नई दिल्ली: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ हाड़ कंपा देने वाली ठंड में प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन का आज 23वां दिन है| कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मध्य प्रदेश के रायसेन में किसान कल्याण कार्यक्रम को संबोधित किया| उन्होंने कहा,'अचानक भ्रम और झूठ का जाल बिछाकर अपनी राजनीतिक जमीन जोतने के खेल खेले जा रहे हैं। किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वार किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा,' बीते कई दिनों से देश में किसानों के लिए जो नए कानून बने, उनकी बहुत चर्चा है। ये कृषि सुधार, कानून रातों-रात नहीं आए। पिछले 20-22 साल से हर सरकार ने इस पर व्यापक चर्चा की है। कम-अधिक सभी संगठनों ने इन पर विमर्श किया है|
प्रधानमंत्री ने कहा,'बीते समय में ओले गिरने से मध्य प्रदेश के किसानों का नुकसान हुआ है। आज इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के ऐसे 35 लाख किसानों के बैंक खातों में 1600 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं| उन्होंने कहा,''तेजी से बदलते हुए वैश्विक परिदृष्य में भारत का किसान, सुविधाओं के अभाव में, आधुनिक तौर तरीकों के अभाव में असहाय होता जाए, ये स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। पहले ही बहुत देर हो चुकी है। जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वो आज करने की नौबत आई है|
प्रधानमंत्री ने कहा,'किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो पहले अपने घोषणापत्रों में इन सुधारों की बात लिखते थे, बड़ी-बड़ी बातें करके किसानों के वोट बटोरते रहे। लेकिन अपने घोषणा पत्र में लिखे वादों को भी पूरा नहीं किया। सिर्फ इन मांगों को टालते रहे क्योंकि किसान उनकी प्राथमिकता नहीं था|उनको(राजनीतिक दलों) पीड़ा इस बात से नहीं है कि कृषि कानूनों में सुधार क्यों हुआ। उनको तकलीफ इस बात से है कि जो काम हम कहते थे लेकिन कर नहीं पाते थे वो मोदी ने कैसे किया, मोदी को इसका क्रेडिट कैसे मिल जाए|
प्रधानमंत्री ने कहा,''सरकार बार-बार पूछ रही है कि आपको कानून में किस धारा में क्या दिक्कत है, तो इन राजनीतिक दलों के पास कोई ठोस जवाब नहीं होता। जिनकी खुद की राजनीतिक जमीन खिसक गई है वो किसानों की जमीन चली जाएगी का डर दिखाकर अपनी राजनीतिक जमीन खोज रहे हैं|किसानों की बातें करने वाले लोग कितने निर्दयी हैं इसका बहुत बड़ा सबूत है स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट। रिपोर्ट आई, लेकिन ये लोग स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को आठ साल तक दबाकर बैठे रहे। इन लोगों ने ये सुनिश्चित किया कि इनकी सरकार को किसान पर ज़्यादा खर्च न करना पड़े|हमने फाइलों के ढेर में फेंक दी गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को बाहर निकाला और उसकी सिफारिशें लागू कीं, किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP दिया|
उन्होंने कहा,''अगर हमें MSP हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते? हमारी सरकार MSP को लेकर इतनी गंभीर है कि हर बार, बुवाई से पहले MSP की घोषणा करती है|नए कानून के बाद एक भी मंडी बंद नहीं हुई है। फिर क्यों ये झूठ फैलाया जा रहा है? सच्चाई तो ये है कि हमारी सरकार APMC को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज़्यादा खर्च कर रही है|
प्रधानमंत्री ने कहा,''ये कानून लागू हुए 6-7 महीने से ज्यादा हो रहे हैं। लेकिन अब अचानक भ्रम और झूठ का जाल बिछाकर, अपनी राजनीतिक जमीन जोतने के खेल खेले जा रहे हैं। किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वार किए जा रहे हैं|जिनकी खुद की राजनीतिक जमीन खिस गई है, वो किसानों की जमीन चली जाएगी, किसानों की जमीन चली जाएगी का डर दिखाकर, अपनी राजनीतिक जमीन खोज रहे हैं|आज जो किसानों के नाम पर आंदोलन चलाने निकले हैं, जब उनको सरकार चलाने या सरकार का हिस्सा बनने का मौका मिला था, उस समय इन लोगों ने क्या किया, ये देश को याद रखना जरूरी है|
किसान सम्मेलन में मध्य प्रदेश CM शिवराज सिंह चौहान ने कहा,' PM ने किसानों को अपनी फसल को मर्जी से बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। जहां अच्छे दाम मिले वहां बेचो ,देश में बेचो पूरे राज्यों में कहीं भी बेचो। तीनों क़ानूनों में क्या बुरा है? कांग्रेस घड़ियाली आंसू बहा रही है|