नई दिल्ली: नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने कहा ,“नोटबंदी के दौरान बैंक की कतारों में हजारों लोग मर गए, ज़िम्मेदार कौन? | संजय राउत ने कहा ,“यह एक तरह से आर्थिक आतंकवाद था जो देश में लाया गया।बता दें,' सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपए की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया। पीठ ने बहुमत से लिए गए फैसले में कहा कि नोटबंदी की निर्णय प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं थी। हालांकि न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने सरकार के फैसले पर कई सवाल उठाए था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सांसद संजय राउत ने पूछा ,“नोटबंदी के दौरान बैंक की कतार में हजारों लोग मारे गए,उनका ज़िम्मेदार कौन? | उन्होंने कहा,“ यह एक तरह से आर्थिक आतंकवाद था जो देश में लाया गया। साथ ही संजय राउत ने कहा ,“हम न्यायमूर्ति नागरथना से सहमत हैं जिन्होंने इसको अवैध करार दिया। लेकिन फिर भी हम न्यायालय को नमस्कार करते हैं|
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले को सही ठहराया| सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार के 2016 के नोटबंदी के फैसले को 4-1 के बहुमत से बरकरार रखा, जिसमें ₹500 और ₹1,000 के मूल्यवर्ग के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे| कोर्ट ने कहा- केंद्र की निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई खामी नहीं थी|
नोटबंदी पर जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की राय अलग थी। जस्टिस ने कहा था कि 'नोटबंदी गैरकानूनी थी| आरबीआई अधिनियम में केंद्र सरकार द्वारा विमुद्रीकरण की शुरुआत की परिकल्पना नहीं की गई है। उन्होंने कहा था कि 500 और 1000 रुपए की श्रृंखला के नोट कानून बनाकर ही रद्द किए जा सकते थे, अधिसूचना के जरिए नहीं।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘संसद में नोटबंदी कानून लाने को लेकर चर्चा होनी चाहिए थी। इसे गजट अधिसूचना के जरिए नहीं किया जाना चाहिए था। देश के लिए इतने महत्वपूर्ण मामले में संसद को अलग नहीं रखा जा सकता।'' उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक ने इस मामले में स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया, उससे सिर्फ राय मांगी गई जिसे केंद्रीय बैंक की सिफारिश नहीं कहा जा सकता।