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25 अगस्त 2026

बहुत ही गर्व का क्षण, ISRO की उपलब्धि शानदार, बेमिसाल: चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग पर जयराम रमेश

नई दिल्ली: भारत के चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग हुई। चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। चंद्रयान-3 मिशन की स…

बहुत ही गर्व का क्षण, ISRO की उपलब्धि शानदार, बेमिसाल: चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग पर जयराम रमेश
बहुत ही गर्व का क्षण, ISRO की उपलब्धि शानदार, बेमिसाल: चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग पर जयराम रमेश | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: भारत के चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग हुई। चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। चंद्रयान-3 मिशन की सफल लैंडिंग पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा,'' ISRO की आज की उपलब्धि वाकई शानदार है, बेमिसाल है। 1962 के फरवरी महीने में होमी भाभा और विक्रम साराभाई की दूरदर्शिता के कारण INCOSPAR की स्थापना की गई। INCOSPAR यानी इंडियन नेशनल कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च। इसमें जो पहले व्यक्ति शामिल थे, पहले चार-पांच व्यक्ति जो शामिल थे, उनमें A.P.J अब्दुल कलाम थे। 



कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आगे कहा,''इसके बाद में 1969 में, अगस्त महीने में विक्रम साराभाई, जो हमेशा अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को विकास के दृष्टिकोण से देखा करते थे, ने ISRO की स्थापना की।  वर्ष 1972 और 1984 के बीच सतीश धवन आए और उन्होंने अद्वितीय नेतृत्व दिखाया। वैज्ञानिक, तकनीकी और मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से जो योगदान उनका रहा है, वो बिल्कुल बेमिसाल योगदान रहा है। उनके साथ ब्रह्म प्रकाश जी थे। ब्रह्म प्रकाश एकमात्र ऐसे व्यक्ति रहे हैं, जिन्होंने हमारे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम में भी परिवर्तनकारी योगदान दिया है।  


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सतीश धवन के बाद, U.R राव से शुरुआत हुई और कई चेयरमैन आए। उन सभी ने अपना विशेष योगदान दिया ISRO में और हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रमों में।   


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जयराम रमेश ने कहा,''आज हम जो सफलता देख रहे हैं वो एक सामूहिक संकल्प, एक सामूहिक कामकाज है और जो कहते हैं, एक कलेक्टिव टीम एफर्ट का नतीज़ा है। यह सिस्टम का नतीज़ा है। एक व्यक्ति का नहीं है। जहां लोग एक टीम वर्क के साथ, एक सामूहिक मानसिकता के साथ काम करते हैं। और पिछले कुछ वर्षों में ISRO की जो पार्टनरशिप है, जो भागीदारी है —‌ अलग-अलग शिक्षा के संस्थान हैं, निजी क्षेत्र की छोटी-छोटी कंपनियां हैं, जिन्हें आज स्टार्टअप्स कहते हैं, उनके साथ जो भागीदारी का कार्यक्रम ISRO की तरफ़ से हुआ है — उसका भी असर हम देख रहे हैं। आज का क्षण हमारे लिए बहुत ही गर्व का क्षण है और हम ISRO को सलामी देते हैं।




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