हल्दिया:पश्चिम बंगाल के हल्दिया में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,फ्लाईओवर के अलावा गैस और ईंधन से जुड़े तीन बड़े प्रोजेक्ट से भी यहां के उद्योगों को यहां के नागरिकों को बहुत लाभ होने वाला है। डोभी दुर्गापुर नेचुरल गैस पाइपलाइन अब बनकर तैयार है| पश्चिम बंगाल में रेलवे पर पिछले साल की तुलना में 25% से ज्यादा खर्च किया जाएगा.. इस साल के बज़ट में चाय बागानों से जुड़े लाखों साथियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इनके लिए 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,''बंगाल पहले से जितना आगे था, अगर बीते दशकों में उसकी वो गति और बढ़ी होती, तो आज बंगाल कहां से कहां पहुंच गया होता। आज यहां जितने भी उद्योग हैं, जितना भी कारोबार है, जितना भी इंफ्रास्ट्रक्चर है, वो बदलाव चाहते हैं, आधुनिकता चाहते हैं। लेकिन आप सोचिए, बीते 10 सालों में यहां की सरकार ने कितनी फैक्ट्रियों का शिलान्यास या उद्घाटन किया? उस बड़े स्टील प्लांट का क्या हुआ जो यहां की अराजक व्यवस्थाओं के कारण शुरु ही नहीं हो सका?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,'पश्चिम बंगाल की इस स्थिति का सबसे बड़ा कारण है यहां की राजनीति। आजादी के बाद जब पश्चिम बंगाल के विकास को नई दिशा देने की जरूरत थी तब यहां विकास वाली राजनीति नहीं हो पाई। पहले कांग्रेस ने शासन किया, तो भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। फिर लेफ्ट का शासन लंबे समय तक रहा, उन्होंने भ्रष्टाचार, अत्याचार बढ़ाने के साथ ही विकास पर ही ब्रेक लगा दिया।
PM मोदी ने कहा कि,''2011 में पूरे देश की नजरें बंगाल पर थीं। लेफ्ट की हिंसा और भ्रष्टाचार का जर्जर किला ढहने की कगार पर था। उस समय ममता दीदी ने बंगाल से परिवर्तन का वादा किया। उनके इस वादे ने पूरे देश का ध्यान खींचा, लोगों ने भरोसा किया। बंगाल को आस थी ममता की लेकिन उसे निर्ममता मिली।लेकिन ममता सरकार के पहले साल में ही ये साफ हो गया कि, बंगाल को जो मिला है वो परिवर्तन नहीं, लेफ्ट का पुनर्जीवन है। वो भी सूद समेत। लेफ्ट का पुनर्जीवन यानी। भ्रष्टाचार का पुनर्जीवन।अपराध और अपराधियों का पुनर्जीवन। हिंसा का पुनर्जीवन। लोकतन्त्र पर हमलों का पुनर्जीवन। इससे पश्चिम बंगाल में गरीबी का दायरा और बढ़ता गया।
PM मोदी ने कहा कि,''बंगाल में आप दीदी से अपने अधिकार की बात पूछ देंगे तो वो नाराज हो जाती हैं। यहाँ तक कि भारत माता की जय के नारे लगा दो, तो भी वो नाराज हो जाती हैं। लेकिन देश के खिलाफ बोलने वाले कितना भी जहर उगल दें, दीदी को गुस्सा नहीं आता। आपने न्यूज़ में देखा होगा कि इन दिनों भारत को बदनाम करने के लिए कैसे कैसे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र सामने आ रहे हैं, कैसी कैसी अंतरराष्ट्रीय साज़िशें हो रही हैं।अभी आपने न्यूज़ में देखा होगा कि इन दिनों भारत को बदनाम करने के लिए कैसे कैसे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र सामने आ रहे हैं, कैसी कैसी अंतरराष्ट्रीय साज़िशें हो रही हैं।
साजिश करने वालों की बेचैनी इतनी ज्यादा है कि भारत को बदनाम करने के लिए वो चाय से जुड़ी भारत की पहचान पर हमला करने की बात कह रहे हैं। टी वर्कर्स की कड़ी मेहनत पर हमला करने का षड्यंत्र किया जा रहा है।योग जैसी भारत की विरासत, जिसे महर्षि अरबिंदो और विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने निःस्वार्थ भाव से दुनिया तक पहुंचाया, उस योग पर हमला किया जा रहा है।
मां, माटी मानुष की बात करने वालों में आज भारत माता के लिए आवाज बुलंद करने का साहस नहीं है। साहस इसलिए नहीं है क्योंकि, इतने सालों में इन लोगों ने Politics को Criminalize किया है, करप्शन को Institutionalize किया है और प्रशासन और पुलिस को Politicize किया।अभी कुछ दिन पहले ही, मारीचझापी नरसंहार की दु:खद बरसी थी। देश इस घटना को, गरीबों और दलितों के इस नरसंहार को कभी नहीं भूलेगा।
लेकिन बंगाल तृणमूल से ये पूछना चाहता है- जिन पुलिस वालों ने नंदीग्राम में गोलियां चलाई थीं, जिन्होंने गरीबों का खून बहाया, आप उन्हीं को पार्टी में क्यों शामिल कर रहे हैं? बंगाल पूछना चाहता है- क्या बंगाल का गरीब क्या केवल वोट लेने के लिए ही है?लेकिन क्या आपने भारत के खिलाफ इस षड्यंत्रों और साजिशों पर दीदी के मुंह से एक भी वाक्य सुना है क्या?अनेकों ऐसे हैं जिन्हें देश के लोगों ने दशकों तक सेवा का मौका दिया, वो भी या तो चुप हैं या इन षड्यंत्रों का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन इस षड्यंत्रकारियों से मैं कहना चाहता हूं कि देश इन षडयंत्रों का पूरी ताकत से जवाब देगा।
ये वो सरकार है जो आपदा में भी भ्रष्टाचार के अवसर खोज लेती है। इससे बड़ा अपराध और क्या हो सकता है? इतना बड़ा चक्रवात आया, इतना कुछ तबाह हो गया। लोगों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने जो पैसे भेजे उसका इन लोगों ने क्या किया, ये पश्चिम बंगाल के लोग भली-भांति जानते हैं।हालात ये थी कि कोर्ट तक को इस पर सख्त टिप्पणी करनी पड़ी। आप कोरोना के दौरान आए संकट को भी याद करिए। पूरी दुनिया में ऐसा कोई नहीं था जो इससे प्रभावित नहीं हुआ हो, जिसकी रोजी-रोटी पर इसका असर न पड़ा हो।
केंद्र सरकार ने तुरंत पश्चिम बंगाल के लाखों परिवारों के लिए मुफ्त राशन की व्यवस्था की। लेकिन केंद्र सरकार के भेजे राशन को भी यहां की सरकार सही तरीके से गरीबों तक पहुंचाने में असफल रही।कोरोना के दौरान देशभर के किसानों के बैंक खाते में पीएम सम्मान निधि के तहत हजारों करोड़ रुपये जमा किए गए। अभी तक इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ से अधिक छोटे किसान परिवारों के बैंक खाते में 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं।इसमें पश्चिम बंगाल के भी लाखों किसान परिवार हो सकते थे। लेकिन, यहां के एक भी किसान को ये लाभ नहीं मिल पाया, क्योंकि यहां की सरकार ने इस योजना से जुड़ने से ही इनकार कर दिया था। सोचिए, पश्चिम बंगाल के किसानों के साथ कितना बड़ा अन्नाय किया गया।
मोदी ने कहा कि,''किसान के नाम पर कौन अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहा है और कौन किसानों के जीवन से एक-एक परेशानी दूर करने के लिए काम कर रहा है, ये देश पिछले 6 साल से देख रहा है| मैं बंगाल के किसान भाइयों को विश्वास दिलाने आया हूं कि इस चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में भारत सरकार की किसानों के लिए योजना को तेजी से लागू करने का काम किया जाएगा|
अब जब पश्चिम बंगाल के किसानों ने ममता दीदी को सबक सिखाने का मन बना लिया है, तो सिर्फ कहने के लिए कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने बेमन से इस योजना से जुड़ने की सहमति दे दी है।किसानों के पास सीधे पैसे जाएं, इससे यहां की सरकार को कितनी दिक्कत है, ये सिर्फ एक आंकड़े से समझ आता है। बंगाल के लाखों किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल सकता है।
इसमें से 25 लाख से ज्यादा किसानों ने TMC सरकार के पास इस सुविधा का लाभ लेने के लिए अप्लाई किया हुआ है। बंगाल में ऐसी सरकार है जिसने सिर्फ 6 हजार किसानों के नाम तय कर पाई है। सोचिए, सिर्फ 6 हजार किसान।ममता दीदी की सरकार, गरीबों की चिंता से कितना दूर है, इसका एक और उदाहरण केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना है। इस योजना के तहत पूरे देश के अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा से भी पश्चिम बंगाल का गरीब मरीज वंचित हैं।
बंगाल के मेरे किसान भाइयों को विश्वास देने आया हूं, इस चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनाना आपने तय कर लिया है। बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में भारत सरकार की किसानों की जो योजना है उसको तेज गति से लागू करने का निर्णय किया जाएगा।इतना ही नहीं, मैं बंगाल के किसानों को वादा करता हूं कि देश के और किसानों को जो लाभ मिला है आपको जिस लाभ से वंचित रखा गया है, वो पुराने पैसे भी भारत सरकार बंगाल के किसानों को देगी।
राज्य सरकार द्वारा खड़ी की गई तमाम अड़चनों के बावजूद, केंद्र सरकार बंगाल के लोगों के विकास के लिए पूरा प्रयास कर रही है। हाईवे, फ्लाइओवर हों, रेल नेटवर्क हो, एयरपोर्ट हों, पोर्ट हों, जलमार्ग हों, इंटरनेट की सुविधा हो, इन सभी पर केंद्र सरकार एक बड़ी राशि खर्च कर रही है।पश्चिम बंगाल का विकास तेज गति से करने के लिए यहां भी डबल इंजन की सरकार आवश्यक है। करप्शन और टोलाबाज़ी तब हटेगी, जब यहां “आसोल पोरिबोर्तोन” आएगा, जब यहां भाजपा की सरकार बनेगी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अभी लागू ही नहीं की है। राशनकार्ड धारक देश में कहीं भी अपने हिस्से का सस्ता राशन ले सके, इसके लिए वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना केंद्र सरकार चला रही है। पश्चिम बंगाल के लोगों को अब भी इसके लागू होने का इंतजार है। इसका सबसे बड़ा नुकसान दूसरे राज्यों में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के गरीब मजदूरों का हो रहा है। 7वां वेतन आयोग भी देश के कितने ही राज्यों में लागू हो चुका है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ये अभी तक लागू नहीं हो पाया है।
बंगाल फुटबाल से प्यार करने वाला राज्य है। फुटबाल की भाषा में कहना चाहता हूं, TMC ने एक बाद एक कई फाउल कर लिए हैं। Misgovernance का फाउल। विरोधियों पर हमले और हिंसा का फाउल। बंगाल के लोगों का पैसा लूटने का फाउल। आस्था पर हो रहे हमलों का फाउल। बंगाल की धरती के गौरव के लिए भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता का त्याग, उनकी तपस्या, उनके बलिदान ने समूचे बंगाल को ये ऐहसास करा दिया है कि इस बार 'पोरिबोर्तोन' होकर रहेगा।
मोदी ने कहा कि,''मां गंगा का उद्गम स्थल उत्तराखंड इस समय आपदा का सामना कर रहा है। ग्लेशियर टूटने से वहां नदी का जलस्तर बढ़ गया है। मैं उत्तारखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भारत सरकार के गृह मंत्री से लगातार संपर्क में हूं|राहत एवं बचाव का कार्य चल रहा है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मेडिकल सुविधाओं में कमी न हो, इसपर जोर दिया जा रहा है|