नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) को निर्देश दिया कि वह COVID19 के कारण मरने वालों के परिवारों को अनुग्रह राशि का भुगतान करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करे| न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने अपने फैसले में, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को 6 सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि का पता लगाने का निर्देश दिया, जो कि COVID के कारण मरने वालों के परिवार के सदस्यों को भुगतान किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का संवैधानिक दायित्व है कि वह COVID-19 महामारी के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए मुआवजा की सिफारिश करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करें। कोर्ट ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय आपदा के पीड़ितों के लिए न्यूनतम राहत की सिफारिश करने के लिए एक वैधानिक दायित्व डालती है। इस तरह की न्यूनतम राहत में धारा 12 (iii) के अनुसार अनुग्रह राशि भी शामिल है।
● SC ने केंद्र को हर पहलू को ध्यान में रखते हुए COVID-19 पीड़ितों के परिवारों को प्रदान की जाने वाली अनुग्रह राशि तय करने का निर्देश दिया|
● SC ने केंद्र से आपदा के कारण मरने वालों के परिवार के सदस्यों के लिए वित्त आयोग द्वारा प्रस्तावित बीमा योजना तैयार करने को कहा
● SC ने NDMA को COVID-19 के कारण मरने वालों के परिजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया
●SC ने NDMA को COVID-19 से मरने वालों के परिजनों को दी जाने वाली राहत के न्यूनतम मानक के लिए छह सप्ताह के भीतर दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया
● SC ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोविड की मृत्यु के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करें
कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस तर्क को खारिज किया कि धारा 12 अनिवार्य प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि धारा 12 में 'होगा' शब्द का इस्तेमाल किया गया है और इसलिए यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रावधान अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार को मुआवजे के रूप में एक विशेष राशि का भुगतान करने का निर्देश नहीं दे सकता है। कोर्ट ने राष्ट्रीय प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह छह सप्ताह के भीतर COVID-19 पीड़ितों के परिजनों को अनुग्रह राशि प्रदान करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करें।
जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने गौरव कुमार बंसल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और रीपक कंसल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य मामलों में फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर अपनी रिट याचिकाओं में केंद्र और राज्यों को उन लोगों के परिवार के सदस्यों को 4 लाख रूपये की अनुग्रह राशि प्रदान करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी, जिन्होंने COVID-19 बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। याचिकाकर्ताओं ने COVID के कारण जान गंवाने वाले व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया के सरलीकरण के संबंध में भी राहत मांगी।
न्यायमूर्ति एमआर शाह ने फैसले में कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अनुग्रह सहायता की सिफारिश नहीं करके अपने कार्यों का निर्वहन करने में विफल रहा है। सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा कि, "राहत के न्यूनतम मानकों को निर्धारित करना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पर एक कर्तव्य है। रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है कि राष्ट्रीय प्राधिकरण ने COVID19 पीड़ितों के लिए राहत के न्यूनतम मानकों के लिए कोई दिशानिर्देश जारी किया है, जिसमें COVID के लिए अनुग्रह सहायता शामिल होगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अनुग्रह सहायता के लिए न्यूनतम राहत की सिफारिश करने में विफल होकर धारा 12 के तहत अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन करने में विफल रहा है।"
कोर्ट ने न्यायिक पुनर्विचार की शक्ति के दायरे पर चर्चा करने के बाद कहा कि वह सरकार को मुआवजे के रूप में एक विशेष राशि का भुगतान करने का निर्देश नहीं दे सकता है। सरकार की अपनी प्राथमिकताएं हैं और विभिन्न जरूरतों और क्षेत्रों को पूरा करना है, जैसे कि सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल, महामारी से प्रभावित प्रवासियों का कल्याण और सरकार को अर्थव्यवस्था पर महामारी के प्रभाव से भी निपटना है। कोर्ट ने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि अनुग्रह सहायता से सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ेगा। इसलिए मामले को राष्ट्रीय प्राधिकरण के विवेक पर छोड़ दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि अनुग्रह सहायता के रूप में कितनी राशि दी जानी है, यह राष्ट्रीय प्राधिकरण के विवेक पर छोड़ दिया गया है। वे अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए राशि तय करने पर विचार कर सकते हैं। वे आवश्यकता, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के तहत फंड की उपलब्धता और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद् द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं, राहत के न्यूनतम मानकों के लिए किए गए फंड आदि पर भी विचार कर सकते हैं। उपरोक्त निर्देशों को 6 सप्ताह की अवधि के भीतर समायोजित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मौत का सही कारण यानी COVID 19 के कारण मृत्यु का कारण बताते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र / आधिकारिक दस्तावेज जारी करने के लिए सरल दिशानिर्देश तैयार किए जाएं। केंद्र सरकार ने केंद्र और राज्य सरकारों की आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए COVID19 पीड़ितों के लिए 4 लाख रुपये मुआवजे की याचिका का विरोध किया।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि, "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य है कि सरकारों के संसाधनों की सीमाएं हैं और अनुग्रह राशि के माध्यम से किसी भी अतिरिक्त बोझ से अन्य स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध धन कम हो जाएगा।" केंद्र ने यह स्वीकार किया कि प्रभावित परिवारों को सहायता की आवश्यकता है। गृह मंत्रालय ने कहा कि यह कहना गलत है कि सहायता केवल अनुग्रह सहायता के माध्यम से प्रदान की जा सकती है क्योंकि यह एक संकीर्ण दृष्टिकोण होगा। गृह मंत्रालय के अनुसार प्रभावित समुदायों के लिए स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुधार को लेकर अधिक विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और टिकाऊ दृष्टिकोण होगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसबी उपाध्याय ने तर्क दिया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 के तहत केंद्र पर COVID-19 महामारी के पीड़ितों के लिए राहत को अधिसूचित करने का दायित्व बनता, जिसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया है। वकील ने तर्क दिया कि वित्तीय बाधाओं को वैधानिक दायित्व नहीं निभाने के आधार के रूप में उद्धृत नहीं किया जा सकता है।