नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन का रविवार को 11वां दिन है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का समर्थन बढ़ता जा रहा है| सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच शनिवार को पांचवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही, जहां किसान संगठनों के नेता नये कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की मांग पर अड़े रहे| हालांकि, किसानों ने बातचीत से पहले ही 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा कर दी थी| किसानों के भारत बंद को कांग्रेस और बाकी कई पार्टियों ने भी अपना समर्थन दिया है|
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ने 8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करने का फैसला किया है| कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, "कांग्रेस ने 8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करने का फैसला किया है| हम अपने पार्टी कार्यालयों पर भी प्रदर्शन करेंगे|यह किसानों को राहुल गांधी के समर्थन को मजबूत करने वाला कदम होगा| हम यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रदर्शन सफल हो| पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा विश्व देख रहा है भारत के किसानों को दिल्ली के बाहर सड़क पर इस सर्दी में बैठे हुए। दिन-रात लाखों किसान प्रतीक्षा कर रहे हैं, आस लगाए बैठे हैं कि कब देश की निष्ठुर सरकार का मन पसीजेगा।
पवन खेड़ा ने कहा, "बुनियादी सवाल क्या है – बुनियादी सवाल यह है कि ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों हुई? आखिर क्या वजह है कि आनन-फानन में जून में अध्यादेश लाए जाते हैं। जब देश का ध्यान कोविड़ पर केन्द्रीत हो, तब देश की सरकार चुप-चाप अपने चंद उद्योगपति मित्रों की सेवा में हाजिर दिखाई देती है। ये प्रश्न बहुत वाजिब है, ये प्रश्न, ये सवाल हम सबके दिमाग में है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,'आखिर क्यों जल्दबाजी में संसदीय परंपराओं की धज्जियां उड़ाते हुए इन तीनों बिलों को पारित किया जाता है, विपक्ष को निलंबित कर दिया जाता है, ताकि कोई अपोजिशन दिखे ही नहीं और चुपचाप से बिल पास हो जाए और कानून बन जाएं....? आखिर क्या कारण है कि जिन किसानों के तथाकथित लाभ के लिए आप सामने ये दिखाते हो पूरे विश्व को कि इनका लाभ होने वाला है और ऐसे कानून पारित कर जाते हो, उन कानून को बनाने की प्रक्रिया में उन्हीं किसानों की सलाह नहीं ली जाती है? तो ये स्थिति इन कारणों से बनी है, इस स्थिति का ये छोटा सा इतिहास है, जो आप सबने देखा इस जून से लेकर और अब तक।
पवन खेड़ा ने कहा,'आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, उसके पीछे सरकार का एक षड़यंत्रकारी रवैया रहा है। जिसके चलते क्रोधित किसान दुखी मन से अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है और दिल्ली के दरवाजे पर खड़ा है। एक तो आपने किसान को सड़क पर आने को मजबूर कर दिया और वहीं दुसरी और आपके मंत्री, आपके राज्यों के मंत्री गैरजिम्मेदाराना बयान देकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कतेहैं।
उन्होंने कहा कि,''कुछ मंत्री हमारे किसानों को चीन और पाकिस्तान का एजेंट करार देते हैं और पड़ोस के हरियाणा के मुख्यमंत्री उन्हें खालिस्तानी करार देते हैं। माफ कीजिएगा चाटूकार मीडिया में तो प्लांट भी कराया जाता है कि ईडी की जांच होगी किसानों की फॉरेन फंडिग हो रही है। मजाक बना रखा है आपने। देश के किसान हैं, 62 करोड़ किसान हैं इस देश में, लाखों किसान बाहर दरवाजेपर खड़े हैं दिल्ली के और इस तरह की बात कर रहे हैं उनके विषय में। इस देश के किसानों की समस्या की मुख्य वजह क्या रही है – एमएसपी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,'स्वामीनाथन कमेटी के बारे में आप बार-बार बोलते हैं कि हमने लागू कर दी। पूछिए ना, कौन सा फॉर्मूला लागू किया? किसान उससे व्यथित हैं और अब आपने एपीएमसी और एमएसपी पर एक बहुत बड़ा संकट ले आए, जिससे किसान क्रोधित हुए। सीधे-सीधे आपने एपीएमसी व्यवस्था पर चोट की है, जिसके चलते आपने एमएसपी पर भी चोट की है।
उन्होंने कहा कि,''मेरे साथी रणदीप सिंह सुरजेवाला जी ने परसों बहुत स्पष्ट तौर से एमएसपी का मुद्दा समझाया था आपको। तो अपने पूंजीपति मित्रों को मुनाफा पहुंचाने की नीयत से ही जो जमाखोरी को प्रोत्साहन देने के लिए इन कानूनों को लागू किया जा रहा है, ये स्पष्ट हो जाता है, कृषि मंत्री गलती से ही सच निकल गया उनके मुँह से। उन्होंने तो परसों एक इंट्रव्यू में बोल ही दिया कि अगर हम ये कानून वापस लेते हैं, तो उद्योगपति हमारे पास आएंगे और कहेंगे कि ये कानून वापस क्यों ले रहे हैं? उन्होंने तो उद्योगपतियों के नाम भी लिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,'ये हम भूल जाते हैं, सरकारें भूल जाती हैं कि लॉकडाउन में अगर एक वर्ग निरंतर काम कर रहा था, तो वो था इस देश का किसान। लॉकडाउन में भी वो खेत में था। इस देश की अर्थव्यवस्था में अगर कुछ भी बचा है इस लॉकडाउन के बाद तो वो इस किसान की मेहनत का नतीजा के कारण बचा है।
उन्होंने कहा कि,''एक तरफ किसानों से वार्तालाप का स्वांग रचा जा रहा है, ढोंग किया जा रहा है। वहाँ वार्तालाप शुरु होने से पहले वाराणासी में प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि ये कानून वापस ही नहीं लिए जाएंगे। क्या ऐसे होती हैं समझौता वार्ताएं? हमने भी कई समझौता वार्ताएं की हैं। आप पहले ही दरवाजे बंद कर दो अपने दिमाग के, राजधानी के दरवाजे बंद कर दो और फिर कहो कि हम आपसे वार्तालाप करना चाहते हैं। आपकी नीयत स्पष्ट हो जाती है कि आप नहीं चाहते कि ये वार्तालाप सफल हो। आप नहीं चाहते कि कि किसानों की बात मानी जाए। आप नहीं चाहते कि आप ये कानून वापस लें, क्योंकि आपके मंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि उद्योगपति नाराज हो जाएंगे।
पवन खेड़ा ने कहा,'नोटबंदी से लेकर और कृषि के इन तीन काले कानूनों तक का सफर अगर आप मोदी जी के प्रधानमंत्रीत्व काल का देखेंगे तो बड़ा स्पष्ट हो जाएगा कि जो-जो निर्णय उन्होंने स्वयं लिए जिसमें पिछली सरकारों का कोई योगदान नहीं था, वो निर्णय इस देश को नागवार गुजरे हैं, इस देश को नुकसान पहुंचा कर गए हैं।
उन्होंने कहा कि,''कांग्रेस पार्टी ने, विशेष तौर पर श्री राहुल गांधी ने किसानों के पक्ष में सदैव अपनी आवाज़ उठाई है। पिछले कुछ महीनों से हमारी पार्टी ने निरंतर किसान सम्मेलनों, हस्ताक्षर अभियानों व ट्रैक्टर रैलियों के माध्यम से किसानों के हक़ की आवाज़ सरकार तक पहुँचाने का प्रयास किया है। आगामी 8 दिसम्बर को होने वाले भारत बंद को कांग्रेस पार्टी का पूर्णसमर्थन है। जिला व प्रदेश मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन कर हम यह सुनिश्चित करेंगे के किसानों की माँगों के समर्थन में आहूत भारत बंद पूर्णतः सफल रहे।
एक प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि ,''यह सोचने का विषय हम सबके लिए है क्योंकि भारत की साख की जिम्मेदारी सिर्फ़ सरकार की तो नहीं है, हम सबकी है। हम सब चिंतित हैं ये देखते हुए कि पूरा विश्व इस बारे में चर्चा कर रहा है और अच्छी तरह से बात नहीं कर रहा। सरकार को चाहिए जल्द से जल्द इस स्थिति को बचाया जाए ताकि हमारी और जगहंसाई न हो, पूरा विश्व हमारे किसानों के बारे में जिस तरह से बात कर रहा है, इस आंदोलन के बारे में जिस तरह से बात कर रहा है, देश की छवि को भारी नुकसान हो रहा है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा नेकहा कि- जो कृषि राज्यमंत्री ने कहा, वो किसानों को स्वीकार्य नहीं है, वो आपने कल देख लिया। किसानों की जो मांग है, वह बार-बार रख चुके हैं सरकार के सामनें। सरकार को चाहिए कि उनकी मांग माने।
एक और अन्य प्रश्न के उत्तर में??्री पवन खेड़ा ने कहा कि,'' ये एक ऐसा विषय है, ये एक ऐसी डिबेट है, जो निरंतर होते रहनी चाहिए। इस डिबेट से परिभाषाएं उत्पन्न होती हैं। सेंट्रिज्म की परिभाषा, हम अपने आपको बड़े गर्व से कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी एक सेंट्रिस्ट पार्टी है। सेकुलरिज्म की परिभाषा, ये तमाम परिभाषाएँ हर नई पीढ़ी के लिए इन्हीं डिबेट से निकल कर आती हैं। अगर हम किसी एक ऐसी पार्टी के विरुद्ध हैं, जो सिर्फ हिंदुओं की बात करे, पूरे देश की बात ना करे, तो हम ऐसी पार्टी के भी विरुद्ध हैं, जो सिर्फ मुसलमानों की बात करे और पूरे देश की बात ना करे।
उन्होंने कहा कि,''क्योंकि सेंट्रिज्म, सेकुलरिज्म और कांग्रेस पार्टी पूरे देश के हर वर्ग की बात करती है। वो जातियों में मतभेद नहीं रखती, वो धर्मों में भेद नहीं रखती, वो भाषाओं में भेद नहीं रखती और इस पीढ़ी के लिए भी ये परिभाषा फिर से बाहर आनी जरुरी है, सार्वजनिक होनी जरुरी है कि क्या परिभाषा होती है सैंट्रिज्म की। सैंट्रिज्म का मतलब ये नहीं है कि लैफ्ट को भी रिजेक्ट कर दो और राइट को भी रिजेक्ट कर दो। सैंट्रिज्म का मतलब ये है कि लैफ्ट और राइट दोनों का सम्मिश्रण हो। ना एक्सट्रिम (extreme) लैफ्ट का स्थान होता है, ना एक्सट्रिम राइट का स्थान होता है, ये होता है सैंट्रिज्म। तो उनका जो बयान है, उससे इस परिभाषा पर डिबेट होना बहुत आवश्यक है।
8 तारीख को किसानों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री पवन खेड़ा ने कहा कि,'' 8 तारीख का बंद सफल होगा। कई लोग, आप उस दिन संसद में अगर पूरी प्रक्रिया फॉलो करते तो तथाकथित जो एनडीए के पार्टनर हैं, वो भी खुल कर बाहर आते। जरुरत नहीं है, सबको आना ही पड़ेगा। किसान को आप कैसे इग्नोर कर देंगे, किसान की मांगों को आप कैसे दरकिनार कर देंगे। आपको उन्हीं के पास जाना है, बार-बार जाना है।