नई दिल्ली:छत्रसाल स्टेडियम में 23 वर्षीय सागर राणा हत्या मामले में दिल्ली पुलिस के रिमांड में भेजे गए पहलवान सुशील कुमार की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं| 23 वर्षीय सागर राणा हत्या मामले में आरोपी पहलवान सुशील कुमार को उत्तर रेलवे ने सस्पेंड कर दिया है| उत्तर रेलवे के CPRO दीपक कुमार ने बताया कि,''सुशील कुमार को उत्तर रेलवे की नौकरी से निलंबित कर दिया गया है क्योंकि उनके खिलाफ आपराधिक मामले की जांच चल रही है|
23 मई को गिरफ्तारी के बाद सुशील कुमार को रोहिणी कोर्ट ने 6 दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया था| पहलवान सुशील कुमार को रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस ने उसकी 12 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी| पुलिस ने कोर्ट से कहा था कि उसे सुशील कुमार का मोबाइल बरामद करना है| दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा था कि ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार गवाहों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वो काफी प्रभावशाली व्यक्ति है| तमाम अनुरोध के बावजूद सुशील कुमार सामने नहीं आया औऱ गिरफ्तारी से बचने का प्रयास करता रहा|
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि सुशील कुमार और उसके साथियों ने पीड़ितों को जानवरों की तरह मारा| हत्यारोपी सुशील कुमार और उसके साथ उस इलाके में अपना आतंक कायम करना चाहते थे|ओलंपिक में दो बार पदक जीतने वाले कुश्ती खिलाड़ी सुशील कुमार और एक अन्य व्यक्ति को छत्रसाल स्टेडियम में हुए झगड़े में एक पहलवान की कथित हत्या के सिलसिले में रविवार सुबह ही मुंडका से गिरफ्तार किया गया था|
रविवार को पहलवान सुशील कुमार को छत्रसाल स्टेडियम में सागर राणा की हत्या के आरोप में 6 दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था| दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार (38) और उनके सहयोगी अजय उर्फ सुनील (48) को मुंडका से गिरफ्तार किया गया था| सुशील पर पुलिस ने एक लाख रुपये जबकि उनके साथी अजय पर 50 हजार रुपये के इनाम रखा गया था| सुशील के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ था|
दिल्ली पुलिस ने रविवार को बताया था,'' जिस वीडियो में सागर(मृतक) को पीटा गया था, वो इसलिए बनाया गया था ताकि सुशील(आरोपी) का उसके सर्किट में प्रभाव बना रहे और कोई उसका विरोध न कर सके। सुशील ने प्रिंस से वीडियो बनाने को कहा था, लेकिन सागर की मौत हो गई जिसके बाद आरोपी भाग गए|
इन धाराओं के तहत केस: दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 302, 308, 365, 325, 323, 341 और 506 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की थी| साथ ही मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269, 120-बी और 34 और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया था|