नई दिल्ली:अवैध बार विवाद: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा दायर मुकदमे में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेता डिसूजा को समन जारी किया। हर्जाने की मांग करने वाले स्मृति ईरानी के दायर मानहानि के मुकदमे पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी समन पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा,''हम अदालत के सामने तथ्यों को पेश करने के लिए उत्सुक हैं। हम स्मृति ईरानी द्वारा डाली जा रही दायर मुकदमें को चुनौती देंगे और खारिज करेंगे|
जयराम रमेश ने कहा,,"दिल्ली उच्च न्यायालय ने हमें स्मृति ईरानी द्वारा दायर मामले का औपचारिक जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। हम अदालत के सामने तथ्यों को पेश करने के लिए उत्सुक हैं। हम स्मृति ईरानी द्वारा डाली जा रही दायर मुकदमें को चुनौती देंगे और खारिज करेंगे|
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा,''श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा दायर मामले का औपचारिक जवाब देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने हमें नोटिस जारी किया है। हम अदालत के सामने तथ्य पेश करेंगे। हम इसे चुनौती देंगे और श्रीमती ईरानी जी द्वारा भटकाने के इस प्रयास का खंडन करेंगे।
बताते चलें कि, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दो करोड़ रुपये की मानहानि के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में सिविल सूट दाखिल किया है| हर्जाने की मांग करने वाले मंत्री द्वारा दायर दीवानी मानहानि के मुकदमे पर HC ने तीन कांग्रेसी नेताओं को समन जारी किया| दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा को भाजपा नेता स्मृति ईरानी और उनकी बेटी के खिलाफ आरोपों पर ट्वीट हटाने का निर्देश दिया| मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी|
कांग्रेस ने शनिवार को (23 जुलाई, 2022 को) आरोप लगाया था कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की पुत्री गोवा में 'गैरकानूनी बार' चला रही हैं| कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा था, कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति यह नहीं है कि हम किसी के निजी मसलों पर कोई टीका-टिप्पणी करें, लेकिन यह सवाल एक केंद्रीय मंत्री की राजनीतिक शैली और भ्रष्टाचार पर है। स्मृति ईरानी जी के परिवार पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लग रहे हैं |
दरअसल, एक खबर के मुताबिक,''बीते 21 जुलाई को गोवा के आबकारी आयुक्त नारायण एम. ने वकील एरेस रोड्रिग्स द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर ज़ोइश ईरानी द्वारा संचालित ‘सिली सोल्स कैफे एंड बार’ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था| आरोप था कि शराब लाइसेंस पाने के लिए ‘धोखाधड़ी वाले और मनगढ़ंत दस्तावेज पेश किए गए’| कारण बताओ नोटिस में कहा गया था, ‘लाइसेंस धारक की 17/05/2021 को मृत्यु हो जाने के बावजूद पिछले महीने लाइसेंस का नवीनीकरण किया गया था| यह नोट किया गया कि लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन 22 जून 2022 को एंथनी डीगामा के नाम पर किया गया था, हालांकि पिछले साल मई में उनकी मौत हो गई थी|
इस खबर के बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा,"हम श्रीमती स्मृति ज़ूबिन ईरानी की पुत्री का नाम नहीं लेंगे क्यूँकि वह राजनीति में नहीं हैं। लेकिन स्मृति ज़ूबिन ईरानी की पुत्री जो बार चला रही हैं, उस बार का लाइसेन्स एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर लिया गया जिसका देहांत हुए तेरह महीने हो गए।
पवन खेड़ा ने कहा,''गोवा में स्मृति ईरानी जी की बेटी द्वारा चलाए जा रहे एक 'रेस्टोरेंट' पर फर्जी लाइसेंस लेने का आरोप है। वह लाइसेंस एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर है, जिनका देहांत मई 2021 में हुआ और लाइसेंस जून 2022 में लिया गया| इसको लेकर एक्साइज कमिश्नर ने नोटिस भी जारी किया है| अब उस आबकारी अधिकारी का ट्रांसफर किया जाएगा|
पवन खेड़ा ने कहा,"गोवा के कानून के हिसाब से एक रेस्टोरेंट को बार का एक ही लाइसेंस मिल सकता है, इस रेस्टोरेंट को 2 लाइसेंस मिले हैं। वहीं तीसरा फर्जीवाड़ा यह है कि इस रेस्टोरेंट को रेस्टोरेंट चलाने का लाइसेंस भी नहीं मिला है |
उन्होंने कहा, ', इस गैरकानूनी रेस्टोरेंट/बार को नोटिस देने वाले आबकारी आयुक्त के ट्रांसफर की तैयारी शुरू की जा चुकी है। क्या यह स्मृति ईरानी जी के हस्तक्षेप के बिना हो रहा है? क्या यह लाइसेंस उनके प्रभाव के बिना मिला?......सवाल उठाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, स्मृति ईरानी जी, हम आपसे जानना चाहते हैं: - यह धांधली किसके इशारे पर हो रही है? - इस धांधली को किसका आशीर्वाद मिला है? - इस धांधली के पीछे किसका प्रभाव इस्तेमाल किया जा रहा है?
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूछा, 'किस के हस्तक्षेप से इस बार को लाइसेन्स मिला? किस के प्रभाव के चलते यह ग़ैर क़ानूनी बार चल रहा है? कौन उस आबकारी आयुक्त की ट्रान्स्फ़र करवाने की कोशिश कर रहा है जिसने स्मृति ईरानी के परिवार को नोटिस दिया? ...पवन खेड़ा ने कहा,'हम श्रीमती स्मृति ज़ूबिन ईरानी की पुत्री का नाम नहीं लेंगे क्यूँकि वह राजनीति में नहीं हैं। लेकिन स्मृति ज़ूबिन ईरानी की पुत्री जो बार चला रही हैं, उस बार का लाइसेन्स एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर लिया गया जिसका देहांत हुए तेरह महीने हो गए।