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24 अगस्त 2026

सावित्रीबाई फुले जी की प्रेरणादायक कहानी सभी को महिलाओ बेटियों को इनका इतिहास पढ़ना चाहिए.

"नारी शिक्षा की ज्योति।19वीं शताब्दी का भारत रूढ़ियों और अंधविश्वासों से घिरा हुआ था। महिलाओं को शिक्षा से दूर रखा जाता था, और समाज में उनके अधिकार नगण्य थे। इसी समाज में जन्मी सावित्रीबाई फुले ने शि…

सावित्रीबाई फुले जी की प्रेरणादायक कहानी सभी को महिलाओ बेटियों को इनका इतिहास पढ़ना चाहिए.
सावित्रीबाई फुले जी की प्रेरणादायक कहानी सभी को महिलाओ बेटियों को इनका इतिहास पढ़ना चाहिए. | फ़ोटो: TVL News

"नारी शिक्षा की ज्योति।

19वीं शताब्दी का भारत रूढ़ियों और अंधविश्वासों से घिरा हुआ था। महिलाओं को शिक्षा से दूर रखा जाता था, और समाज में उनके अधिकार नगण्य थे। इसी समाज में जन्मी सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा की अलख जगाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।
 "शिक्षा की ओर पहला कदम
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ। मात्र 9 वर्ष की उम्र में उनका विवाह ज्योतिराव फुले से हुआ। ज्योतिराव खुद एक समाज सुधारक थे और उन्होंने सावित्रीबाई को शिक्षित करने का निश्चय किया। उन्होंने न सिर्फ पढ़ने-लिखने में रुचि ली, बल्कि आगे चलकर खुद एक शिक्षिका बनने का फैसला किया
1848 में, सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले ने पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। उस समय समाज में यह एक क्रांतिकारी कदम था। ब्राह्मणों और कट्टरपंथियों ने इसका विरोध किया, क्योंकि उनका मानना था कि महिलाओं को शिक्षा देना धर्म के विरुद्ध है। सावित्रीबाई जब स्कूल जाती थीं, तो लोग उन पर गंदगी और पत्थर फेंकते थे। लेकिन वे बिना डरे अपने कार्य में जुटी रहीं।  
महिला अधिकारों की पक्षधर
सिर्फ शिक्षा ही नहीं, सावित्रीबाई ने विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह के खिलाफ आंदोलन और दलित उत्थान के लिए भी कार्य किया। उन्होंने महिला शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए आश्रम भी खोले।
सावित्रीबाई फुले समाज सेवा के प्रति इतनी समर्पित थीं कि 1897 में जब प्लेग फैला, तो वे रोगियों की सेवा करने लगीं। इसी दौरान वे खुद इस बीमारी की चपेट में आ गईं और 10 मार्च 1897 को उन्होंने अपना बलिदान दे दिया।
प्रेरणा और सीख
सावित्रीबाई फुले की कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चे संकल्प और हिम्मत से कोई भी बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा की लड़ाई लड़ी और समाज को एक नई दिशा दी। आज वे भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारिका के रूप में याद की जाती हैं।
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यह रिपोर्ट 7 फ़रवरी 2025 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 10 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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