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25 अगस्त 2026

सागर राणा हत्याकांड: आरोपी पहलवान सुशील कुमार का आर्म्स लाइसेंस निलंबित

नई दिल्ली: 23 वर्षीय सागर राणा की हत्या के मामले में गिरफ्तार पहलवान सुशील कुमार के आर्म्स लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस की लाइसेंस विभाग ने रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है|बता…

सागर राणा हत्याकांड: आरोपी पहलवान सुशील कुमार का आर्म्स लाइसेंस निलंबित
सागर राणा हत्याकांड: आरोपी पहलवान सुशील कुमार का आर्म्स लाइसेंस निलंबित | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: 23 वर्षीय सागर राणा की हत्या के मामले में गिरफ्तार पहलवान सुशील कुमार के आर्म्स लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस की लाइसेंस विभाग ने रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है|





बता दें कि,''शनिवार 29 मई को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने छत्रसाल स्टेडियम में हुई 23 वर्षीय पहलवान सागर राणा की हत्या के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी ओलंपिक पदक विजेता अंतर्राष्ट्रीय पहलवान सुशील कुमार और उसके साथी अजय बक्करवाला की पुलिस रिमांड अवधि चार दिन और बढ़ा दी है।



सुशील और अजय की छह दिन की रिमांड खत्म होने के बाद आज इन दोनों को अदालत में पेश किया गया था। पुलिस ने इस हत्याकांड से जुड़े कई जरूरी पहलुओं की जांच के लिए और सात दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने सिर्फ चार दिन की ही रिमांड मंजूर की है। पुलिस ने कहा कि सुशील कुमार से और भी पूछताछ की जानी है। इस हत्याकांड में अब तक सुशील कुमार समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।




हत्या के मामले में मुख्य संदिग्ध 38 वर्षीय पहलवान सुशील कुमार और उसके सहयोगी अजय बक्करवाला को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम ने 23 मई को दिल्ली के मुंडका इलाके से गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपी चार मई को देर रात हुई घटना के बाद से फरार थे। पहलवान सुशील पर पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जबकि अजय पर 50 हजार का इनाम था। गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने सुशील को रोहिणी कोर्ट में पेशकर 12 दिन की रिमांड मांगी थी लेकिन मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा ने सिर्फ छह दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की थी।



अदालत की कार्यवाही के दौरान सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने कहा था कि सुशील से पुलिस हिरासत पूछताछ यह जानने के लिए जरूरी है कि इस हत्याकांड के पीछे का पूरा षड्यंत्र और उद्देश्य क्या था। 



गौरतलब है कि दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में चार मई की रात दिल्ली के मॉडल टाउन थाने के इलाके में पहलवान सुशील और उसके साथियों ने कथित तौर पर एक फ्लैट से सागर राणा और उसके दोस्तों का अपहरण कर लिया था और फिर छत्रसाल स्टेडियम में ले जाकर उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। इसमें सागर बुरी तरह घायल हो गया था और इलाज के दौरान सागर की मौत हो गई थी। सुशील फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच छत्रसाल स्टेडियम में हुए विवाद से संबंधित मामले की जांच कर रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने गत 18  मई को रोहिणी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उनकी यह याचिका खारिज कर दी थी।




वारदात के बाद पुलिस को स्टेडियम का एक सीसीटीवी फुटेज भी हाथ लगा था। सीसीटीवी फुटेज में सुशील 20-25 पहलवानों और असौदा गिरोह के बदमाशों के साथ सागर और दो अन्य को पीटता दिख रहा है। वीडियो में सभी लोग सागर को लात-घूंसों, डंडों, बैट व हॉकी से मारते दिख रहे हैं। फुटेज में सुशील सागर व दो अन्य पीड़ितों पर हॉकी चलाता भी दिखा है। सभी पहलवान और बदमाश स्टेडियम के सीसीटीवी कैमरे में कैद हैं।



सुशील देश के लिए लगातार दो ओलंपिक पदक जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। सुशील ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल और 2012 के लंदन ओलंपिक में सिलवर मेडल जीता था। वह 2010 में विश्व चैंपियन भी रहे हैं। राष्ट्रमंडल खेल 2010, 2014 और 2018 में उन्होंने लगातार तीन गोल्ड मेडल जीते हैं। 




सुशील कुमार मामले में मीडिया ट्रायल रोकने वाली याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवान सुशील कुमार मामले में मीडिया ट्रायल और रिपोर्टिंग को रोकने का आदेश देने की अपील करने वाली एक जनहित याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता श्रीकांत प्रसाद ने निचली अदालत के फैसले से पहले ही आरोपी सुशील कुमार को दोषी घोषित करने से मीडिया को रोकने की अपील की थी।



याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि इस मामले में आरोपी की निजता के अधिकार का हनन कर मीडिया को प्रत्येक सूचना पहुंचाने वाले लोगों को सामने लाने के लिए एक हाई लेवल कमेटी गठित की जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोपी के करियर को समाप्त करने के इरादे से मीडिया को प्रत्येक सूचनाएं पहुंचाई जा रही हैं।



इस मामले में चीफ जस्टिस डी.एन. पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने कहा कि हमें इस याचिका पर सुनवाई का कोई कारण नहीं दिखता, अगर कोई पक्ष व्यथित है तो वह अदालत जाकर अपनी समस्याएं उठा सकता है। इस मामले को जनहित याचिका में नहीं उठाया जा सकता। 





tvlnews

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