नई दिल्ली: लोकसभा के बाद कृषि से जुड़े 2 विधेयक रविवार को राज्यसभा से भी पारित हो गए। दोनों कृषि विधेयकों को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया | प्रधानमंत्री ने कृषि विधेयकों के पारित होने को कृषि क्षेत्र के लिए 'ऐतिहासिक क्षण' करार दिया था। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने का आग्रह किया|
कृषि से जुड़े विधेयकों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द से मुलाकात की|सुखबीर सिंह बादल ने राष्ट्रपति से विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने की अपील की है। कृषि से जुड़े विधेयकों के खिलाफ नरेंद्र मोदी सरकार में पार्टी की एकमात्र मंत्री हरसिमरत कौर बादल कृषि विधेयक का विरोध जताने के लिए 17 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुकी हैं
मुलाकात के बाद उन्होंने कहा,''आज शिरोमणि अकाली दल के प्रतिनिधि-मंडल ने राष्ट्रपति जी से मुलाकात की, उन्हें प्रार्थना की है कि जो 3 बिल जबरदस्ती राज्यसभा में पास किए गए हैं, उनपर हस्ताक्षर न करें। ये बिल देश के किसानों के खिलाफ हैं| बादल ने आगे कहा कि अन्नदाता या किसानों को भूखा न रहने दें और न ही सड़कों पर न सोने दें| उन्होंने कहा कि दोनों विधेयकों का पारित होना देश के लाखों लोगों के लिए और लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन है| उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ है आम सहमति, न कि बहुसंख्यक उत्पीड़न|
बता दें कि,'संसद के मानसून सत्र में लाए गए कृषि से जुड़े विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए शिरोमणि अकाली दल कोटे से मोदी सरकार में मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया था। NDA में बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के कोटे से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया था|