लखनऊ/नई दिल्ली: भारत बनाम इंडिया विवाद पर बसपा प्रमुख मायावती ने आज बुधवार को कहा,' यह सत्ता पक्ष और विपक्ष की एक सुनियोजित साजिश है...चुनाव से पहले उन्होंने जो राजनीति की है, जनता उसे समझती है...उन्होंने बेरोजगारी, गरीबी और महंगाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को दरकिनार कर दिया है...| उन्होंने कहा कि,'''देश के नाम को लेकर अपने संविधान के साथ छेड़छाड़ करने का मौका भाजपा के NDA को खुद विपक्ष ने एक सोची समझी रणनीती के तहत अपने गठबंधन का नाम INDIA रखकर दिया है। यह भी कहा जा सकता है कि यह सब सत्ता और विपक्ष अंदरूनी रूप से मिलकर कर रहे हैं। इसकी भी आशंका है|,'"क्या संविधान में बदलाव या बदलाव करना और लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना उचित है? हमारी पार्टी इसे उचित नहीं मानती है यानी यह पूरी तरह से गलत है।"
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को मीडिया को सम्बोधित करते हुये कहा कि जैसाकि यह विदित है कि भारत अर्थात् इण्डिया देश का चिर-परिचित व गरिमामय संवैधानिक नाम है तथा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के इस पवित्र, मानवतावादी व जनकल्याणकारी संविधान से अपने देश के सभी जाति एवं धर्मों के मानने वाले लोगों का अपार प्रेम, बेहद लगाव एवं सम्मान है जिसे बदलकर व छेड़छाड़ आदि करके इनकी भावना के साथ कोई भी खिलवाड़ करना क्या यह उचित व न्यायसंगत है? जबकि इस मामले में हमारी पार्टी का यह मानना है कि यह कतई भी उचित व न्यायसंगत नहीं है अर्थात् यह घोर अनुचित है|
मायावती ने आगे कहा कि,''इतना ही नहीं बल्कि इस बारे में सच्चाई यह है कि देश के नाम को लेकर अपने संविधान के साथ छेड़छाड़ करने का मौका बीजेपी के एनडीए को यहाँ खुद विपक्ष ने एक सोची-समझी रणनीति व षड़यन्त्र के तहत् अपने गठबन्धन का नाम 'इण्डिया' रखकर इनको दिया है। या फिर यह कहा जाये कि यह सब कुछ सत्तापक्ष व विपक्ष की अन्दरुनी मिलीभगत से हो रहा है। इसकी भी आशंका है, जिसकी जितनी भी निन्दा की जाये वह कम है। यदि यह सब कुछ ऐसा हो रहा है तो इसकी जितनी भी निन्दा की जाय वह कम ।
वैसे भी कांग्रेस व बीजेपी द्वारा चुनाव पूर्व इनकी इस राजनीति को अर्थात् भारत बनाम इण्डिया बनाने के इनके इस घिनौने खेल को लोग अच्छी प्रकार से समझ रहे हैं, जिसकी वजह से अब इन्होंने यहाँ गरीबी, मंहगाई बेरोजगारी व विकास आदि के ये खास व अत्यन्त जरूरी मुद्दे दरकिनार कर दिये हैं । इसीलिए हमारी पार्टी का इन दोनों जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूँजीवादी गठबन्धनों से दूरी बनाये रखना पूरे तौर से सही व जनहितेषी भी है।
उन्होंने कहा,''इसके साथ ही, यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि विपक्षी गठबन्धन के इण्डिया नाम को लेकर, बीजेपी व इनके एनडीए को तथा इनकी केन्द्र की सरकार को जबकि यह चाहिये था कि इनको लगे हाथ ही इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिये था, या फिर, इस मामले में कानून बनाकर सम्बन्धित नाम रखे जाने पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिये था, किन्तु ऐसा ना करके अब इसको लेकर जो संकीर्ण राजनीति की जा रही है यह ठीक नहीं है व जनविरोधी भी है ।
इसलिए ऐसी स्थिति में हमारी पार्टी यह चाहेगी कि अब माननीय सुप्रीम कोर्ट को खुद इसका संज्ञान लेकर यहाँ ऐसे सभी संगठनों, पार्टियों व गठबन्धनों आदि पर तुरन्त रोक लगाना चाहिये, जो विशेषकर अपने देश के नाम पर बने हैं, वरना फिर अपने देश की गरिमा को भी काफी ठेस पहुँचेगी।
उन्होंने कहा,''इतना ही नहीं बल्कि विपक्ष व अब सत्तापक्ष द्वारा भी अपने देश के नाम पर की जा रही इस स्वार्थी व संकीर्ण राजनीति से फिर अपने संविधान के साथ आए दिन छेड़छाड़ करने का किसी को भी खुला मौका मिल जायेगा । बसपा प्रमुख ने कहा,'अब मुझे पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का खुद संज्ञान लेकर अपने संविधान के साथ किसी भी पार्टी व फ्रन्ट आदि को छेड़छाड़ करने का मौका नहीं देगा
‘प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया’ नहीं ‘प्रेसिडेंट ऑफ़ भारत’ के नाम से भेजा गया G20 के रात्रिभोज का न्योता
कुछ ही समय पहले विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ गठबंधन बनाया है और इसका नाम ''INDIA'' रखा है। विपक्षी गठबंधन के नाम के ऐलान के बाद से ही बीजेपी विपक्षी दलों पर हमलावर है। मोदी सरकार आने वाले दिनों में भारत के संविधान से 'इंडिया' शब्द को भी हटाने की तैयारी में जुट गई है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार आगामी 18 से 22 सितंबर के दौरान आयोजित किए जाने वाले संसद के विशेष सत्र में इस प्रस्ताव से जुड़े बिल को पेश कर सकती है।
बता दें, दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले, विपक्ष द्वारा गठबंधन का नाम 'इंडिया' रखने के बाद केंद्र ने राष्ट्रपति भवन में जी20 शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज के लिए जो निमंत्रण पत्र राष्ट्रपति भवन की ओर से भेजा है उसमें बदलाव किया है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्द प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को बदल दिया गया है। G-20 के बाद 9 तारीख को डिनर के लिए राष्ट्रपति की तरफ से भेजे गए इन्विटेशन में इस बार प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा गया है|
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने इस आमंत्रण पर नाराजगी जताई है। सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने सत्तारूढ़ सरकार पर नवगठित 'INDIA' गठबंधन के डर से इतिहास को विकृत करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। राष्ट्रपति भवन द्वारा 9 सितंबर के जी20 रात्रिभोज के लिए 'प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया' के बजाय 'प्रेसीडेंट ऑफ भारत' के नाम पर निमंत्रण भेजे जाने पर कांग्रेस ने सरकार पर पलटवार किया और कहा कि यह "राज्यों के संघ" पर भी हमला है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति भवन में 9 सितंबर को आयोजित जी-20 रात्रिभोज के लिए सामान्य 'इंडिया की राष्ट्रपति' के बजाय 'भारत के राष्ट्रपति' के नाम पर निमंत्रण भेजने के मामले को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी ने कहा कि मैंने सुना है कि आज उन्होंने ‘इंडिया’ का नाम बदलकर भारत कर दिया है। यह देश के इतिहास को विकृत करने का खुला प्रयास है। वे हमेशा ऐसा करने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन, यह हमें स्वीकार्य नहीं है।