नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के तीन सदस्यीय पैनल से मुलाकात की। इसका गठन 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य इकाई में चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए किया गया है। पैनल का नेतृत्व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे हैं और इसके सदस्य हरीश रावत और जेपी अग्रवाल हैं। बैठक संसद में LoP मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई।
बैठक पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा,' कैप्टन अमरिंदर सिंह कमेटी के सामने आए और उन्होंने जो जानकारी दी उनका सीधा संबंध समाज के कमजोर तबकों से है। उन्होंने बिजली में रियायत देने की बात कही है, वर्षों से अस्थाई लोगों को नियमित करने की बात कही है|
हरीश रावत ने कहा,''उन्होंने सफाईकर्मियों को नियमित करने के आदेश देने की बात कही। दलितों, भूमिहीनों और गरीबों के कर्ज माफ करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं की स्कॉलरशिप बांटना प्रारंभ कर दिया गया है और शिक्षण संस्थाओं को कह दिया गया है कि सुनिश्चित करेंगे कि उन तक पहुंचे|
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि सभी ने एक स्वर में कहा कि वे एक साथ चुनाव लड़ेंगे। खड़गे ने कहा, 'समिति के सदस्यों ने पहले भी बैठक की और सभी से चर्चा की। हम आगामी चुनावों की तैयारी कर रहे हैं। आलाकमान हमारे नेताओं के सभी मुद्दों और शिकायतों को हल करने का प्रयास करेगा। सब कुछ ठीक हो जाएगा। हम सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे।'
पंजाब मामलों पर कांग्रेस पैनल के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,''सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हम (विधानसभा) चुनाव सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ेंगे। सभी ने इच्छा जताई है कि कि वे एक साथ चुनाव लड़ेंगे|उन्होंने कहा, 'पार्टी में सभी ने एक स्वर में कहा कि वे एक साथ चुनाव लड़ेंगे और पंजाब में फिर से सरकार बनाएंगे। अगर किसी को किसी भी तरह की समस्या है, तो आलाकमान उसका समाधान निकालने की कोशिश करेगा।'
सूत्रों से सामने आया कि कमेटी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह से असंतुष्ट विधायकों के काम में तेजी लाने को कहा और कहा कि चुनाव से पहले विधायकों को संतुष्ट रखना जरूरी है। उन नेताओं को मनाने की कोशिश की जाएगी। ये भी सामने आया है कि कमेटी और राहुल गांधी दोनों नवजोत सिंह सिद्धू के 'दो परिवार पंजाब में फायदा उठा रहे' (SAD) वाले बयान से खुश नहीं हैं। समिति और आलाकमान का मानना है कि उन्हें सार्वजनिक बयान नहीं देना चाहिए था।