श्रमिकों के पसीने की कमाई पर भी भ्रष्टाचारियों ने डाका डालने का काम किया है। ग्राम प्रधान और सचिवों की मिलीभगत से 1 लाख रुपये के करीब मजदूरी का पैसा फर्जीवाड़ा कर ग्रामीणों के खाते में भेज दिया। सीडीओ ने इसकी जांच कराई तो मामला खुलकर सामने आया।
जिलाधिकारी ने इस मामले में एपीओ की सेवा समाप्ति के साथ ही प्रधान पर कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए हैं। वहीं दोनों सचिवों और तकनीकी सहायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित करने को कहा है।
मामला सरसौल ब्लॉक के निवादा बौसर गांव का है। यहां के रहने वाले भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने ग्राम प्रधान समरजीत सिंह के खिलाफ मनरेगा में गलत तरीके से भुगतान कराने की शिकायत की थी।
उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन को बताया था कि 3 साल तक मनरेगा मजदूरों की आईडी से प्रधान ने ग्रामीणों के खाते में गलत भुगतान किया है।
इस पर सीडीओ ने 3 सदस्यीय समिति गठित कर जांच करायी। समिति की जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान समरजीत सिंह की मांग पर जॉब कार्डों में भुगतान किया गया था।
इस मामले में पंचायत सचिव हरिकृष्ण पाल ने वर्ष 2019 से 2021 तक और पंचायत सचिव सुरेंद्र गौतम ने तकनीकी सहायक प्रमेश यादव की मदद से वर्ष 2021 से 2022 तक करीब 99,912 रुपये श्रमिकों के खाते में न भेजकर, उसे ग्रामीणों के खातों में भुगतान कर दिया।
समिति की इस रिपोर्ट ने अधिकारियों में भी खलबली मचा दी। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई।
इसके बाद सरसौल बीडीओ निशांत राय को आरोपी सचिवों और तकनीकी सहायक पर रिपोर्ट दर्ज कराने को आदेशित किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद इन्हें निलंबित कर दिया जाएगा।