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24 अगस्त 2026

कृषि कानूनों की वापसी को लेकर सरकारी प्रताड़ना झेल रहे किसानों पर सरकार की चुप्पी दुःखद: मायावती का मोदी सरकार पर हमला

लखनऊ: कोरोना वायरस महामारी और सख्त प्रोटोकॉल के बीच संसद का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ संसद का बजट सत्र आज से शुरू होगा। बजट संसद में 1 फरवरी को…

कृषि कानूनों की वापसी को लेकर सरकारी प्रताड़ना झेल रहे किसानों पर सरकार की चुप्पी दुःखद: मायावती का मोदी सरकार पर हमला
कृषि कानूनों की वापसी को लेकर सरकारी प्रताड़ना झेल रहे किसानों पर सरकार की चुप्पी दुःखद: मायावती का मोदी सरकार पर हमला | फ़ोटो: TVL News

लखनऊकोरोना वायरस महामारी और सख्त प्रोटोकॉल के बीच संसद का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ संसद का बजट सत्र आज से शुरू होगा। बजट संसद में 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। बहुजन समाज पार्टी ने भी केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून के खिलाफ बजट सत्र से पहले संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध किया।


बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा,''आज राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा,''संसद के संयुक्त अधिवेशन में मा. राष्ट्रपति का अभिभाषण खासकर किसानों व गरीबों आदि के लिए घोर निराशाजनक।



मायावती ने ट्वीट किया,''संसद के संयुक्त अधिवेशन में मा. राष्ट्रपति का अभिभाषण खासकर किसानों व गरीबों आदि के लिए घोर निराशाजनक। कृषि के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने वाला किसान तीन कृषि कानूनों की वापसी को लेकर काफी आन्दोलित है व सरकारी प्रताड़ना झेल रहा है जिसपर सरकारी चुप्पी दुःखद। 



उन्होंने कहा,' बीएसपी ने केन्द्र सरकार द्वारा काफी अपरिपक्व तरीके से लाए गए नए कृषि कानूनों का संसद में व संसद के बाहर हमेशा विरोध किया है। देश के गरीबों, दलितों व पिछड़ों आदि की तरह किसानों के शोषण व अन्याय के विरूद्ध व इनके हक के लिए भी बीएसपी हमेशा आवाज उठाती रहेगी।




इससे पहले उन्होंने कहा,''बी.एस.पी. ने, देश के आन्दोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज मा. राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।साथ ही, कृषि कानूनों को वापस लेकर दिल्ली आदि में स्थिति को सामान्य करने का केन्द्र से पुनः अनुरोध तथा गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को बलि का बकरा न बनाए। इस मामले में यूपी के बीकेयू व अन्य नेताओं की आपत्ति में भी काफी सच्चाई। सरकार ध्यान दे।







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