नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई शुरू की। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह स्थगन की मांग वाली याचिका स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि मामले में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई सोमवार 5 सितंबर को है।
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने याचिकाओं पर राज्य को नोटिस जारी किया और उन्हें पांच सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। पीठ ने मामले में स्थगन का अनुरोध करने वाले कुछ याचिकाकर्ताओं की मांग पर अप्रसन्नता जाहिर की और कहा कि वह इस तरह की अनुमति नहीं देगी।
ये याचिकाएं कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा पारित 15 मार्च के फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं, जिसमें सरकारी आदेश दिनांक 05.02.2022 को बरकरार रखा गया है, जिसने याचिकाकर्ताओं और ऐसी अन्य महिला मुस्लिम छात्रों को अपने प्री यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हेडस्कार्फ़ पहनने से प्रतिबंधित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में धार्मिक संस्थानों में हेडस्कार्फ़ पहनने पर प्रतिबंध (Hijab Ban) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में नोटिस जारी करते हुए कहा, "फोरम शॉपिंग की अनुमति नहीं देंगे।"
सुनवाई के दौरान जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा स्थगन का एक पत्र प्रसारित किया गया है। कोर्ट ने कहा, "यह हमें मंजूर नहीं है। पहले आप तत्काल लिस्टिंग चाहते थे और जब मामला सूचीबद्ध होता है, तो आप स्थगन चाहते हैं। हम फोरम शॉपिंग की अनुमति नहीं देंगे।"कोर्ट ने कर्नाटक राज्य को नोटिस जारी किया और मामले को सुनवाई के लिए 5 सितंबर, 2022 के लिए पोस्ट किया।
गौरतलब है कि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाली उडुपी स्थित ‘गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज’ की मुस्लिम छात्राओं की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल की वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से स्वीकृत है, जिस पर छात्राएं आपत्ति नहीं उठा सकतीं।
चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की पूर्ण पीठ ने कहा था कि महिलाओं द्वारा हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। पीठ ने आगे कहा था कि शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड का प्रावधान याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।