● बीएसपी के साथ गठबंधन करने व सीएम बनाने का ऑफर '' पूर्णतयाः तथ्यहीन है अर्थात् इसमें रत्ती भर भी कोई सच्चाई नहीं-मायावती
● सीबीआई, ED व IT आदि से डर कर बीजेपी के खिलाफ काफी नरम रहने के आरोप में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है.
● बीजेपी के विरूद्ध राजनीतिक लड़ाई लड़ने में कांग्रेस का अपना रिकार्ड हमेशा ही काफी लचर व दुलमुल ही रहा है
● कांग्रेस पार्टी सत्ता में रहते हुए व सत्ता से बाहर हो जाने के लम्बे समय बाद अब तक बीजेपी व आरएसएस एण्ड कम्पनी से जी-जान से लडते हए कहीं भी नहीं दिखती है
● जबकि बीजेपी एण्ड कम्पनी साम. दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डे अपनाकर भारत को कांग्रेस मुक्त ही नहीं बल्कि विपक्ष-विहीन बनाकर पंचायत से संसद तक चीन जैसा ही एक पार्टी का सिस्टम बनाकर देश के लोकतंत्र व इसके संविधान को ही खत्म करने पर आतुर है।
● कांग्रेस पार्टी ने पिछला यूपी विधान सभा का आमचुनाव समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ मिलकर लड़ा था तब यह पार्टी यहाँ बीजेपी को सत्ता में आने से नहीं रोक पाई थी, ऐसा क्यों हुआ था? इसका भी जवाब जनता को इनको जरूर देना चाहिये।
● कांग्रेस हो या अन्य कोई भी पार्टी हो इनको दूसरी पार्टियों पर कुछ भी कहने से पहले खुद भी अपने गिरेबान में ज़रूर झांककर देख लेना चाहिये
लखनऊ: बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया है। मायावती ने कहा कि राहुल गांधी ने यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ा ही नहीं। उन्होंने कहा कि वह अपने बिखरे घर को तो संभाल नहीं पा रहे है। हम पर कटाक्ष कर रहे हैं। रविववार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा कि,'' कल कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गान्धी ने हमारी पार्टी व ख़ासकर पार्टी की मुखिया को लेकर जो कुछ टीका-टिप्पणी की है तो उससे इस पार्टी की विशेषकर दलितों व अन्य उपेक्षित वर्गों के साथ-साथ बी.एस.पी के प्रति भी हीन व जातिवादी मानसिकता तथा द्वेष की भावना भी साफ झलकती है, जबकि इन वर्गों के लोगो को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए बी.एस.पी पूरे जी-जान से लगी हुई है और जिन्हें कांग्रेस पार्टी ने अपने लम्बे अरसे के रहे शासनकाल में इनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए जमीनी हकीकत में कुछ भी ठोस कार्य नहीं किये हैं।
मायावती ने कहा कि,''साथ ही, इनके मद का सरकारी पैसा भी अधिकाशः दूसरे मदों पर ही खर्च कर दिया गया है। इनको आरक्षण व अन्य जरूरी सुविधाओं का भी पूरा लाभ नहीं दिया है, ताकि ये लोग आर्थिक तौर पर हमेशा दूसरों के ऊपर ही निर्भर बने रहे, जिससे दुःखी होकर ही फिर बहुत पहले ही बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनकी केन्द्र की रही सरकार से अपने कानून मन्त्री पद से इस्तीफा तक भी दे दिया था और फिर इनके बताये रास्तो पर चलकर ही मान्यवर कांशीराम जी ने बी.एस.पी की स्थापना की जिसको कमजोर व खत्म करने के लिए शुरू से ही कांग्रेस पार्टी हर घिनौने हथकण्डे इस्तेमाल कर रही है और अब तो खिसयानी बिल्ली खम्बा नोचे की तरह ही इस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अपने बिखरे हुये घर को तो संभाल नही पा रहे हैं बल्कि हमारी पार्टी बी.एस.पी की कार्यशैली पर जबरदस्ती की उंगली उठा रहे हैं जिससे बी.एस.पी के प्रति इनकी जबरदस्त बौखलाहट व नफरत आदि भी साफ नजर आती है।
उन्होंने कहा कि,''इतना ही नहीं बल्कि इससे पहले इनके पिता स्वर्गीय श्री राजीव गान्धी ने भी बी.एस.पी को बदनाम व कमजोर करने के लिए मान्यवर श्री कांशीराम जी को सीआईए का एजेन्ट तक भी बता दिया था, और अब इन्ही के ही पदचिन्हों पर चलकर इनका बेटा श्री राहुल गान्धी भी बी.एस.पी व इस पार्टी की मुखिया पर आए दिन, बीजेपी के साथ मिलने का यह कहकर गलत आरोप लगाते रहते हैं कि बी.एस.पी की मुखिया बीजेपी की सीबीआई, ईडी व इनकम टैक्स आदि से डरती हैं। इसलिए वह बीजेपी के खिलाफ काफी नरम रहती हैं, जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है जबकि इनको यह मालूम होना चाहिये कि इन सब से जुड़े मामले हमने केन्द्र में रही किसी भी पार्टी की सरकार की मदद से नहीं बल्कि सभी सरकारों के खिलाफ जाकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में जीते हैं।
उन्होंने कहा कि,''इसके साथ ही, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी का कल सार्वजनिक तौर पर यह कहना कि कांग्रेस द्वारा यू.पी. विधानसभा आमचुनाव में बीएसपी के साथ गठबंधन करने व मुझे सीएम बनाने के ऑफर पर मैंने न कोई जवाब दिया तथा इस बारे में उन्होंने बात तक भी नहीं की है, यह बात पूर्णतयाः तथ्यहीन है अर्थात् इसमें रत्ती भर भी कोई सच्चाई नहीं है। हालाँकि यूपी विधानसभा आमचुनाव के घातक नतीजों पर हर विपक्षी पार्टियों द्वारा समीक्षा होनी चाहिए. किन्तु ऐसी तथ्यहीन बातें नहीं की जानी चाहिए|
मायावती ने कहा कि ''''वैसे भी कांग्रेस को विपक्षी पार्टियों में से ख़ासकर बी.एस.पी व उसके नेतृत्व के बारे में कोई भी टीका-टिप्पणी करने से पहले सौ बार सोच-विचार ज़रूर कर लेना चाहिए कि बीजेपी से लोहा लेने के मामले में उनकी अपनी पार्टी का अब तक अपना रिकार्ड क्या रहा है?
साथ ही, बी.एस.पी व उसके नेतृत्व के साथ कदम-कदम पर राजनीतिक षडयंत्र, दगा व खासकर मध्यप्रदेश व राजस्थान आदि राज्यों में बार-बार विश्वासघात किए जाने आदि को थोड़ी देर के लिए भुला भी दिया जाए तो भी बीजेपी के विरूद्ध राजनीतिक लड़ाई लड़ने में कांग्रेस का अपना रिकार्ड हमेशा काफी लचर व ढुलमुल ही रहा है अर्थात् कांग्रेस पार्टी सत्ता में रहते हुए व सत्ता से बाहर हो जाने के लम्बे समय बाद अब तक बीजेपी व आरएसएस एण्ड कम्पनी से जी-जान से लड़ते हुए हमें कहीं भी नहीं दिखती है, जबकि बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोग साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डे अपनाकर भारत को कांग्रेस मुक्त ही नहीं बल्कि विपक्ष-विहीन बनाकर पंचायत से संसद तक चीन जैसा ही एक पार्टी का सिस्टम बनाकर देश के लोकतंत्र व इसके संविधान को ही खत्म कर देने पर आतुर लगती है।
उन्होंने कहा कि,''इतना ही नही बल्कि कांग्रेस पार्टी के बारे में भी हमारे लोग यह बात काफी अच्छी तरह से जानते हैं कि जब सन् 2007 में बी.एस.पी की यू.पी में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी तब उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी, जिसने जातिगत द्वेष की भावना से मेरी सरकार के केन्द्र से जुड़े ज्यादातर कार्य रोक दिये थे और उसी दौरान कोर्ट का अयोध्या को लेकर फैसला आना था तो इन्होंने केन्द्र से हमें फोर्स तक भी नहीं दिया था ताकि प्रदेश के हालात बिगड़ जायें और फिर इसकी आड़ में यू.पी में राष्ट्रपति शासन लगाकर पर्दे के पीछे से कांग्रेस पार्टी यहाँ अपनी हकूमत चलाती रहे, जिसमें भी यह पार्टी बुरी तरह से विफल रही है।
उन्होंने कहा कि,''इतना ही नही बल्कि खुद श्री राहुल गान्धी ने भी उस समय आये दिन यहाँ यू.पी में मेरी सरकार को जबरदस्ती बदनाम करने के लिए कभी पैदल मार्च किया तो कभी धरना-प्रदर्शन आदि भी खूब किया है, लेकिन यहाँ दूसरी पार्टियों की रही सरकारों में इन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। यहाँ मैं इस बात को फिर से दोहराना चाहती हूँ कि इनको हमारी पार्टी के बारे में कुछ भी कहने से पहले केवल अपना खुद का घर भी ज़रूर देखना चाहिये, जो बिखरा पड़ा है जिसका बीजेपी भी खूब फायदा उठा रही है अर्थात् इनको दूसरों की चिन्ता करने की बजाय अपनी पार्टी की चिन्ता करनी चाहिये तो यह उनके लिए ज्यादा बेहतर होगा. यह मेरी इनको सलाह भी है।
मायावती ने कहा कि ,''जहाँ तक यू.पी में अभी हाल ही में हुये विधान सभा आमचुनाव के आये नतीजों का सवाल है तो इस चुनाव में इस बार जिन कारणों से बी.एस.पी. का रिजल्ट अच्छा नहीं आया है वो मैंने दिनांक 11 मार्च को मीडिया में सही-सही बता दिया है और उन कारणों को भी समझकर तब इनको बी.एस.पी. पर कोई टीका-टिप्पणी आदि करनी चाहये।
मायावती ने कहा कि,''इसके साथ ही यहाँ मै इनको यह भी बताना चाहती हूँ कि हमारी पार्टी का कार्य करने का तरीका अलग है। उसे हम किसी के भी कहने से बदलने वाले नहीं है। हमारी पार्टी दूसरी पार्टियों की तरह गली-कूचों, चौराहों पर बैठ जाना, बस व घाट यात्रा आदि निकाल कर किस्म-किस्म के नाटकबाजी आदि नहीं करती है।'' उन्होंने कहा कि,''इसके साथ ही संसद ??ें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहल गान्धी अचानक उठकर जबरदस्ती प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के गले चिपक जाते हैं, यह सब हमारी पार्टी नाटक नही करती है जिसकी पूरे देश व दुनिया में भी काफी हँसी हुई है अर्थात् यह सब हमारी पार्टी की कार्यशैली नहीं है।
उन्होंने कहा कि,''इसके साथ-साथ यहाँ मैं कांग्रेस को यह भी याद दिलाना चाहूंगी कि कांग्रेस ने पिछला विधान सभा का चुनाव समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ मिलकर लड़ा था तब यह पार्टी यहाँ बीजेपी को सत्ता में आने से नही रोक पाई थी, ऐसा क्यों हुआ? इसका भी जवाब जनता को इनको जरूर देना चाहिये। इसलिए अब संक्षेप में मेरा यही कहना है कि कांग्रेस हो या अन्य कोई भी पार्टी हो इनको दूसरी पार्टियों पर कुछ भी कहने से पहले खुद भी अपने गिरेबान में जरूर झाँककर देखना चाहिये तो यह इनके लिए ज्यादा बेहतर होगा। इन्हीं कुछ जरूरी बातों के साथ ही अब मैं अपनी बात यहीं समाप्त करती हूँ।
हमने मायावती को संदेश दिया था कि गठबंधन कीजिए और मुख्यमंत्री बनिए, उन्होंने बात तक नहीं की:राहुल गांधी
राहुल गांधी ने शनिवार को बयान दिया था कि उनकी पार्टी ने बसपा सुप्रीमो मायावती को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने हमसे बात तक नहीं की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मायावती ने सीबीआई, ईडी और पेगासस की वजह से सत्तारूढ़ भाजपा को चुनाव में खुला रास्ता मुहैया कराया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि,'' मायावती ने चुनाव ही नहीं लड़ा। हमने मायावती को संदेश दिया कि गठबंधन कीजिए और मुख्यमंत्री बनिए। उन्होंने बात तक नहीं की। जिन लोगों ने अपना खून, पसीना देकर उत्तर प्रदेश में दलितों की आवाज़ को जगाया। आज मायावती कहती हैं कि मैं उस आवाज़ के लिए नहीं लडूंगी|
राहुल गांधी ने कहा है कि हमने तो ये भी कहा था कि वो मुख्यमंत्री बन सकती हैं| लेकिन उन्होंने CBI, ED के डर से चुनाव ही ठीक से नहीं लड़ा| हम कांशीराम का काफी सम्मान करते हैं| उन्होंने दलितों को सशक्त किया था| हालांकि, इससे कांग्रेस कमजोर हुई, लेकिन ये मुद्दा नहीं है|राहुल गांधी ने कहा कि,''मायावती कहती हैं कि वे नहीं लड़ेंगी| रास्ता एकदम खुला है, लेकिन सीबीआई, ईडी, पेगासस की वजह से वे लड़ना नहीं चाहती हैं|