नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बैठक की। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि,''आज कैबिनेट ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में 6000 करोड़ रुपये के निवेश का निर्णय लिया है| जावड़ेकर ने बताया कि'टेलीकॉम सेक्टर में 2480 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आ रहा है, उसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है |
इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार की सलाह से जमाकर्ताओं के हित की रक्षा के लिए 17.11.2020 को एलवीबी पर 30 दिन की अवधि के लिए मोरेटोरियम लगा दिया था और उसके निदेशक मंडल के ऊपर एक प्रशासक की नियुक्ति कर दी थी।
जनता और हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक ने विलय की यह योजना तैयार की और उसे सरकार की मंजूरी के लिए पेश किया था। यह कार्य मोरेटोरियम की अवधि के समाप्त होने से काफी पहले कर लिया गया ताकि लागू मोरेटोरियम के कारण अपने धन की निकासी नहीं कर पाने की जमाकर्ताओं की परेशानी को कम किया जा सके। इस योजना के मंजूर हो जाने के बाद एलवीबी का एक उचित तिथि पर डीबीआईएल के साथ विलय हो जाएगा और तब जमाकर्ताओं पर अपना धन निकालने को लेकर किसी भी तरह की रोक नहीं रहेगी।
डीबीआईएल एक बैंकिंग कंपनी है जिसे आरबीआई का लाइसेंस प्राप्त है और जो पूर्ण स्वामित्व वाले सहायक मॉडल पर भारत में परिचालन करती है। डीबीआईएल की सुदृढ़ बैलेंस शीट (तुलन पत्र) है, उसके पास पर्याप्त पूंजी है और डीबीएस से सम्बद्ध होने के कारण वह अतिरिक्त लाभ की स्थिति में भी है। डीबीएस एशिया का एक प्रमुख वित्तीय सेवा ग्रुप है जिसकी 18 बाजारों में उपस्थिति है और जिसका मुख्यालय सिंगापुर में है। वह सिंगापुर के शेयर बाजार में लिस्टिड भी है। विलय के बाद भी डीबीआईएल का संयुक्त बैलेंस शीट सुदृढ़ रहेगा और इसकी शाखाओं की संख्या बढ़कर 600 हो जाएगी।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि,'केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड के साथ विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है| इसके साथ ही लक्ष्मी विलास बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा अब नहीं होगी| सरकार ने आरबीआई को कहा है कि कुप्रबंधन करके जो बैंक को डूबने के कगार पर लाते हैं, ऐसे दोषियों को सजा होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना निधि द्वारा प्रायोजित एनआईआईएफ ऋण मंच में सरकार द्वारा 6,000 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश को मंजूरी दी है। साथ ही टेलीकॉम सेक्टर में एटीसी में एफडीआई को भी मंजूरी मिली है। टाटा समूह की कंपनी एटीसी के 12 फीसदी शेयर एटीसी पैसिफिक एशिया ने लिए हैं।
जावड़ेकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार ने आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए पूंजी के तौर पर अब डेट मार्केट का फायदा उठाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसी के तहत नेशनल इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) की स्थापना की गई। कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि इसमें छह हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। निवेश की यह प्रक्रिया दो साल में पूरी की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बॉन्ड मार्केट के द्वारा एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जुटाई जाएगी।