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24 अगस्त 2026

SC ने रामदेव से COVID-19 के एलोपैथी उपचार पर उनके बयानों का मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव से कहा कि वह कोविड-19 महामारी के दौरान एलोपैथिक दवाओं के इस्तेमाल पर अपने बयान का मूल रिकॉर्ड पेश करें। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदे…

SC ने रामदेव से COVID-19 के एलोपैथी उपचार पर उनके बयानों का मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा
SC ने रामदेव से COVID-19 के एलोपैथी उपचार पर उनके बयानों का मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव से कहा कि वह कोविड-19 महामारी के दौरान एलोपैथिक दवाओं के इस्तेमाल पर अपने बयान का मूल रिकॉर्ड पेश करें। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव को कोविड महामारी के दौरान COVID-19 के एलोपैथी इलाज पर उनके बयानों का वीडियो और टेप को पेश करने को कहा। 



सुप्रीम कोर्ट 5 जुलाई को योग गुरु रामदेव की याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें COVID19 के एलोपैथी उपचार की प्रभावकारिता पर रामदेव की कथित टिप्पणी को लेकर विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और दिल्ली में मामलों को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।



इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की शिकायतों के आधार पर उत्तराखंड समेत कई अन्य राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई है। सुनवाई के दौरान  कोर्ट ने रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से उनके द्वारा दिए गए सटीक बयानों के बारे में पूछा।




सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, "आपने पूरी बात नहीं रखी, उन्होंने क्या कहा। आपने जो मूल बात कही है वह क्या है?" इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता रोहतगी ने बयानों का वीडियो और कॉपी पेश करने को कहा। पीठ ने तदनुसार सुनवाई अगले सोमवार पांच जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।


बुधवार को मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ रामदेव द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें उनकी कथित टिप्पणी एलोपैथी COVID-19 का इलाज नहीं कर सकती, पर विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर को एक ही स्थान पर समेकित करने की मांग की गई है।सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु रामदेव की याचिका पर सुनवाई 5 जुलाई को तय की 




इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रामदेव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों से COVID-19 नियंत्रण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि उनके द्वारा प्रभाव की स्थिति में फैलाई गई गलत सूचना लोगों को महामारी के खिलाफ उचित उपचार का लाभ उठाने से रोक सकती है।



अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका में रामदेव ने एफआइआर को एक ही जगह पर समेकित करने और उन्हें दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है। अंतरिम राहत के तौर पर उन्होंने एफआईआर में जांच पर रोक लगाने की भी मांग की है। एफआईआर में धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से घोषित आदेश की अवज्ञा), 269 (जीवन के लिए खतरनाक बीमारी का संक्रमण फैलने की लापरवाही से कार्य करना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 सहित अन्य प्रावधानों के तहत अपराधों का उल्लेख है।



tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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