नई दिल्ली: सरकारी बैंकों के निजीकरण करने के फैसले को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका गांधी ने कहा,“बैंकों को बेचने का फैसला खतरनाक साबित होगा। बैंकों के निजीकरण का फैसला किसी भी तरह से जनहित में नहीं है, कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी। प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया और कहा कि आज भाजपा सरकार सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ, उनके चंद पूंजीपति मित्र एक के बाद एक फ्रॉड करके बैंकों को लूट रहे हैं। पिछले आठ साल में लगभग छह लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड सामने आ चुका है।
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि “'क्या आपको तीर्थराजी देवी याद हैं? उत्तर प्रदेश के कुशीनगर की एक बुजुर्ग मजदूर थीं। तीर्थराजी ने मजदूरी करके हजार-हजार के दो नोट जुटाए थे। यह उनकी कुल जमा-पूंजी थी। जब अचानक नोटबंदी हुई तो तीर्थराजी बैंक गईं। दरवाजे पर ताला लगा था। तीर्थराजी सामने की सीढ़ियों पर बैठ गईं। किसी राहगीर ने उनसे पूछा कि वे वहां क्यों बैठी हैं? उन्होंने अपने आंचल में बंधा पैसा दिखाया कि इसे जमा कराना है। उस व्यक्ति ने कहा, ये नोट अब नहीं चलेंगे। घर जाओ। इतना सुनने के बाद तीर्थराजी वहीं लुढ़क गईं और उनकी मौत हो गई।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि, “'तीर्थराजी को इतना सदमा क्यों लगा कि उनकी मौत हो गई? क्योंकि भाजपा सरकार के एक विध्वंसक फैसले ने उनका भरोसा तोड़ दिया था। उनकी पूरी उम्र इस भरोसे के साथ गुजरी थी कि उनके पास बचत के जो भी चार पैसे हैं वे सरकारी बैंक में वे सुरक्षित रहेंगे। इस देश के हर गरीब को यह भरोसा दिलाने में कई दशक लगे थे।
प्रियंका गांधी ने कहा कि, “'आज भाजपा सरकार सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ, उनके चंद पूंजीपति मित्र एक के बाद एक फ्रॉड करके बैंकों को लूट रहे हैं। पिछले आठ साल में लगभग छह लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड सामने आ चुका है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि, “'हमारे देश के बैंक सिर्फ वित्तीय संस्थान नहीं हैं, वे सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम भी हैं। बैंकों को बेचने का फैसला खतरनाक साबित होगा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने 1969 में आज ही के दिन 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था।
इंदिरा जी का विचार था कि बैंकिंग प्रणाली का फायदा हमारी ग्रामीण आबादी और वंचित तबकों को मिलना चाहिए। राष्ट्रीयकरण के बाद भारत के ग्रामीण इलाकों तक बैंकों की शाखाएं खुलीं। किसानों को कर्ज मिलना शुरू हुआ। कृषि क्षेत्र में निवेश होने लगा। गरीबों को योजनाओं का लाभ मिलने लगा। करोड़ों लोगों को नौकरियों के माध्यम से एक सुरक्षित जिंदगी मिली। बैंकों के निजीकरण का फैसला यह सब समाप्त कर देगा।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि, “'बैंकों के निजीकरण का फैसला किसी भी तरह से जनहित में नहीं है, कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा,‘‘आज ही के दिन, 53 साल पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था। यह परिवर्तनकारी बदलाव था। मोदी सरकार ‘भारत बेचे जाओ परियोजना’ के तहत सरकारी बैंकों का भी निजीकरण करना चाहती है।’’उन्होंने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को चुनिंदा लोगों को बेचना विनाशकारी होगा। कांग्रेस बैंकों को बेचे जाने संबंधी विधेयक का विरोध करेगी।’’
आपको बता दें कि, आज 19 जुलाई है, आज का दिन महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि आज ही के दिन 1969 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के 14 बैंकों के राष्ट्रीयकरण का ऐलान किया था। इस कदम से देश की अर्थव्यवस्था को पंख लगे और वित्तीय समावेश को बढ़ावा मिला जिसके चलते भारत एक उभरती हुई मजबूत अर्थव्यवस्था बन सका।