नई दिल्ली: भारत में कोरोना महामारी के साथ इस वक्त सबसे ज्यादा महंगाई लोगों की परेशानी का सबब बन चुकी है। पेट्रोल और डीजल के दामों में हर रोज बढ़ोतरी हो रही हैं।| दूसरी तरफ अब पेट्रोल डीजल के बाद सरसों के तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। सरसों के तेल के बढ़ रहे दामो ने आम आदमी के घर का बजट खराब कर दिया है। सरसों के तेल के दाम एक साल के अंदर ही अपनी कीमत से दोगुने हो चुके हैं।सरसों के तेल की बढ़ रही कीमतों पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से जब सवाल किया गया तो उनका अजीबोगरीब जवाब सामने आया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बढ़ते सरसों के तेल को लेकर सफाई दी है| खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है,''सरकार ने सरसों के तेल में मिलावट बंद कर दी है, इसलिए दाम बढ़ गए| तोमर ने कहा कि ,''सरसो का तेल थोड़ा महंगा हुआ है क्योंकि उसमें सरकार ने मिलावट को बंद किया है। इसके अलावा 'किसान आंदोलन पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि ,'''भारत सरकार आज भी किसानों से बातचीत करने के लिए तैयार है। किसान कानून को रद्द करने के अतिरिक्त जो भी विकल्प लेकर आएंगे सरकार उस पर चर्चा करेगी और समाधान करेगी|
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के इस बयान की कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने निंदा की है| उन्होंने कहा,''हम कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बयान की निंदा करते हैं| श्रीनेत ने कहा,''मैं कृषि मंत्री की बर्खास्तगी की मांग करती हूँ क्योंकि कृषि प्रधान देश में किसानों का अपमान करने वालों का इस सरकार में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है|
पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी का बेहद शर्मनाक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह तीन काले कृषि विरोधी कानूनों को छोड़कर किसानों से बात करने के लिए तैयार हैं; मैंने आज तक अपने जीवन में ऐसा बेतुका बयान नहीं सुना| उन्होंने कहा,''इस भीषण गर्मी में, कड़कड़ाती ठंड, बारिश, आंधी में हमारा किसान सड़कों पर बैठा है और वह अपनी मर्ज़ी से नहीं बैठा है; तोमर जी अगर किसान अपने खिलाफ बनाए गए कानूनों के बारे में आपसे बात या विरोध नहीं करेगा तो क्या करेगा?
प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि वह किसानों से बस एक फोन की दूरी पर हैं लेकिन 22 जनवरी के बाद से उन्होंने किसानों से कोई मीटिंग या बातचीत तक नहीं की है; ऐसा क्यों है?....मैं प्रधानमंत्री जी से यह पूछना चाहती हूँ कि क्या आप तोमर जी की इस बेतुकी बात का समर्थन करते हैं? क्या आप उन पर डांट-डपट लगायेंगे कि दंभ और अहंकार में चूर होकर वह देश के अन्नदाता के बारे में इस तरह बात न करें |
उन्होंने कहा,'''इस देश की आत्मा यानी 'हमारे किसान' इन काले कानूनों के खिलाफ हैं; 600 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है; लेकिन अभी भी इस सरकार का दंभ और अहंकार टूटा नहीं है| - किसान अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं; वह अपनी मर्जी से बॉर्डर पर नहीं बैठे हैं| - आपने ही उनके रास्ते में कंटीले तार और नुकीली कीलें गड़वा दी, इसलिए वो मजबूर हैं|
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'' इस सरकार से हमारे वाजिब सवाल:
- क्या आपको देश के 62 करोड़ अन्नदाता नजर नहीं आते?
- क्या पूंजीपतियों के साथ आपका गठजोड़ इतना मजबूत है कि आपको धरने पर बैठे हुए धरतीपुत्र दिखाई नहीं देते, जो आपके घर से कुछ ही दूरी पर हैं| सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''सरकार की कुरीतियों और नाकाम नीतियों की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं; खाद व कीटनाशक दवाइयों के दाम बढ़े हैं और इन सबके चलते ₹15000 प्रति हेक्टेयर खेती करने की जो लागत आती है, वह बढ़ गई है |
उन्होंने कहा,''हम कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी के बयान की निंदा करते हैं; मैं पुन: इस मंच से कृषि मंत्री की बर्खास्तगी की मांग करती हूँ क्योंकि कृषि प्रधान देश में किसानों का अपमान करने वालों का इस सरकार में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है| सार्वजनिक जीवन में यह असंवेदनशीलता का बहुत ही निम्न दर्जे का उदाहरण है, जो पहले कभी नहीं देखा गया|
वहीँ कृषि मंत्री तोमर के बयान पर अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धावले ने कहा,''केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि 3 कानूनों के सिवा किसानों के सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा की तरफ से इसकी कड़ी निंदा करते हैं। कृषि कानून जब तक रद्द नहीं होंगे,आंदोलन खत्म नहीं होगा|