●देश की 40% से ज्यादा संपत्ति पर 1% अमीरों का कब्जा है-ऑक्सफैम की रिपोर्ट
●50% आबादी के पास सिर्फ 3% संपत्ति है- रिपोर्ट
●हिंदुस्तान जैसे यंग देश में गरीबी और अमीरी के बीच बढ़ता फासला खतरनाक स्थिति पैदा कर रहा है- कांग्रेस
नई दिल्ली: भारत में अमीर और गरीब के बीच की 'खाई और बढ़' गई है| भारत की कुल संपत्ति के 40 फीसदी से अधिक हिस्से पर देश के महज एक फीसदी सबसे दौलतमंद लोगों का कब्जा है, जबकि 50 फीसदी आबादी के पास देश कुल संपत्ति का सिर्फ तीन फीसदी हिस्सा ही है| ऑक्सफैम की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है|
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर नवंबर 2022 के दौरान देश के अरबपतियों की दौलत में 121 फीसदी का इजाफा हुआ है| रियल टर्म्स में देखें तो उनकी संपत्ति हर दिन 3,608 करोड़ रुपये बढ़ी है| ऑक्सफैम के मुताबिक देश में कुल अरबपतियों की संख्या 2020 में 102 थी, जो 2022 में डेढ़ गुने से ज्यादा बढ़कर 166 हो चुकी है|
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 100 सबसे रईस लोगों की कुल दौलत बढ़कर 660 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 54.12 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है| यह रकम भारत सरकार के पूरे बजट को डेढ़ साल से ज्यादा वक्त तक फंड करने के लिए काफी है|
ऑक्सफैम के मुताबिक देश में रईसों की संख्या और उनकी दौलत में इजाफा होने के बावजूद टैक्स में उनका योगदान बेहद कम है| रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 के दौरान गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के जरिए जुटाए गए 14.83 लाख करोड़ रुपये में देश के 10 फीसदी सबसे अमीर लोगों का योगदान महज 3 फीसदी रहा, जबकि इसमें करीब 64 फीसदी योगदान उन लोगों ने किया, जो आर्थिक हैसियत के लिहाज से देश के सबसे कमजोर 50 फीसदी तबके में आते हैं|
ऑक्सफैम की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने कहा,''भारत जैसे युवा देश में गरीब और अमीर के बीच बढ़ती खाई खतरनाक स्थिति पैदा कर रही है। कांग्रेस ने कहा-ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 40% से ज्यादा संपत्ति पर 1% अमीरों का कब्जा है। वहीं, 50% आबादी के पास सिर्फ 3% संपत्ति है। हिंदुस्तान जैसे यंग देश में गरीबी और अमीरी के बीच बढ़ता फासला खतरनाक स्थिति पैदा कर रहा है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''देश की 1% आबादी के पास 40% और 50% आबादी के पास पूरे देश की मात्र 3% दौलत है
यह 50% लोग GST का 64% टैक्स अदा करते हैं और सबसे अमीर 10% GST कलेक्शन का केवल 3% देते हैं
पहले अमीरों और ग़रीबों की खाई को बढ़ाओ, फिर ग़रीबों को टैक्स तले रौंदो - मोदी मॉडल
आपको बता दें कि, रिपोर्ट में कहा गया है कि ,अरबपति गौतम अडानी पर साल 2017 से 2021 के बीच के लाभ पर टैक्स लगाकर 1.79 लाख करोड़ रुपए जुटाया जा सकता है| जो एक वर्ष के लिए 50 लाख से अधिक भारतीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को रोजगार देने के लिए पर्याप्त है| अगर भारत के अरबपतियों पर उनकी पूरी संपत्ति पर 2 प्रतिशत की दर से एक बार टैक्स लगाया जाता है, तो यह देश में अगले तीन वर्षों के लिए कुपोषण से पीड़ित बच्चों के पोषण के लिए 40,423 करोड़ रुपए जुटाया जा सकता है|
ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा, “देश में हाशिये पर मौजूद दलितों, आदिवासियों, मुस्लिमों, महिलाओं और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को लगातार एक ऐसे सिस्टम की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो सबसे अमीर लोगों के पक्ष में झुका हुआ है. गरीब लोग अपनी आमदनी की तुलना में कहीं ज्यादा टैक्स चुका रहे हैं और अमीरों की तुलना में उन्हें जरूरी चीजों और सेवाओं पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है| अब समय आ गया है कि अमीरों पर इस तरह से टैक्स लगाया जाए, जिससे वे कुल टैक्स में अपने वाजिब हिस्से का भुगतान करें|”