नई दिल्ली: कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर एक कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने कहा ‘‘हमारे देश में कल तक क़रीब 8 लाख लोगों को टीका लग गया, उनमें गिनती के लोगों को साइड इफेक्ट हुए हैं जो साधारण तौर पर सामान्य वैक्सीन में होते हैं| हर्षवर्धन ने कहा ‘‘दुर्भाग्य की बात है कि देश में कुछ लोग जानबूझकर केवल राजनीतिक कारणों से वैक्सीनेशन के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं। इससे समाज के एक छोटे वर्ग में वैक्सीन को लेकर झिझक पैदा हुई है|
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने कहा,''सरकार चाहती है कि जिन लोगों के मन में दुष्प्रचार के कारण गलतफहमी हुई है, उनको भी वैक्सीन नहीं लेने के कारण कोई नुकसान नहीं होना चाहिए|
वही खबर है कि,'' प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और सांसद तक दूसरे चरण में कोरोना टीके का डोज ले सकते हैं। अभी कोरोना टीकाकरण का पहला चरण चल रहा है जो कि आगामी अप्रैल तक समाप्त होगा। दूसरे चरण में देश के उन 75 फीसदी सांसद, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को टीका दिया जाएगा जिनकी आयु 50 या उससे अधिक है। इनमें से जिन जन प्रतिनिधियों में जीवनशैली से जुड़े रोग उच्च रक्तचाप या फिर मधुमेह इत्यादि रोग अनियंत्रित स्थिति में होंगे उन्हें सबसे पहले प्राथमिकता दी जाएगी। पीआरएस विधायी अनुसंधान के अनुसार, लोकसभा में 343 और राज्य सभा में 200 सांसद की आयु 50 या उससे अधिक है। ठीक इसी तरह मोदी सरकार की कैबिनेट में 95 फीसदी मंत्री टीकाकरण में शामिल हो सकते हैं।
टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू होते ही लोकसभा से लेकर विधानसभा क्षेत्र तक में विशेष अभियान संचालित किए जा सकते हैं जिनकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के मुख्य प्रतिनिधि पर होगी। जानकारी यह भी है कि सांसद और विधायक अपने अपने कार्यक्षेत्र में जनता के बीच पहुंचकर टीकाकरण में शामिल हो सकते हैं।
टीकाकरण की योजना से जुड़े स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि अलग-अलग चरणों की नीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पहले चरण में किसी भी प्रतिनिधि को टीका नहीं दिया जा सकता है। इसे लेकर पहले ही काफी विचार विमर्श किया जा चुका है जिसके बाद ही यह फैसला लिया गया है। ऐसे में अगर पहले चरण के दौरान पीएम या सीएम के टीका नहीं लेने पर कोई सवाल करता है तो वह निराधार है।