिलेंगे|
लोजपा के छह में से पांच सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर चिराग पासवान की जगह पारस को अपना नेता नियुक्त करने का लिखित अनुरोध किया था। लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को एक अधिसूचना में पार्टियों के फ्लोर नेताओं की एक संशोधित सूची जारी की, जिसमें पारस को लोक जनशक्ति पार्टी के नेता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
पशुपति पारस को संसदीय दल का नया नेता चुन लिया गया है। अब चिराग पासवान बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। बागी सांसदों ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष मानने से भी इनकार कर दिया है। जिन पांच सांसदों ने चिराग से अलग होने का फैसला किया है, उनमें पशुपति पारस पासवान (चाचा), प्रिंस राज (चचेरे भाई), चंदन सिंह, वीणा देवी, और महबूब अली केशर शामिल हैं। अब चिराग पार्टी में बिल्कुल अकेले रह गए हैं।
लोजपा में चल रही खींचतान के बीच चिराग पासवान दिल्ली स्थित अपने चाचा के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे। पासवान के रिश्ते के भाई और सांसद प्रिंस राज भी इसी आवास में रहते हैं। बीते कुछ समय से पासवान की तबीयत ठीक नहीं चल रही, उन्होंने 20 मिनट से ज्यादा समय तक अपनी गाड़ी में ही इंतजार किया। जिसके बाद वह घर के अंदर जा पाए और एक घंटे से भी ज्यादा समय तक घर के अंदर रहने के बाद वहां से चले गए। इस दौरान चिराग पासवान ने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कोई बात नहीं की। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों असंतुष्ट सांसदों में से उनसे किसी ने मुलाकात नहीं की। एक घरेलू सहायक ने बताया कि चिराग पासवन जब आए तब दोनों सांसद घर पर मौजूद नहीं थे।
लोक जनशक्ति पार्टी में फूट को लेकर जनता दल यूनाइटेड ने चिराग पासवान पर निशाना साधा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कहा कि जो जैसा बोएगा वैसा ही काटेगा। उन्होंने कहा कि पुरानी कहावत है कि जो जैसा बोता है वैसा ही पाता है। उन्होंने चिराग पासवान पर तंज कसते हुए कहा कि बिना मेहनत के पद मिलना आसान होता है, लेकिन उसे पचाना सबके लिए आसान नहीं होता है।