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24 अगस्त 2026

केंद्र ने अब डिक्टेटरशिप का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया: SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का मोदी सरकार पर हमला

नई दिल्ली: कृषि कानूनों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि,''हम केंद्र सरकार द्वारा काले कानून वापिस न लेने के फैसले की कड…

केंद्र ने अब डिक्टेटरशिप का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया: SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का मोदी सरकार पर हमला
केंद्र ने अब डिक्टेटरशिप का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया: SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का मोदी सरकार पर हमला | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कृषि कानूनों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि,''हम केंद्र सरकार द्वारा काले कानून वापिस न लेने के फैसले की कड़ी निंदा करते हैं। आज केंद्र सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक बात स्पष्ट हो गई कि केंद्र सरकार ने देश के अन्नदाता के खिलाफ लड़ाई लड़ने का फैसला किया है|




SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि,''कानून धक्के के साथ वहीं लागू किए जाते हैं जिन देशों में डिक्टेटरशिप का राज होता है। बड़ा अफसोस है कि केंद्र सरकार ने अब डिक्टेटरशिप का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है|




 सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि,''पहले जैसे इन्होंने (केंद्र सरकार) नोटबंदी फोर्स की, GST फोर्स किया वैसे ये चाहते हैं कि हम जो भी फैसला दफ्तरों में बैठकर बनाएं, उसे हम ज़बरदस्ती लागू करें। जब सारे देश के किसान ये कानून नहीं चाहते तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये क्यों रख रहे हैं|




इससे पहले आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि,'उनकी (किसानों) पहली मांग कानून निरस्त करने की थी। सरकार का पक्ष है कि कानून के वो प्रावधान जिनपर किसानों को आपत्ति है उन प्रावधानों पर सरकार खुले मन से बातचीत करने के लिए तैयार है| किसानों को लगता था कि उनकी एपीएमसी की मंडिया खत्म हो जाएंगी, जब किसी ट्रेड पर टैक्स लगता है तो व्यापारी किसान से ही टैक्स की वसूली करता है अगर टैक्स नहीं लगेगा तो इसका फायदा किसान को होगा|



कृषि मंत्री ने कहा कि,उनको ऐसा लगता है कि बिजली का कोई एक्ट आ रहा है जो किसानों के लिए थोड़ी तकलीफ पैदा करेगा। राज्य सरकारें बिजली वितरण कंपनियों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही, सब्सिडी की राशि हस्तांतरित करने की व्यवस्था संशोधन विधेयक में भी रहेगी। जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा|




तोमर ने कहा कि,''हम लोगों ने उनको एक पूरा प्रपोजल बनाकर कल दिया था। उनके सारे प्रश्नों का उत्तर देने के बाद भी अंत में वे लोग किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं इसका मेरे मन में बहुत कष्ट है|केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि,''किसान बहनों और भाईयों से आग्रह करता हूं कि आप सबने चर्चा के दौरान जो प्रश्न उठाए थे उनका समाधान करने के लिए लिखित प्रस्ताव भारत सरकार ने आपके पास भेजा है। आप उन पर विचार करें और आपकी तरफ से जब भी चर्चा के लिए कहा जाएगा भारत सरकार एकदम चर्चा के लिए तैयार है|





केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि,'मैंने सबको आश्वस्त किया है कि MSP चलती रहेगी। इस पर कोई खतरा नहीं है। MSP पर रबी और खरीफ फसल की खरीद इस साल बहुत अच्छे से हुई। इस बार रबी की फसल का बुआई के समय ही MSP घोषित कर दिया गया।कृषि मंत्री ने कहा कि,''कई बार ये कहा गया कि किसानों की भूमि पर बड़े उद्योगपति कब्ज़ा कर लेंगे। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पहले से ही देश के कई राज्यों में होती रही है। इस कानून के अंतर्गत एग्रीमेंट प्रोसेसर और किसान की फसल बीच ही होगा,किसान की भूमि से संबंधित कोई करार इसमें नहीं हो सकता|




केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि,''बातचीत में ये बात आती थी कि ये कानून वैध नहीं है क्योंकि कुछ लोगों ने बता रखा था कि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार इस पर कानून नहीं बना सकती| मंत्री ने कहा कि,''हमें ये लगता था कि गांव में किसान के सबसे नज़दीक अगर मजिस्ट्रियल पावर वाला कोई अधिकारी है तो वह एसडीएम है,  लेकिन न्यायालय में अगर किसी किसान को जाना है तो इसका विकल्प हम दे सकते हैं





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यह रिपोर्ट 10 दिसंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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