नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की आलोचना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी के लिए 'चुनावी भाषण' बताया| शशि थरूर ने कहा,“राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ते लेकिन ऐसा लग रहा था कि भाजपा सरकार अपना अगला चुनाव अभियान उनके माध्यम से चला रही है। पूरा भाषण एक चुनावी भाषण लग रहा था। वे सरकार द्वारा किए गए हर काम की प्रशंसा करने की कोशिश कर रही थी|
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा,“वे (राष्ट्रपति मुर्मू) उन चीजों को छोड़ रही थीं जिनमें सरकार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। हम इसके लिए राष्ट्रपति को जिम्मेदार नहीं कह सकते क्योंकि भाषण मौजूदा सरकार ने लिखा था|
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“राष्ट्रपति का अभिभाषण दोहराता है कि सरकार क्या चाहती है और क्या करती है। राष्ट्रपति सरकार का बयान प्रस्तुत करते हैं। फिर भी हम राष्ट्रपति के अभिभाषण का सम्मान करते हैं। सदन में जब चर्चा होगी तब हम अपने विचार रखेंगे। सरकार के खिलाफ बहुत से मुद्दे हैं|
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,“सत्र में हमें कई मुद्दे उठाने हैं। महंगाई-बेरोजगारी के अलावा देश का जो पैसा कुछ पूंजीपतियों को देकर बर्बाद किया जा रहा है उसका मुद्दा भी हम उठाएंगे। चीन को लेकर विदेश नीति का मुद्दा जो हमने पिछली बार उठाया था उसे हम इस बार भी उठाएंगे| इसके अलावा जो विपक्ष ने सर्वदलीय दल की बैठक में बातें उठाईं हैं उसे लेकर भी सब मिलकर लड़ेंगे|
संसद के बजट सत्र से पहले सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिभाषण हुआ| अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार के 'विकास' पर जोर देने की तारीफ की, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर 'कार्रवाई' करने, विवादास्पद तीन तलाक को खत्म करने और रक्षा क्षेत्र के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इसकी सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा,“ सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर आतंकवाद पर कठोर प्रहार तक, LoC से लेकर LAC तक हर दुस्साहस के कड़े जवाब तक, Article 370 को हटाने से लेकर तीन तलाक तक, मेरी सरकार की पहचान एक निर्णायक सरकार की रही है।
अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा,“हमें 2047 तक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो अतीत के गौरव से जुड़ा हो, और जिसमें आधुनिकता का हर स्वर्णिम अध्याय हो। हमें ऐसा भारत बनाना है, जो आत्मनिर्भर हो और जो अपने मानवीय दायित्वों को पूरा करने के लिए भी समर्थ हो। ऐसा भारत - जिसमें गरीबी न हो, जिसका मध्यम वर्ग भी वैभव से युक्त हो। ऐसा भारत - जिसकी युवाशक्ति और नारीशक्ति, समाज और राष्ट्र को दिशा देने के लिए सबसे आगे खड़ी हो, जिसके युवा समय से दो कदम आगे चलते हों। ऐसा भारत - जिसकी विविधता और अधिक उज्ज्वल हो, जिसकी एकता और अधिक अटल हो।
उन्होंने कहा ,“2047 में देश जब इस सच्चाई को जीवंत करेगा तो निश्चित रूप से उस भव्य निर्माण की नींव का अवलोकन और आकलन भी करेगा। तब आज़ादी के अमृतकाल की इस प्रथम बेला को एक अलग आस्था के साथ देखा जाएगा। इसलिए आज अमृतकाल का यह समय, यह कालखंड बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।